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पॉलिथीन के आगे नगर प्रशासन नतमस्तक
Sun, 09 Jun 2019 11:44 PM IST
राकेश पांडेय
deoria
deoria
Published by: राकेश पांडेय
Updated Sun, 09 Jun 2019 11:44 PM IST
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हनुमान मंदिर पर लगे एक फल के ठेले पर रखी पॉलिथीन।
- फोटो : amar ujala
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देवरिया। सरकार ने पॉलिथीन के दुष्प्रभाव से निपटने के लिए कानून तो बना दिया लेकिन अमल के अभाव में इसके इस्तेमाल पर कोई असर नहीं दिख रहा। झोले की आदत छोड़ चुके लोग आज भी पॉलिथीन में सामान खरीदकर घर ले जा रहे हैं। बड़े दुकानों से लगायत ठेला-खोमचा तक खुलेआम पॉलिथीन में सामान बेचा जा रहा है। आम लोगों में न जागरूकता का असर है और न ही कानून का भय।
नगर विकास विभाग ने वर्ष 2000 में ‘उप्र प्लास्टिक और अन्य जीव अनाशित कूड़ा-कचरा अधिनियम’ लागू किया था। इसके तहत 20 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन के उपयोग प्रतिबंधित थे। इसका असर धरातल पर नहीं हो पाया। बीते वर्ष जुलाई में प्रदेश सरकार ने पॉलिथीन के इस्तेमाल पर सख्ती के लिए नया प्रस्ताव पारित किया। इसमें प्लास्टिक के कप, ग्लास और पॉलिथीन के सभी तरह के कैरीबैग बनाना बेचना व स्टोर करना प्रतिबंधित किया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना या छह माह तक की सजा होगी। इसके बावजूद न किसी को जेल जाने का डर है ना ही जुर्माना भरने की चिंता। भारी पैमाने पर प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री व पॉलिथीन का आदान-प्रदान बदस्तूर जारी है।
कूड़े से निकल रहा एक टन पॉलिथीन का कचरा
शहर से रोजाना करीब 80 टन कूड़ा निकलता है। इसमें पॉलिथीन का कचरा एक टन से अधिक होता है। यह स्थिति पॉलिथीन पर बैन को लेकर सख्त कानून बनने के बाद की है। जिले के आला अधिकारी शहर में रहकर इस समस्या पर आंख मूंदे बैठे हैं। अगर सभी नगर निकायों को जोड़ दें तो पांच से सात टन पॉलिथीन का कचरा हर रोज नगरों से निकल रहा है।
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पॉलिथीन से यह है नुकसान
पॉलिथीन के चलते नाले चोक हो जाते हैं। खेतों में बिखरने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति क्षीण होती है। प्लास्टिक के गिलास में चाय या गर्म दूध पीने से उसका केमिकल लोगों के पेट में चला जाता है। इससे डायरिया के अलावा अन्य गम्भीर बीमारियां होती हैं।
वर्जन
इस संबंध में नगर पालिका के ईओ से बात करूंगा। समय निर्धारित कर अभियान छापेमारी अभियान चलाया जाएगा। जो दोषी मिलेंगे, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- दिनेश मिश्र, एसडीएम सदर।
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नगर विकास विभाग ने वर्ष 2000 में ‘उप्र प्लास्टिक और अन्य जीव अनाशित कूड़ा-कचरा अधिनियम’ लागू किया था। इसके तहत 20 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन के उपयोग प्रतिबंधित थे। इसका असर धरातल पर नहीं हो पाया। बीते वर्ष जुलाई में प्रदेश सरकार ने पॉलिथीन के इस्तेमाल पर सख्ती के लिए नया प्रस्ताव पारित किया। इसमें प्लास्टिक के कप, ग्लास और पॉलिथीन के सभी तरह के कैरीबैग बनाना बेचना व स्टोर करना प्रतिबंधित किया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना या छह माह तक की सजा होगी। इसके बावजूद न किसी को जेल जाने का डर है ना ही जुर्माना भरने की चिंता। भारी पैमाने पर प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री व पॉलिथीन का आदान-प्रदान बदस्तूर जारी है।
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कूड़े से निकल रहा एक टन पॉलिथीन का कचरा
शहर से रोजाना करीब 80 टन कूड़ा निकलता है। इसमें पॉलिथीन का कचरा एक टन से अधिक होता है। यह स्थिति पॉलिथीन पर बैन को लेकर सख्त कानून बनने के बाद की है। जिले के आला अधिकारी शहर में रहकर इस समस्या पर आंख मूंदे बैठे हैं। अगर सभी नगर निकायों को जोड़ दें तो पांच से सात टन पॉलिथीन का कचरा हर रोज नगरों से निकल रहा है।
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पॉलिथीन से यह है नुकसान
पॉलिथीन के चलते नाले चोक हो जाते हैं। खेतों में बिखरने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति क्षीण होती है। प्लास्टिक के गिलास में चाय या गर्म दूध पीने से उसका केमिकल लोगों के पेट में चला जाता है। इससे डायरिया के अलावा अन्य गम्भीर बीमारियां होती हैं।
वर्जन
इस संबंध में नगर पालिका के ईओ से बात करूंगा। समय निर्धारित कर अभियान छापेमारी अभियान चलाया जाएगा। जो दोषी मिलेंगे, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- दिनेश मिश्र, एसडीएम सदर।