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भारांक के फेर में उलझा विकास प्राधिकरण का प्रस्ताव
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भारांक के फेर में उलझा विकास प्राधिकरण का प्रस्ताव
प्राधिकरण के लिए 60 की है अनिवार्यता, है 57 भारांक
एक साल पूर्व डीएम ने शासन को भेजा था देवरिया को विकास प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव
188 राजस्व गांव और तीन नगर निकायों को मिलकर बनना है विकास प्राधिकरण
बैकुंठ नाथ शुक्ल
देवरिया। बेतरतीब बसावट से जूझ रहे शहर को विकास प्राधिकरण बनाने के लिए जिला प्रशासन ने जो कसरत की वह बेनतीजा साबित होने लगी है। तीन प्रतिशत भारांक कम होने के चलते शहर को प्राधिकरण बनाने की कवायद ठंडे बस्ते में चली गई है।
डीएम अमित किशोर ने अगस्त 2018 में देवरिया को विकास प्राधिकरण बनाने की पहल की। 25 अक्तूबर को नियंत्रक प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र देवरिया की बैठक में देवरिया को विकास प्राधिकरण बनाने पर चर्चा की गई। अपीलों की सुनवाई व विकास शुल्क के संबंध में बैठकें कर संबंधित लोगों के सुझाव पर अमल के बाद यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया। शासन की ओर से समय-समय पर कई बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी गईं। विनियमित क्षेत्र के कर्मचारियों ने 188 राजस्व गांव व तीन नगरों को मिलाकर देवरिया विकास प्राधिकरण का नक्शा तैयार किया। यातायात मार्ग, रेलवे, जनसंख्या का आकार, जनसंख्या की दशक वृद्धि दर, व्यावसायिक ढांचा, आवासीय कमी, महायोजना की स्थिति आदि की भारांक गणना की गई। 62 भारांक का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। जो शासन की नजर में घटकर 57 हो गया है।
इनसेट
यहां फंसा है पेच
गाइडलाइन के अनुसार ऐसे नगर निकाय क्षेत्र जिनका भारांक 60 या इससे अधिक है उन्हें विकास प्राधिकरण बनाया जा सकता है। जिला प्रशासन की ओर से प्रस्तावित विकास प्राधिकरण का भारांक 62 दर्शाया गया था। इसमें जनसंख्या के आंकड़े अमृत योजना वर्ष 2018 में किए गए सर्वे के अनुसार दिए गए थे। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले का भारांक महज 57 हो रहा है। भारांक की कमी के चलते यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया है।
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इनसेट
सीमा विस्तार हो तो बन जाए बात
नगर पालिका का सीमा विस्तार हो तो देवरिया विकास प्राधिकरण बनने की राह आसान हो जाएगी। जानकारों की मानें तो इसमें प्रस्तावित गांवों की जनसंख्या जोड़ने पर भरांक 62 से भी अधिक हो सकता है। नगर पालिका के सीमा विस्तार की कोशिश वर्ष 2008 से चल रही है। दस साल पूर्व नगर क्षेत्र की सीमा से सटे 32 गांवों को पालिका में शामिल करने के लिए बोर्ड बैठक में सभासदों ने प्रस्ताव पास किया था। तबसे तत्कालीन चेयरमैन व डीएम की ओर से शासन में कई बार रिमाइंडर भेजे गए। ठोस पैरवी के अभाव में यह प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में पड़ा है।
इनसेट
ऐसे तैयार हुआ है विकास प्राधिकरण का नक्शा
प्रस्तावित विकास प्राधिकरण में नगर पालिका परिषद देवरिया, नगर पंचायत रामपुर कारखाना, नगर पंचायत गौरीबाजार को शामिल किया गया है। इसके अलावा आसपास के 188 राजस्व गांव जोड़े गए हैं। नगरीय निकायों सहित 188 गांवों को मिलाकर विकास प्राधिकरण का नक्शा शासन को भेजा गया है।
इनसेट
कब क्या हुआ
25 अगस्त 2018 को डीएम की अध्यक्षता में आयोजित नियंत्रक प्राधिकारी समिति की बैठक में विकास प्राधिकरण की रणनीति बनी।
15 सितंबर 2018 को प्रस्ताव से संबंधित अपीलों की सुनवाई की गई।
28 सितंबर 2018 को डीएम ने प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को प्रस्ताव भेजा।
17 अक्तूबर को मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक ने प्रस्तावित विकास प्राधिकरण का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया।
16 अप्रैल 2019 को तीन बिंदुओं पर आधारित सूचना शासन को भेजी गई।
वर्जन
देवरिया को विकास प्राधिकरण बनाने संबंधी प्रस्ताव को लेकर शासन स्तर से जो भी जानकारी मांगी जा रही है उसे उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन का जैसा निर्देश होगा हम आगे की कार्रवाई करेंगे।
- राकेश पटेल, एडीएम प्रशासन।
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प्राधिकरण के लिए 60 की है अनिवार्यता, है 57 भारांक
एक साल पूर्व डीएम ने शासन को भेजा था देवरिया को विकास प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव
188 राजस्व गांव और तीन नगर निकायों को मिलकर बनना है विकास प्राधिकरण
बैकुंठ नाथ शुक्ल
देवरिया। बेतरतीब बसावट से जूझ रहे शहर को विकास प्राधिकरण बनाने के लिए जिला प्रशासन ने जो कसरत की वह बेनतीजा साबित होने लगी है। तीन प्रतिशत भारांक कम होने के चलते शहर को प्राधिकरण बनाने की कवायद ठंडे बस्ते में चली गई है।
डीएम अमित किशोर ने अगस्त 2018 में देवरिया को विकास प्राधिकरण बनाने की पहल की। 25 अक्तूबर को नियंत्रक प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र देवरिया की बैठक में देवरिया को विकास प्राधिकरण बनाने पर चर्चा की गई। अपीलों की सुनवाई व विकास शुल्क के संबंध में बैठकें कर संबंधित लोगों के सुझाव पर अमल के बाद यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया। शासन की ओर से समय-समय पर कई बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी गईं। विनियमित क्षेत्र के कर्मचारियों ने 188 राजस्व गांव व तीन नगरों को मिलाकर देवरिया विकास प्राधिकरण का नक्शा तैयार किया। यातायात मार्ग, रेलवे, जनसंख्या का आकार, जनसंख्या की दशक वृद्धि दर, व्यावसायिक ढांचा, आवासीय कमी, महायोजना की स्थिति आदि की भारांक गणना की गई। 62 भारांक का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। जो शासन की नजर में घटकर 57 हो गया है।
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यहां फंसा है पेच
गाइडलाइन के अनुसार ऐसे नगर निकाय क्षेत्र जिनका भारांक 60 या इससे अधिक है उन्हें विकास प्राधिकरण बनाया जा सकता है। जिला प्रशासन की ओर से प्रस्तावित विकास प्राधिकरण का भारांक 62 दर्शाया गया था। इसमें जनसंख्या के आंकड़े अमृत योजना वर्ष 2018 में किए गए सर्वे के अनुसार दिए गए थे। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले का भारांक महज 57 हो रहा है। भारांक की कमी के चलते यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया है।
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सीमा विस्तार हो तो बन जाए बात
नगर पालिका का सीमा विस्तार हो तो देवरिया विकास प्राधिकरण बनने की राह आसान हो जाएगी। जानकारों की मानें तो इसमें प्रस्तावित गांवों की जनसंख्या जोड़ने पर भरांक 62 से भी अधिक हो सकता है। नगर पालिका के सीमा विस्तार की कोशिश वर्ष 2008 से चल रही है। दस साल पूर्व नगर क्षेत्र की सीमा से सटे 32 गांवों को पालिका में शामिल करने के लिए बोर्ड बैठक में सभासदों ने प्रस्ताव पास किया था। तबसे तत्कालीन चेयरमैन व डीएम की ओर से शासन में कई बार रिमाइंडर भेजे गए। ठोस पैरवी के अभाव में यह प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में पड़ा है।
इनसेट
ऐसे तैयार हुआ है विकास प्राधिकरण का नक्शा
प्रस्तावित विकास प्राधिकरण में नगर पालिका परिषद देवरिया, नगर पंचायत रामपुर कारखाना, नगर पंचायत गौरीबाजार को शामिल किया गया है। इसके अलावा आसपास के 188 राजस्व गांव जोड़े गए हैं। नगरीय निकायों सहित 188 गांवों को मिलाकर विकास प्राधिकरण का नक्शा शासन को भेजा गया है।
इनसेट
कब क्या हुआ
25 अगस्त 2018 को डीएम की अध्यक्षता में आयोजित नियंत्रक प्राधिकारी समिति की बैठक में विकास प्राधिकरण की रणनीति बनी।
15 सितंबर 2018 को प्रस्ताव से संबंधित अपीलों की सुनवाई की गई।
28 सितंबर 2018 को डीएम ने प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को प्रस्ताव भेजा।
17 अक्तूबर को मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक ने प्रस्तावित विकास प्राधिकरण का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया।
16 अप्रैल 2019 को तीन बिंदुओं पर आधारित सूचना शासन को भेजी गई।
वर्जन
देवरिया को विकास प्राधिकरण बनाने संबंधी प्रस्ताव को लेकर शासन स्तर से जो भी जानकारी मांगी जा रही है उसे उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन का जैसा निर्देश होगा हम आगे की कार्रवाई करेंगे।
- राकेश पटेल, एडीएम प्रशासन।