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सिरदर्द बने बेमेल जूते, किसी का माप नहीं तो कइयों का जोड़ा गायब
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सिरदर्द बने विद्यार्थियों के लिए आए बेमेल जूते
आपूर्तिकर्ता फर्म की मनमानी से नहीं मिल पाया जूता, नंगे पांव स्कूल जाना मजबूरी
कहीं माप में कमी तो कहीं मेल ही नहीं, लड़कियों की पेटी में भरे हैं लड़कों के जूते
जिले के 16 ब्लाकों में 20 हजार जूते हुए बेकार, अब वापस करने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। परिषदीय स्कूलों के बच्चों में वितरण के लिए जूते अफसरों का सिरदर्द बन गए हैं। हजारों की संख्या में बेमेल जूते बीआरसी में धूल फांक रहे हैं। इनमें किसी का साइज बच्चों के अनुरूप नहीं है तो किसी का जोड़ा नहीं मिल रहा। बालिकाओं की पेटी में बालकों के जूते भरकर भेज दिए गए हैं। आपूर्तिकर्ता फर्म की मनमानी से अध्यापक जहां परेशान हैं, वहीं बच्चों को नंगे पांव स्कूल आने को मजबूर होना पड़ रहा है। अब विभाग इन्हें वापस करने की तैयारी में है।
परिषदीय स्कूलों में पठन-पाठन का बेहतर माहौल बनाने के साथ ही सरकार बच्चों की हर जरूरत का पूरा ध्यान रख रही है। इसी के तहत जूता-मोजा वितरण की योजना लागू है। प्रत्येक बच्चे को एक जोड़ी जूता और दो जोड़ी मोजा देने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए जिले से फरवरी में ही बच्चों की कक्षा-1 से तीन, चार से छह और सात से आठ की तीन श्रेणियों में बच्चों की संख्या निदेशालय को भेजी गई थी। कुल 2.32 लाख बच्चों को ब्लॉकवार जूता-मोजा के आवंटन की जिम्मेदारी दिल्ली, हरियाणा की फर्मों को सौंपा गया। ब्लॉकों पर जब जूते की खेप प्राप्त हुई तो स्थिति देख शिक्षक चकरा गए। छात्राओं के जूते की पेटी में छात्रों के जूते रख दिए गए हैं, जबकि छात्रों के साथ छात्राओं के। कई जूतों की साइज बच्चों के पैरों की माप के अनुसार नहीं हैं। तमाम जूते ऐसे भी हैं, जिसका जोड़ा ही गायब है। सबसे ज्यादा दिक्कत तीन, चार और पांच नंबर के जूतों में है। साइज नहीं मिलने से यह जूते स्कूलों से लौटा दिए गए हैं और बीआरसी में धूल फांक रहे हैं। अफसरों के लिए भी यह बेमेल जूते सिरदर्द बन गए हैं। इसे लौटाने के लिए विभागीय स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है। आपूर्तिकर्ता फर्म की मनमानी का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। वह नंगे पांव या फटे-पुराने जूते पहनकर स्कूल आने-जाने को विवश हैं।
20 हजार से अधिक जूते बेमेल
स्कूलों में वितरण के लिए जिले के 16 ब्लॉकों में आए करीब 20 हजार जूते बेमेल हैं। बैतालपुर में 1200, रुद्रपुर में 1300, सदर में 1350 जूते बेकार पड़ हैं। देसही, पथरदेवा, तरकुलवा, रामपुर कारखाना ब्लॉकों में भी कमोवेश ऐसे ही हाल हैं। भाटपाररानी, बनकटा, भागलपुर, लार जैसे सुदूर के ब्लॉकों में भी बड़ी संख्या में बच्चों को जूता नहीं मिल पाया है।
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आपूर्तिकर्ता फर्मों को पूर्व में ही अलग-अलग साइज के अनुसार डिमांड भेजी गई थी, बावजूद बड़ी संख्या में बेमेल जूते आ गए हैं। इसे वापस करने के लिए संबंधित फर्मों को पत्र लिखा गया है। कोशिश है कि वंचित बच्चों को शीघ्र की माप के अनुसार जूते मिल जाएं।
-ओमप्रकाश यादव, बीएसए
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आपूर्तिकर्ता फर्म की मनमानी से नहीं मिल पाया जूता, नंगे पांव स्कूल जाना मजबूरी
कहीं माप में कमी तो कहीं मेल ही नहीं, लड़कियों की पेटी में भरे हैं लड़कों के जूते
जिले के 16 ब्लाकों में 20 हजार जूते हुए बेकार, अब वापस करने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। परिषदीय स्कूलों के बच्चों में वितरण के लिए जूते अफसरों का सिरदर्द बन गए हैं। हजारों की संख्या में बेमेल जूते बीआरसी में धूल फांक रहे हैं। इनमें किसी का साइज बच्चों के अनुरूप नहीं है तो किसी का जोड़ा नहीं मिल रहा। बालिकाओं की पेटी में बालकों के जूते भरकर भेज दिए गए हैं। आपूर्तिकर्ता फर्म की मनमानी से अध्यापक जहां परेशान हैं, वहीं बच्चों को नंगे पांव स्कूल आने को मजबूर होना पड़ रहा है। अब विभाग इन्हें वापस करने की तैयारी में है।
परिषदीय स्कूलों में पठन-पाठन का बेहतर माहौल बनाने के साथ ही सरकार बच्चों की हर जरूरत का पूरा ध्यान रख रही है। इसी के तहत जूता-मोजा वितरण की योजना लागू है। प्रत्येक बच्चे को एक जोड़ी जूता और दो जोड़ी मोजा देने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए जिले से फरवरी में ही बच्चों की कक्षा-1 से तीन, चार से छह और सात से आठ की तीन श्रेणियों में बच्चों की संख्या निदेशालय को भेजी गई थी। कुल 2.32 लाख बच्चों को ब्लॉकवार जूता-मोजा के आवंटन की जिम्मेदारी दिल्ली, हरियाणा की फर्मों को सौंपा गया। ब्लॉकों पर जब जूते की खेप प्राप्त हुई तो स्थिति देख शिक्षक चकरा गए। छात्राओं के जूते की पेटी में छात्रों के जूते रख दिए गए हैं, जबकि छात्रों के साथ छात्राओं के। कई जूतों की साइज बच्चों के पैरों की माप के अनुसार नहीं हैं। तमाम जूते ऐसे भी हैं, जिसका जोड़ा ही गायब है। सबसे ज्यादा दिक्कत तीन, चार और पांच नंबर के जूतों में है। साइज नहीं मिलने से यह जूते स्कूलों से लौटा दिए गए हैं और बीआरसी में धूल फांक रहे हैं। अफसरों के लिए भी यह बेमेल जूते सिरदर्द बन गए हैं। इसे लौटाने के लिए विभागीय स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है। आपूर्तिकर्ता फर्म की मनमानी का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। वह नंगे पांव या फटे-पुराने जूते पहनकर स्कूल आने-जाने को विवश हैं।
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20 हजार से अधिक जूते बेमेल
स्कूलों में वितरण के लिए जिले के 16 ब्लॉकों में आए करीब 20 हजार जूते बेमेल हैं। बैतालपुर में 1200, रुद्रपुर में 1300, सदर में 1350 जूते बेकार पड़ हैं। देसही, पथरदेवा, तरकुलवा, रामपुर कारखाना ब्लॉकों में भी कमोवेश ऐसे ही हाल हैं। भाटपाररानी, बनकटा, भागलपुर, लार जैसे सुदूर के ब्लॉकों में भी बड़ी संख्या में बच्चों को जूता नहीं मिल पाया है।
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आपूर्तिकर्ता फर्मों को पूर्व में ही अलग-अलग साइज के अनुसार डिमांड भेजी गई थी, बावजूद बड़ी संख्या में बेमेल जूते आ गए हैं। इसे वापस करने के लिए संबंधित फर्मों को पत्र लिखा गया है। कोशिश है कि वंचित बच्चों को शीघ्र की माप के अनुसार जूते मिल जाएं।
-ओमप्रकाश यादव, बीएसए