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सीएम के लिए लिफ्ट फिट रखना जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो/देवरिया
Updated Wed, 27 Jan 2016 10:49 PM IST
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मुख्यमंत्री के जिलों में दौरे के समय अगर कहीं लिफ्ट का इस्तेमाल होगा तो पहले उसका तकनीकी परीक्षण किया जाएगा।
प्रशिक्षित स्टाफ से उसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही भवन के हर तल पर लिफ्ट के अचानक रुकने पर इस्तेमाल होने वाली आपातकालीन प्रणाली का बंदोबस्त रखना होगा।
लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव के विधानसभा की लिफ्ट में फंसे रहने की घटना को सबक बनाते हुए शासन ने सभी जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को इस बाबत सचेत किया है।
सुरक्षा मुख्यालय लखनऊ के डीजीपी (सुरक्षा) गोपाल गुप्ता की तरफ से देवरिया सहित सूबे के सभी जनपद और मंडल स्तरीय पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है।
पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के इस्तेमाल से पहले तकनीकी जांच से यह सुनिश्चित कराना होगा कि लिफ्ट चलने योग्य है। सक्षम अधिकारी की देखरेख में जांचकर्ता से लिफ्ट फिट होने का प्रमाणपत्र भी लेना होगा।
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यही नहीं मुख्यमंत्री के प्रयोग से पहले संबंधित अभियंता और तकनीकी विशेषज्ञ वहां मौजूद रहेंगे।
लिफ्ट के प्रत्येक तल पर ऐसी व्यवस्था करनी होगी, ताकि अचानक रुकने पर आपातकालीन प्रणाली का इस्तेमाल किया जा सके।
आपातकालीन व्यवस्था के तहत आपरेटर चाभी सहित अन्य उपकरणों के साथ लिफ्ट के पास मौजूद रहेंगे।
इसके अलावा लिफ्ट संचालन के वक्त बिजली आपूर्ति, पॉवर बैकअप की मुकम्मल व्यवस्था रखनी होगी।
लिफ्ट के भीतर और बाहर उसकी वजन क्षमता लिखनी जरूरी है। साथ ही लिफ्ट के भीतर खतरे का अलार्म, संचार की व्यवस्था जरूरी है।
अचानक खराब होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था की योजना भी पहले से तय रखनी होगी।
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प्रशिक्षित स्टाफ से उसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही भवन के हर तल पर लिफ्ट के अचानक रुकने पर इस्तेमाल होने वाली आपातकालीन प्रणाली का बंदोबस्त रखना होगा।
लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव के विधानसभा की लिफ्ट में फंसे रहने की घटना को सबक बनाते हुए शासन ने सभी जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को इस बाबत सचेत किया है।
सुरक्षा मुख्यालय लखनऊ के डीजीपी (सुरक्षा) गोपाल गुप्ता की तरफ से देवरिया सहित सूबे के सभी जनपद और मंडल स्तरीय पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है।
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पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के इस्तेमाल से पहले तकनीकी जांच से यह सुनिश्चित कराना होगा कि लिफ्ट चलने योग्य है। सक्षम अधिकारी की देखरेख में जांचकर्ता से लिफ्ट फिट होने का प्रमाणपत्र भी लेना होगा।
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यही नहीं मुख्यमंत्री के प्रयोग से पहले संबंधित अभियंता और तकनीकी विशेषज्ञ वहां मौजूद रहेंगे।
लिफ्ट के प्रत्येक तल पर ऐसी व्यवस्था करनी होगी, ताकि अचानक रुकने पर आपातकालीन प्रणाली का इस्तेमाल किया जा सके।
आपातकालीन व्यवस्था के तहत आपरेटर चाभी सहित अन्य उपकरणों के साथ लिफ्ट के पास मौजूद रहेंगे।
इसके अलावा लिफ्ट संचालन के वक्त बिजली आपूर्ति, पॉवर बैकअप की मुकम्मल व्यवस्था रखनी होगी।
लिफ्ट के भीतर और बाहर उसकी वजन क्षमता लिखनी जरूरी है। साथ ही लिफ्ट के भीतर खतरे का अलार्म, संचार की व्यवस्था जरूरी है।
अचानक खराब होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था की योजना भी पहले से तय रखनी होगी।