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Deoria News: सार्वजनिक स्थानों पर लिखा पुलिसकर्मियों का नंबर, पीड़ितों को दे रहा दगा
Mon, 15 May 2023 02:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।
Updated Mon, 15 May 2023 02:42 PM IST
सार
पीड़ित फोन कर रहे हैं तो वह पुलिसकर्मी किसी और थाने पर जा चुके हैं। कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और विशेष तौर पर छात्राओं से छेड़खानी जैसे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए शासन स्तर से पुलिस विभाग में बीट पुलिस प्रणाली को सक्रिय किया गया।
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महुआडीह के रामपुर दुबे गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय पर लिखा पुलिसकर्मियों का नंबर।संवाद
विस्तार
देवरिया जिले में अपराधों पर रोकथाम और पीड़ित पक्ष को त्वरित पुलिस सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शासन स्तर से बीट पुलिस प्रणाली को लागू किया गया। इसके तहत परिषदीय विद्यालयों, कालेजों या सार्वजनिक स्थानों पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ संबंधित क्षेत्र के एसओ, हलका दरोगा और बीट के सिपाहियों का नाम व मोबाइल नंबर दीवारों पर लिखा गया था।
एसओ का सीयूजी नंबर छोड़कर बाकी पुलिसकर्मियों के स्थानांतरण के बाद इन अंकित नंबरों का नवीनीकरण नहीं कराया जा रहा। पीड़ित फोन कर रहे हैं तो वह पुलिसकर्मी किसी और थाने पर जा चुके हैं। कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और विशेष तौर पर छात्राओं से छेड़खानी जैसे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए शासन स्तर से पुलिस विभाग में बीट पुलिस प्रणाली को सक्रिय किया गया।
उसके तहत सारे परिषदीय विद्यालयों, इंटर कालेजों, महाविद्यालयों, सार्वजनिक स्थानों पर चहारदीवारी के बाहर वरिष्ठ जिला प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस विभाग के अधिकारियों के साथ ही संबंधित क्षेत्र के एसओ, हलका दरोगा और बीट पर तैनात सिपाहियों का नाम और मोबाइल नंबर लिखवाया गया। ताकि जरूरत पड़ने पर पीड़ित फोन करें। उन्हें समय रहते सेवा पहुंचाई जा सके।
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पुलिसकर्मियों के स्थानांतरित हो जाने के बाद उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया। वही पुराना नंबर ही चला आ रहा है। संबंधित थाना के एसओ का नंबर तो सीयूजी है। लेकिन अन्य पुलिसकर्मियों का मोबाइल तो उनके साथ ही चला गया। इसलिए अब दीवार पर अंकित उन नंबरों का कोई मतलब ही नहीं रहा।
पीड़ित पक्ष की सुविधाओं के लिए हुआ यह प्रयोग हो रहा फेल
महकमें का प्रयास रहा कि एक फोन पर जगह पर पुलिसिंग सेवा समय से पीड़ित तक पहुंचे। लेकिन क्षेत्र से पुलिसकर्मियों के दूसरे क्षेत्र में चले जाने के बाद उनके जगह नई तैनाती पाए सिपाहियों का नंबर नहीं लिखे जाने से यह प्रयोग अब असफल हो रहा है। सुविधा अच्छी दी गई। मगर, पुलिसकर्मियों के स्थानांतरण के बाद नई तैनाती पाने वाले कर्मियों का नंबर अंकित नहीं हो रहा है। इसलिए इमरजेंसी में जरूरतमंद लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। - जितेंद्र प्रजापति, शिक्षक, बेलवा बाजार
अपराध रोकने के शासन के निर्देश पर पुलिस महकमे की यह अच्छी पहल थी। इसे अपडेट किए जाते रहने की जरूरत है। - यमुना शरण मद्धेशिया, अध्यक्ष प्रधान संघ, देसही देवरिया।
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एसओ का सीयूजी नंबर छोड़कर बाकी पुलिसकर्मियों के स्थानांतरण के बाद इन अंकित नंबरों का नवीनीकरण नहीं कराया जा रहा। पीड़ित फोन कर रहे हैं तो वह पुलिसकर्मी किसी और थाने पर जा चुके हैं। कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और विशेष तौर पर छात्राओं से छेड़खानी जैसे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए शासन स्तर से पुलिस विभाग में बीट पुलिस प्रणाली को सक्रिय किया गया।
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उसके तहत सारे परिषदीय विद्यालयों, इंटर कालेजों, महाविद्यालयों, सार्वजनिक स्थानों पर चहारदीवारी के बाहर वरिष्ठ जिला प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस विभाग के अधिकारियों के साथ ही संबंधित क्षेत्र के एसओ, हलका दरोगा और बीट पर तैनात सिपाहियों का नाम और मोबाइल नंबर लिखवाया गया। ताकि जरूरत पड़ने पर पीड़ित फोन करें। उन्हें समय रहते सेवा पहुंचाई जा सके।
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पुलिसकर्मियों के स्थानांतरित हो जाने के बाद उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया। वही पुराना नंबर ही चला आ रहा है। संबंधित थाना के एसओ का नंबर तो सीयूजी है। लेकिन अन्य पुलिसकर्मियों का मोबाइल तो उनके साथ ही चला गया। इसलिए अब दीवार पर अंकित उन नंबरों का कोई मतलब ही नहीं रहा।
पीड़ित पक्ष की सुविधाओं के लिए हुआ यह प्रयोग हो रहा फेल
महकमें का प्रयास रहा कि एक फोन पर जगह पर पुलिसिंग सेवा समय से पीड़ित तक पहुंचे। लेकिन क्षेत्र से पुलिसकर्मियों के दूसरे क्षेत्र में चले जाने के बाद उनके जगह नई तैनाती पाए सिपाहियों का नंबर नहीं लिखे जाने से यह प्रयोग अब असफल हो रहा है। सुविधा अच्छी दी गई। मगर, पुलिसकर्मियों के स्थानांतरण के बाद नई तैनाती पाने वाले कर्मियों का नंबर अंकित नहीं हो रहा है। इसलिए इमरजेंसी में जरूरतमंद लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। - जितेंद्र प्रजापति, शिक्षक, बेलवा बाजार
अपराध रोकने के शासन के निर्देश पर पुलिस महकमे की यह अच्छी पहल थी। इसे अपडेट किए जाते रहने की जरूरत है। - यमुना शरण मद्धेशिया, अध्यक्ष प्रधान संघ, देसही देवरिया।