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पूर्व जेल अधीक्षक समेत पांच पर मुकदमा
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अखिलेश सरकार ने कराई थी भर्तियां
देवरिया। लखनऊ के रियल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल का अपहरण कर देवरिया जेल में पिटाई के मामले में पूर्व जेल अधीक्षक समेत पांच पर आपराधिक षड्यंत्र समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। सदर कोतवाली पुलिस ने यह कार्रवाई जेल अधीक्षक की तहरीर पर की है। सभी आरोपी पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं।
26 दिसंबर को लखनऊ के रियल एस्टेट कारोबारी का अपहरण कराकर माफिया अतीक अहमद ने जिला जेल में पिटाई की थी। माफिया के चंगुल से छूटकर लखनऊ पहुंचे कारोबारी ने केस दर्ज कराया था। मामला तूल पकड़ा तो अतीक अहमद को बरेली जेल भेज दिया गया। इस मामले में शासन ने डिप्टी जेलर देवनाथ यादव, हेड वार्डेन मुन्ना पांडेय, वार्डेन राकेश शर्मा को निलंबित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक सप्ताह पूर्व मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। इसके बाद जेलर मुकेश कटियार और फिर जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय को निलंबित कर दिया गया। कैलाश पति त्रिपाठी को देवरिया का जेल अधीक्षक बनाया गया। रविवार की रात उन्होंने मामले में पूर्व के जेल अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानते हुए कोतवाली पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने पूर्व जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय, जेलर मुकेश कटियार, डिप्टी जेलर देवनाथ यादव, हेड वार्डेन मुन्ना पांडेय और वार्डेन राकेश शर्मा के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र समेत कई धाराओं में केस दर्ज कर लिया। सदर कोतवाल यादवेंद्र बहादुर पाल ने बताया कि केस दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद तेज हुई कार्रवाई
जिला जेल में मची अंधेरगर्दी पर कार्रवाई ऐसे ही नहीं हो रही। मामले में खुद सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा। कारोबारी मोहित जायसवाल को अपहरण कर जेल के अंदर लाना और बेरहमी से पिटाई कर करोड़ों की संपत्ति बैनामा करा लेने के मामले को प्रशासनिक स्तर पर तो पहले ही दबा दिया गया था। अधिकारी शुरुआती कार्रवाइयों के बाद अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए मौन साध गए थे। अतीक की जेल बदलने के बाद मान लिया गया था कि अन्य मामलों की तरह इसमें भी केस चलेगा और सुनवाई वर्षों तक होती रहेगी। जेल अफसर भी खुद को सुरक्षित मानकर कॉलर चौड़ा कर इत्मीनान से बैठे थे, मगर सुप्रीम कोर्ट ने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए चाबुक चलाया तो फिर चार माह पुराना जिन्न आरोपियों और लापरवाही बरतने वालों के पीछे पड़ गया है। सीबीआई जांच के आदेश के बाद आनन-फानन में पहले जेल के अफसर-कर्मचारी निलंबित हुए और अब उन पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है। माना जा रहा है कि मामले में जल्द ही कुछ और कार्रवाई हो सकती है। कोर्ट के आदेश पर जांच के लिए सीबीआई टीम के भी शीघ्र पहुंचने का अंदेशा जताया जा रहा है।
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26 दिसंबर को लखनऊ के रियल एस्टेट कारोबारी का अपहरण कराकर माफिया अतीक अहमद ने जिला जेल में पिटाई की थी। माफिया के चंगुल से छूटकर लखनऊ पहुंचे कारोबारी ने केस दर्ज कराया था। मामला तूल पकड़ा तो अतीक अहमद को बरेली जेल भेज दिया गया। इस मामले में शासन ने डिप्टी जेलर देवनाथ यादव, हेड वार्डेन मुन्ना पांडेय, वार्डेन राकेश शर्मा को निलंबित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक सप्ताह पूर्व मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। इसके बाद जेलर मुकेश कटियार और फिर जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय को निलंबित कर दिया गया। कैलाश पति त्रिपाठी को देवरिया का जेल अधीक्षक बनाया गया। रविवार की रात उन्होंने मामले में पूर्व के जेल अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानते हुए कोतवाली पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने पूर्व जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय, जेलर मुकेश कटियार, डिप्टी जेलर देवनाथ यादव, हेड वार्डेन मुन्ना पांडेय और वार्डेन राकेश शर्मा के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र समेत कई धाराओं में केस दर्ज कर लिया। सदर कोतवाल यादवेंद्र बहादुर पाल ने बताया कि केस दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
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सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद तेज हुई कार्रवाई
जिला जेल में मची अंधेरगर्दी पर कार्रवाई ऐसे ही नहीं हो रही। मामले में खुद सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा। कारोबारी मोहित जायसवाल को अपहरण कर जेल के अंदर लाना और बेरहमी से पिटाई कर करोड़ों की संपत्ति बैनामा करा लेने के मामले को प्रशासनिक स्तर पर तो पहले ही दबा दिया गया था। अधिकारी शुरुआती कार्रवाइयों के बाद अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए मौन साध गए थे। अतीक की जेल बदलने के बाद मान लिया गया था कि अन्य मामलों की तरह इसमें भी केस चलेगा और सुनवाई वर्षों तक होती रहेगी। जेल अफसर भी खुद को सुरक्षित मानकर कॉलर चौड़ा कर इत्मीनान से बैठे थे, मगर सुप्रीम कोर्ट ने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए चाबुक चलाया तो फिर चार माह पुराना जिन्न आरोपियों और लापरवाही बरतने वालों के पीछे पड़ गया है। सीबीआई जांच के आदेश के बाद आनन-फानन में पहले जेल के अफसर-कर्मचारी निलंबित हुए और अब उन पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है। माना जा रहा है कि मामले में जल्द ही कुछ और कार्रवाई हो सकती है। कोर्ट के आदेश पर जांच के लिए सीबीआई टीम के भी शीघ्र पहुंचने का अंदेशा जताया जा रहा है।
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