{"_id":"5ea31d4b8ebc3e907149b0e9","slug":"death-deoria-news-gkp3491139162","type":"story","status":"publish","title_hn":"इलाज के लिए भटकते रहे घर वाले, ढाई माह के बच्चे की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इलाज के लिए भटकते रहे घर वाले, ढाई माह के बच्चे की मौत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाज के लिए भटकते रहे घर वाले, ढाई माह के बच्चे की मौत
- पिता लॉकडाउन में फंसे हैं दिल्ली में
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। कपरवार गांव में ढाई माह के बच्चे की मौत के बाद घर में कोहराम मच गया। परिजनों का आरोप है कि वे इलाज के लिए भटकते रहे, लेकिन चिकित्सक ने सुध नहीं ली। समय से इलाज हो गया होता, तो शायद बच्चे की जान बच जाती। वहीं नवजात के पिता लॉकडाउन में दिल्ली में फंसे हैं।
कपरवार गांव निवासी उमाशंकर विश्वकर्मा का पुत्र ओंकार दिल्ली में है। ओंकार की पत्नी सुधा चार वर्ष की अनन्या और ढाई माह के पुत्र को लेकर गांव पर है। परिजनों के अनुसार बृहस्पतिवार शाम मासूम अचानक जोर-जोर से रोने लगा। काफी प्रयासों के बाद भी चुप नहीं हुआ तो 108 नंबर पर फोन कर सूचना दी गई। एंबुलेंस के आने में देरी देख घरवाले उसे महेन पीएचसी और फिर डेरवां ले गए। एंबुलेंस आने पर दोबारा महेन ले गए। यहां चिकित्सकों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जहां रास्ते में बच्चे की मौत हो गई। मासूम की मौत से मां सुधा और उसके बाबा उमाशंकर का रो-रो कर बुरा हाल था। बच्चे की मौत को लेकर सभी चिकित्सकों को कोस रहे थे।
विज्ञापन
- पिता लॉकडाउन में फंसे हैं दिल्ली में
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। कपरवार गांव में ढाई माह के बच्चे की मौत के बाद घर में कोहराम मच गया। परिजनों का आरोप है कि वे इलाज के लिए भटकते रहे, लेकिन चिकित्सक ने सुध नहीं ली। समय से इलाज हो गया होता, तो शायद बच्चे की जान बच जाती। वहीं नवजात के पिता लॉकडाउन में दिल्ली में फंसे हैं।
कपरवार गांव निवासी उमाशंकर विश्वकर्मा का पुत्र ओंकार दिल्ली में है। ओंकार की पत्नी सुधा चार वर्ष की अनन्या और ढाई माह के पुत्र को लेकर गांव पर है। परिजनों के अनुसार बृहस्पतिवार शाम मासूम अचानक जोर-जोर से रोने लगा। काफी प्रयासों के बाद भी चुप नहीं हुआ तो 108 नंबर पर फोन कर सूचना दी गई। एंबुलेंस के आने में देरी देख घरवाले उसे महेन पीएचसी और फिर डेरवां ले गए। एंबुलेंस आने पर दोबारा महेन ले गए। यहां चिकित्सकों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जहां रास्ते में बच्चे की मौत हो गई। मासूम की मौत से मां सुधा और उसके बाबा उमाशंकर का रो-रो कर बुरा हाल था। बच्चे की मौत को लेकर सभी चिकित्सकों को कोस रहे थे।
विज्ञापन