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जालसाज प्रमाण पत्रों का करते थे सत्यापन
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जालसाज प्रमाण पत्रों का करते थे सत्यापन
बरामद बैग और लैपटॉप में फर्जी डिग्रियों का मिला जखीरा
देवरिया, बलिया, सिद्धार्थनगर में तैनात हैं फर्जी शिक्षक
लैपटॉप में कई यूनिवर्सिटी का मिला साफ्टवेयर, फर्जी शिक्षक भूमिगत
बीएसए कार्यालय के दो बाबुओं का भी सामने आया नाम
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। एसटीएफ के हत्थे चढ़े फर्जी शिक्षकों ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इनकी इतनी तगड़ी नेटवर्किंग थी कि जाली प्रमाण पत्रों का सत्यापन खुद करते थे। बीएसए कार्यालय के बाबुओं का भी इसमें सहयोग रहता था। इन जानकारियों के आधार पर एसटीएफ अन्य शिक्षकों व बाबुओं पर शिकंजा कसने में जुटी है।
दानोपुर गांव के पास से पकड़े गए अश्वनी श्रीवास्तव के पास से तलाशी में मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़ का मुहर भी मिला। इस बारे में उसने बताया कि इस यूनिवर्सिटी का विज्ञापन कुछ वर्षों पूर्व अखबारों में निकला था। फोन पर बात करने के बाद अंकपत्र घर आ गया। विश्वास बना तो फिर जयपुर के रहने वाले विजय कुमार से बात कर वह बीएड की डिग्री व अन्य दस्तावेज मंगाता था। विजय कोलाक्र्स टीचर्स यूनिवर्सिटी, नार्थ ईस्ट यूनिवर्सिटी अरुणाचल प्रदेश, मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़, एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा, जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी की डिग्री उपलब्ध कराया था। कोरियर से डिग्री घर आती थी या फिर से ईमेल के जरिए मंगाकर प्रिंट कर लिया जाता था। देवरिया के आठ शिक्षकों के सत्यापन के लिए मोनाड यूनिवर्सिटी की मुहर अपने पास रखा था। इसके लिए उसने वेरीफिकेशन डिस्पैच बाबू जयशंकर श्रीवास्तव और प्रीतम सिंह से सेटिंग की थी। सिद्धार्थनगर में दिवाकर बाबू से सेटिंग कर उसने अपने अलावा तीन अन्य शिक्षकों का वेरीफिकेशन कराते थे। मूल प्रमाण पत्र के नाम-पते में संशोधन कर जाली प्रमाण पत्र तैयार करते थे। इनके बनाए गए जाली प्रमाण पत्रों पर सिद्धार्थनगर, बलिया और देवरिया में आज भी शिक्षक कार्यरत हैं। एसटीएम की रडार पर बीएसए कार्यालय के बाबू के अलावा फर्जी शिक्षक हैं। फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ होने के बाद जालसाज शिक्षक भूमिगत हो गए हैं।
जिले में भी कई शिक्षकों को दिलाई नौकरी
दोनों जालसाजों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जिले में भी कई शिक्षकों के तैनाती की जानकारी दी। इनमें दो शिक्षक भाटपाररानी ब्लॉक में तैनात थे, जबकि एक बरहज और एक गौरीबाजार ब्लाक में नियुक्त हुआ। इसके अलावा सिद्धार्थनगर जिले में तैनात चार अन्य शिक्षकों का भी नाम बताया जिनके बीएड व शिक्षक पात्रता परीक्षा के प्रमाण पत्र इन्होंने तैयार किया था।
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कम दिनों में फर्श से अर्श पर पहुंच गया मुक्ति
मुक्तिनाथ मझौलीराज का मूल निवासी है। दानोपुर में मकान बनवाकर रहता था। मझौलीराज में गणपति प्रसाद इंटर कॉलेज का प्रबंधक भी है। आर्थिक रूप से मुक्ति कमजोर था, लेकिन जालसाजी के कारण बहुत कम दिनों में फर्श से अर्श पर पहुंचा था।
पहले करता था ठेकेदारी
अश्वनी श्रीवास्तव पहले बिजली निगम में ठेकेदारी करता था। फर्जी नौकरी दिलाने वाला सरगना राकेश सिंह से उसका संपर्क हुआ। 2011 में टेट का परीक्षा दिया लेकिन अंक कम था। अश्वनी ने बताया कि सलेमपुर में एक गोरखपुर का नितिन श्रीवास्तव रहता था, उसने ही टेट का नंबर बढ़ाकर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किया था।
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बरामद बैग और लैपटॉप में फर्जी डिग्रियों का मिला जखीरा
देवरिया, बलिया, सिद्धार्थनगर में तैनात हैं फर्जी शिक्षक
लैपटॉप में कई यूनिवर्सिटी का मिला साफ्टवेयर, फर्जी शिक्षक भूमिगत
बीएसए कार्यालय के दो बाबुओं का भी सामने आया नाम
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। एसटीएफ के हत्थे चढ़े फर्जी शिक्षकों ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इनकी इतनी तगड़ी नेटवर्किंग थी कि जाली प्रमाण पत्रों का सत्यापन खुद करते थे। बीएसए कार्यालय के बाबुओं का भी इसमें सहयोग रहता था। इन जानकारियों के आधार पर एसटीएफ अन्य शिक्षकों व बाबुओं पर शिकंजा कसने में जुटी है।
दानोपुर गांव के पास से पकड़े गए अश्वनी श्रीवास्तव के पास से तलाशी में मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़ का मुहर भी मिला। इस बारे में उसने बताया कि इस यूनिवर्सिटी का विज्ञापन कुछ वर्षों पूर्व अखबारों में निकला था। फोन पर बात करने के बाद अंकपत्र घर आ गया। विश्वास बना तो फिर जयपुर के रहने वाले विजय कुमार से बात कर वह बीएड की डिग्री व अन्य दस्तावेज मंगाता था। विजय कोलाक्र्स टीचर्स यूनिवर्सिटी, नार्थ ईस्ट यूनिवर्सिटी अरुणाचल प्रदेश, मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़, एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा, जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी की डिग्री उपलब्ध कराया था। कोरियर से डिग्री घर आती थी या फिर से ईमेल के जरिए मंगाकर प्रिंट कर लिया जाता था। देवरिया के आठ शिक्षकों के सत्यापन के लिए मोनाड यूनिवर्सिटी की मुहर अपने पास रखा था। इसके लिए उसने वेरीफिकेशन डिस्पैच बाबू जयशंकर श्रीवास्तव और प्रीतम सिंह से सेटिंग की थी। सिद्धार्थनगर में दिवाकर बाबू से सेटिंग कर उसने अपने अलावा तीन अन्य शिक्षकों का वेरीफिकेशन कराते थे। मूल प्रमाण पत्र के नाम-पते में संशोधन कर जाली प्रमाण पत्र तैयार करते थे। इनके बनाए गए जाली प्रमाण पत्रों पर सिद्धार्थनगर, बलिया और देवरिया में आज भी शिक्षक कार्यरत हैं। एसटीएम की रडार पर बीएसए कार्यालय के बाबू के अलावा फर्जी शिक्षक हैं। फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ होने के बाद जालसाज शिक्षक भूमिगत हो गए हैं।
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जिले में भी कई शिक्षकों को दिलाई नौकरी
दोनों जालसाजों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जिले में भी कई शिक्षकों के तैनाती की जानकारी दी। इनमें दो शिक्षक भाटपाररानी ब्लॉक में तैनात थे, जबकि एक बरहज और एक गौरीबाजार ब्लाक में नियुक्त हुआ। इसके अलावा सिद्धार्थनगर जिले में तैनात चार अन्य शिक्षकों का भी नाम बताया जिनके बीएड व शिक्षक पात्रता परीक्षा के प्रमाण पत्र इन्होंने तैयार किया था।
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कम दिनों में फर्श से अर्श पर पहुंच गया मुक्ति
मुक्तिनाथ मझौलीराज का मूल निवासी है। दानोपुर में मकान बनवाकर रहता था। मझौलीराज में गणपति प्रसाद इंटर कॉलेज का प्रबंधक भी है। आर्थिक रूप से मुक्ति कमजोर था, लेकिन जालसाजी के कारण बहुत कम दिनों में फर्श से अर्श पर पहुंचा था।
पहले करता था ठेकेदारी
अश्वनी श्रीवास्तव पहले बिजली निगम में ठेकेदारी करता था। फर्जी नौकरी दिलाने वाला सरगना राकेश सिंह से उसका संपर्क हुआ। 2011 में टेट का परीक्षा दिया लेकिन अंक कम था। अश्वनी ने बताया कि सलेमपुर में एक गोरखपुर का नितिन श्रीवास्तव रहता था, उसने ही टेट का नंबर बढ़ाकर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किया था।