{"_id":"587bb0bb4f1c1b5b03efe4b3","slug":"deoria-youth-died-in-patna-boat-sink-accident","type":"story","status":"publish","title_hn":"पटना नाव हादसे में देवरिया के युवक की मौत","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
पटना नाव हादसे में देवरिया के युवक की मौत
देवरिया/ब्यूरो
Updated Sun, 15 Jan 2017 10:56 PM IST
विज्ञापन
पटना में देवरिया के युवक भूलन की गंगा नदी में डूबने से माैत।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाटपाररानी। बिहार की राजधानी पटना में गंगा नदी में नाव डूबने की घटना में जान गंवाने वालों में जिले का एक प्रतियोगी छात्र भी शामिल है। वह दो सालों से पटना में रहकर सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा था। घटना के दिन वह अपने भतीजे के साथ मकर संक्रांति पर गंगा में सैर के लिए गया था। रविवार को शव गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। अंतिम संस्कार छोटी गंडक नदी के किनारे किया गया।
दनउर निवासी सीताराम प्रजापति रेलवे से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनका छोटा बेटा भूलन प्रजापति पटना में रहकर सिविल सर्विसेज प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। उसका भतीजा जितेंद्र भी साथ में रहकर तैयारी में जुटा था।
घटना के दिन दोनों गंगा नदी में सैर के लिए अलग-अलग नाव पर सवार थे। भतीजा जितेंद्र ने बताया कि उसके चाचा भूलन जिस नाव पर सवार थे। उस पर क्षमता से अधिक लोग सवार हो गए थे। जिससे नाव डूब गई। पोस्टमार्टम के बाद परिवारवाले शव को लेकर गांव चले आए। भूलन की मौत से गांव में हर कोई अवाक था। दनउर ही नहीं, अगल-बगल के गांवों के लोग भी सीताराम के दरवाजे पर उमड़ पडे़ थे। बडे़ भाई अनिल प्रजापति ने उसे मुखाग्नि दी। पूरा माहौल गमगीन हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
दनउर निवासी सीताराम प्रजापति रेलवे से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनका छोटा बेटा भूलन प्रजापति पटना में रहकर सिविल सर्विसेज प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। उसका भतीजा जितेंद्र भी साथ में रहकर तैयारी में जुटा था।
विज्ञापन
घटना के दिन दोनों गंगा नदी में सैर के लिए अलग-अलग नाव पर सवार थे। भतीजा जितेंद्र ने बताया कि उसके चाचा भूलन जिस नाव पर सवार थे। उस पर क्षमता से अधिक लोग सवार हो गए थे। जिससे नाव डूब गई। पोस्टमार्टम के बाद परिवारवाले शव को लेकर गांव चले आए। भूलन की मौत से गांव में हर कोई अवाक था। दनउर ही नहीं, अगल-बगल के गांवों के लोग भी सीताराम के दरवाजे पर उमड़ पडे़ थे। बडे़ भाई अनिल प्रजापति ने उसे मुखाग्नि दी। पूरा माहौल गमगीन हो गया।
विज्ञापन