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Deoria News: त्योहार में बजा तेज डीजे, अब सुनाई देने में हो रही दिक्कत
Thu, 17 Oct 2024 03:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 17 Oct 2024 03:08 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। दशहरा त्योहार बीतने के बाद कान की बीमारी से पीड़ितों की संख्या में इजाफा हुआ है। तेज आवाज में डीजे बजाने से कान पर असर पड़ा है। लोगों को अचानक कम सुनाई देना, सनसनाहट आदि की समस्या आई है। मेडिकल कॉलेज में इस तरह की शिकायत लेकर रोजाना दस से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। डाॅक्टर दवा के साथ जांच कराने की सलाह दे रहे हैं।
शहर के लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह दुर्गा प्रतिमाएं रखी गई थीं। इन स्थानों पर तेज आवाज में डीजे पर भक्ति गीत सुबह से लेकर रात भर बजते रहे। वहीं विसर्जन के समय तो तेज आवाज में बजाए जा रहे थे। इसका दुष्प्रभाव कुछ लोगों के कानों के सुनने की क्षमता पर पड़ा है। 90 डेसिबल से अधिक तेज आवाज से लोग कान की बीमारी से पीड़ित हुए हैं। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग की ओपीडी में इन दिनों इस तरह की समस्या लेकर आने वालों की संख्या बढ़ी है। तीन दिन में करीब तीस से अधिक लोग इलाज कराने पहुंचे हैं, जिसमें युवा अधिक रहे। इसमें कुछ लोगों को कान में दर्द, सनसनाहट, अचानक कम सुनाई देने की दिक्कत थी। बुधवार को 234 मरीज आए, जिसमें 11 लोग तेज आवाज से पीडि़त थे। डॉक्टर ने जांच कर दवा दी। साथ ही आराम न मिलने पर आडियोमेट्री जांच कराने को कहा।
ईएनटी विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि तेज आवाज से नोयस इंड्यूस सेंसरी न्यूरल ईयरिंग लास बीमारी से लोग पीड़ित होते हैं। 90 डेसिबल से अधिक साउंड कान के लिए नुकसानदायक होता है। तेज आवाज से कान में सनसनाहट, भारीपन, अचानक सुनाई कम देना हो जाता है, जबकि कान की नस के सूखने का डर रहता है। सकती है और पर्दा में छेद हो सकता है। जबकि दर्द, सनसनाहट की समस्या उत्पन्न होती है। तेज आवाज से बीपी, शुगर, हर्ट, पहले से नस कमजोर होने की बीमारी से पीड़ितों तथा 50 साल से अधिक के लोगों में कान की बीमारी बढ़ जाती है। कान में दिक्कत होने पर तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए। कान में परेशानी होने पर जल्द से जल्द इलाज कराना चाहिए। एक माह के अंदर सही इलाज शुरू होने पर पर बीमारी ठीक हो सकती है। लापरवाही बरतने पर सुधार की संभावना कम रहती है। मशीन का सहारा लेना पड़ सकता है।
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देवरिया। दशहरा त्योहार बीतने के बाद कान की बीमारी से पीड़ितों की संख्या में इजाफा हुआ है। तेज आवाज में डीजे बजाने से कान पर असर पड़ा है। लोगों को अचानक कम सुनाई देना, सनसनाहट आदि की समस्या आई है। मेडिकल कॉलेज में इस तरह की शिकायत लेकर रोजाना दस से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। डाॅक्टर दवा के साथ जांच कराने की सलाह दे रहे हैं।
शहर के लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह दुर्गा प्रतिमाएं रखी गई थीं। इन स्थानों पर तेज आवाज में डीजे पर भक्ति गीत सुबह से लेकर रात भर बजते रहे। वहीं विसर्जन के समय तो तेज आवाज में बजाए जा रहे थे। इसका दुष्प्रभाव कुछ लोगों के कानों के सुनने की क्षमता पर पड़ा है। 90 डेसिबल से अधिक तेज आवाज से लोग कान की बीमारी से पीड़ित हुए हैं। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग की ओपीडी में इन दिनों इस तरह की समस्या लेकर आने वालों की संख्या बढ़ी है। तीन दिन में करीब तीस से अधिक लोग इलाज कराने पहुंचे हैं, जिसमें युवा अधिक रहे। इसमें कुछ लोगों को कान में दर्द, सनसनाहट, अचानक कम सुनाई देने की दिक्कत थी। बुधवार को 234 मरीज आए, जिसमें 11 लोग तेज आवाज से पीडि़त थे। डॉक्टर ने जांच कर दवा दी। साथ ही आराम न मिलने पर आडियोमेट्री जांच कराने को कहा।
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ईएनटी विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि तेज आवाज से नोयस इंड्यूस सेंसरी न्यूरल ईयरिंग लास बीमारी से लोग पीड़ित होते हैं। 90 डेसिबल से अधिक साउंड कान के लिए नुकसानदायक होता है। तेज आवाज से कान में सनसनाहट, भारीपन, अचानक सुनाई कम देना हो जाता है, जबकि कान की नस के सूखने का डर रहता है। सकती है और पर्दा में छेद हो सकता है। जबकि दर्द, सनसनाहट की समस्या उत्पन्न होती है। तेज आवाज से बीपी, शुगर, हर्ट, पहले से नस कमजोर होने की बीमारी से पीड़ितों तथा 50 साल से अधिक के लोगों में कान की बीमारी बढ़ जाती है। कान में दिक्कत होने पर तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए। कान में परेशानी होने पर जल्द से जल्द इलाज कराना चाहिए। एक माह के अंदर सही इलाज शुरू होने पर पर बीमारी ठीक हो सकती है। लापरवाही बरतने पर सुधार की संभावना कम रहती है। मशीन का सहारा लेना पड़ सकता है।
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