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बैंक से रुपये नहीं मिलने पर बीमार युवती की मौत
देवरिया
Updated Wed, 23 Nov 2016 10:35 PM IST
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पिंकी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
सलेमपुर। नोटबंदी की वजह से एक युवती जिंदगी की जंग हार गई। वॉल्व के आपरेशन के लिए बैंक और डाकघर में रुपये जमा होने के बावजूद रकम का इंतजाम नहीं हो सका।
दस दिन से बेबस पिता रकम की मांग कर रहा था। मझौलीराज नगर के टेढ़ी मोहल्ला वार्ड निवासी रामकेवल चौरसिया की 19 वर्षीय बेटी पिंकी का हॉर्ट के वॉल्ब में खराबी आ गई थी। मेडिकल कॉलेज से डॉक्टर ने उसे एक माह पूर्व एसपीजीआई रेफर कर दिया था।
एसपीजीआई में कुछ दिन इलाज चलने के बाद डॉक्टर ने 17 नवंबर को वॉल्ब का ऑपरेशन के लिए समय तय किया। इसमें करीब तीन लाख रुपये का खर्च बताया, लेकिन नोटबंदी के कारण बेटी के ऑपरेशन के लिए बेबस पिता रकम नहीं जुटा पाया। रामकेवल के अनुसार, मझौलीराज नगर के पूर्वांचल बैंक में करीब एक लाख और उप डाकघर में करीब चार लाख रुपये जमा हैं।
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उसने बेटी का ऑपरेशन कराने का हवाला देते हुए कई बार डाक विभाग के अफसर और बैंक के सहायक शाखा प्रबंधक से मिलकर रकम की मांग की। बावजूद इसके जरूरत पर रुपये नहीं मिल सका। 21 नवंबर को सुबह करीब 10 बजे पिंकी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। घरवाले उसे लेकर सलेमपुर सीएचसी पर गए। हालत नाजुक देख डॉक्टर ने देवरिया ले जाने का सलाह दी।
उसी दिन शाम को जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत के सदमे से गुजर रहे परिवार को अब छह दिसंबर को होने वाले ब्रह्मभोज की चिंता सता रही है। बेटी को खोने से नाराज पीड़ित रामकेवल ने बैंक के शाखा प्रबंधक और उप डाकपाल पर केस दर्ज कराने की बात कही है।
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दस दिन से बेबस पिता रकम की मांग कर रहा था। मझौलीराज नगर के टेढ़ी मोहल्ला वार्ड निवासी रामकेवल चौरसिया की 19 वर्षीय बेटी पिंकी का हॉर्ट के वॉल्ब में खराबी आ गई थी। मेडिकल कॉलेज से डॉक्टर ने उसे एक माह पूर्व एसपीजीआई रेफर कर दिया था।
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एसपीजीआई में कुछ दिन इलाज चलने के बाद डॉक्टर ने 17 नवंबर को वॉल्ब का ऑपरेशन के लिए समय तय किया। इसमें करीब तीन लाख रुपये का खर्च बताया, लेकिन नोटबंदी के कारण बेटी के ऑपरेशन के लिए बेबस पिता रकम नहीं जुटा पाया। रामकेवल के अनुसार, मझौलीराज नगर के पूर्वांचल बैंक में करीब एक लाख और उप डाकघर में करीब चार लाख रुपये जमा हैं।
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उसने बेटी का ऑपरेशन कराने का हवाला देते हुए कई बार डाक विभाग के अफसर और बैंक के सहायक शाखा प्रबंधक से मिलकर रकम की मांग की। बावजूद इसके जरूरत पर रुपये नहीं मिल सका। 21 नवंबर को सुबह करीब 10 बजे पिंकी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। घरवाले उसे लेकर सलेमपुर सीएचसी पर गए। हालत नाजुक देख डॉक्टर ने देवरिया ले जाने का सलाह दी।
उसी दिन शाम को जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत के सदमे से गुजर रहे परिवार को अब छह दिसंबर को होने वाले ब्रह्मभोज की चिंता सता रही है। बेटी को खोने से नाराज पीड़ित रामकेवल ने बैंक के शाखा प्रबंधक और उप डाकपाल पर केस दर्ज कराने की बात कही है।