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जांच रिपोर्ट लेकर लखनऊ गई टीम, शासन को सौंपा
Updated Tue, 07 Aug 2018 11:04 PM IST
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जांच रिपोर्ट लेकर लखनऊ गई टीम, शासन को सौंपा
डीएम-एसपी, डीपीओ सहित अन्य लोगों के अलग-अलग दर्ज किए बयान
देर रात तक जुटाए जाते रहे अभिलेख, सुबह आठ बजे गई टीम
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार के नेतृत्व में बालगृह कांड की जांच करने आई शासन की दो सदस्यीय टीम मंगलवार की सुबह लखनऊ लौट गई। टीम अपने साथ बालिकाओं के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, डीएम-एसपी के पत्र सहित अन्य तथ्यों को भी समेट कर ले गई हैं। टीम ने जांच रिपोर्ट के बारे में कुछ भी सार्वजनिक करने से इन्कार किया। जिले के अफसरों को भी हिदायत दी गई है कि कोई भी मुंह न खोले। इससे पहले टीम ने रातभर गहनता से छानबीन की। अफसरों को अलग-अलग बुलाकर बयान दर्ज किए।
बालगृह बालिका में लड़कियों के यौन शोषण व अनैतिक कार्य कराने के मामले का पर्दाफाश होने के बाद मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार और एडीजी अंजू गुप्ता के नेतृत्व में दो सदस्यों की टीम गठित की थी। सोमवार को हेलीकॉप्टर से आई टीम ने तत्काल जांच भी शुरू कर दी। कलेक्ट्रेट स्थित डीएम कक्ष में बैठक के बाद महिला अस्पताल पहुंचकर लड़कियों से भी मुलाकात की थी। मेडिकल कर रहे चिकित्सकीय पैनल से भी जानकारी हासिल की। देर रात कलेक्ट्रेट में डीएम सुजीत कुमार, एसपी रोहन पी कनय, जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार, जिला बाल संरक्षण इकाई के प्रभारी जेपी तिवारी, बाल कल्याण समिति सहित अन्य लोगों के अलग-अलग बयान दर्ज किया। सूत्रों के मुताबिक सभी के बयानों में भिन्नता मिली है। डीएम ने अपनी ओर से एसपी, संस्थाध्यक्ष व शासन को भेजे गए पत्रों को भी दिखाया। टीम सभी रिकॉर्ड एकत्रित करने के बाद सुबह करीब आठ बजे सड़क मार्ग से लखनऊ के लिए रवाना हो गई।
अफसरों ने जागकर बिताई रात
देवरिया। बालगृह कांड के बाद हर किसी की नींद उड़ी हुई है। संस्था से जुड़े लोग बेचैन हैं तो पुलिस-प्रशासन के अफसरों का भी चैन छीन गया है। सोमवार की रात अफसरों ने जागकर बिताई। रात एक बजे तक लड़कियों का मेडिकल होता रहा। इसके बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा में राजकीय बाल गृह में दाखिल कराया गया। उधर, जांच टीम के जिले में होने के कारण डीएम, एसपी सहित अन्य अफसर और उनके मातहत भी जरूरी दस्तावेज जुटाने में आधी रात के बाद तक लगे रहे।
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महिला थाना प्रभारी ने भी दर्ज किया बयान
देवरिया। देशभर की मीडिया में मामला छाने के बाद पुलिस की विवेचना भी तेज हो गई है। मंगलवार को महिला थाना प्रभारी जितेंद्र तिवारी ने राजकीय बाल गृह के बंद कमरे में जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार से पूछताछ करते हुए बयान दर्ज किया। घंटों तक पूछताछ चलती रही। बालगृह में कुछ बालिकाओं के भी बयान दर्ज किए गए हैं।
डरी-सहमी हैं लड़कियां, काउंसिलिंग जारी
देवरिया। स्टेशन रोड स्थित बालगृह बालिका से मुक्त कराई गई लड़कियां 48 घंटे बीतने के बाद भी डरी-सहमी हैं। लिहाजा वह पूछने पर कुछ भी सही नहीं बता पा रही हैं। बार-बार उनके बयान बदल रहे हैं। उनकी घबराहट दूर करने और सुरक्षा का अहसास कराने के लिए काउंसिलिंग का क्रम जारी है। बच्चों की काउंसिलिंग कर रही महिला ने बताया कि लड़कियों को अभी कुछ वक्त देने की जरूरत है। नया माहौल होने और आपाधापी के कारण सभी खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। बताया कि दो लड़कियों ने अभी बालगृह की कुछ लड़कियों के बाहर जाने की बात स्वीकारी हैं। अन्य ने मारपीट और झाड़ू-पोछा कराने की बात को स्वीकार किया है।
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डीएम-एसपी, डीपीओ सहित अन्य लोगों के अलग-अलग दर्ज किए बयान
देर रात तक जुटाए जाते रहे अभिलेख, सुबह आठ बजे गई टीम
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार के नेतृत्व में बालगृह कांड की जांच करने आई शासन की दो सदस्यीय टीम मंगलवार की सुबह लखनऊ लौट गई। टीम अपने साथ बालिकाओं के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, डीएम-एसपी के पत्र सहित अन्य तथ्यों को भी समेट कर ले गई हैं। टीम ने जांच रिपोर्ट के बारे में कुछ भी सार्वजनिक करने से इन्कार किया। जिले के अफसरों को भी हिदायत दी गई है कि कोई भी मुंह न खोले। इससे पहले टीम ने रातभर गहनता से छानबीन की। अफसरों को अलग-अलग बुलाकर बयान दर्ज किए।
बालगृह बालिका में लड़कियों के यौन शोषण व अनैतिक कार्य कराने के मामले का पर्दाफाश होने के बाद मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार और एडीजी अंजू गुप्ता के नेतृत्व में दो सदस्यों की टीम गठित की थी। सोमवार को हेलीकॉप्टर से आई टीम ने तत्काल जांच भी शुरू कर दी। कलेक्ट्रेट स्थित डीएम कक्ष में बैठक के बाद महिला अस्पताल पहुंचकर लड़कियों से भी मुलाकात की थी। मेडिकल कर रहे चिकित्सकीय पैनल से भी जानकारी हासिल की। देर रात कलेक्ट्रेट में डीएम सुजीत कुमार, एसपी रोहन पी कनय, जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार, जिला बाल संरक्षण इकाई के प्रभारी जेपी तिवारी, बाल कल्याण समिति सहित अन्य लोगों के अलग-अलग बयान दर्ज किया। सूत्रों के मुताबिक सभी के बयानों में भिन्नता मिली है। डीएम ने अपनी ओर से एसपी, संस्थाध्यक्ष व शासन को भेजे गए पत्रों को भी दिखाया। टीम सभी रिकॉर्ड एकत्रित करने के बाद सुबह करीब आठ बजे सड़क मार्ग से लखनऊ के लिए रवाना हो गई।
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अफसरों ने जागकर बिताई रात
देवरिया। बालगृह कांड के बाद हर किसी की नींद उड़ी हुई है। संस्था से जुड़े लोग बेचैन हैं तो पुलिस-प्रशासन के अफसरों का भी चैन छीन गया है। सोमवार की रात अफसरों ने जागकर बिताई। रात एक बजे तक लड़कियों का मेडिकल होता रहा। इसके बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा में राजकीय बाल गृह में दाखिल कराया गया। उधर, जांच टीम के जिले में होने के कारण डीएम, एसपी सहित अन्य अफसर और उनके मातहत भी जरूरी दस्तावेज जुटाने में आधी रात के बाद तक लगे रहे।
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महिला थाना प्रभारी ने भी दर्ज किया बयान
देवरिया। देशभर की मीडिया में मामला छाने के बाद पुलिस की विवेचना भी तेज हो गई है। मंगलवार को महिला थाना प्रभारी जितेंद्र तिवारी ने राजकीय बाल गृह के बंद कमरे में जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार से पूछताछ करते हुए बयान दर्ज किया। घंटों तक पूछताछ चलती रही। बालगृह में कुछ बालिकाओं के भी बयान दर्ज किए गए हैं।
डरी-सहमी हैं लड़कियां, काउंसिलिंग जारी
देवरिया। स्टेशन रोड स्थित बालगृह बालिका से मुक्त कराई गई लड़कियां 48 घंटे बीतने के बाद भी डरी-सहमी हैं। लिहाजा वह पूछने पर कुछ भी सही नहीं बता पा रही हैं। बार-बार उनके बयान बदल रहे हैं। उनकी घबराहट दूर करने और सुरक्षा का अहसास कराने के लिए काउंसिलिंग का क्रम जारी है। बच्चों की काउंसिलिंग कर रही महिला ने बताया कि लड़कियों को अभी कुछ वक्त देने की जरूरत है। नया माहौल होने और आपाधापी के कारण सभी खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। बताया कि दो लड़कियों ने अभी बालगृह की कुछ लड़कियों के बाहर जाने की बात स्वीकारी हैं। अन्य ने मारपीट और झाड़ू-पोछा कराने की बात को स्वीकार किया है।