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बीएसएफ जवान के बेटे ने मुखाग्नि देने से किया इन्कार

Sun, 14 May 2017 10:53 PM IST
देवरिया/ अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया/ अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 14 May 2017 10:53 PM IST
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BSF jawan's son refused to give up
भागलपुर के कालीचरण घाट पर बीएसएफ जवान को गार्ड आफ आनर देते सैनिक - फोटो : अमर उजाला
 भागलपुर के कालीचरण घाट पर विवाद खड़ा होने के बाद बीएसएफ जवान अनिल कुमार उपाध्याय के चिता पर रखे शव को उनके पुत्र ने मुखाग्नि देने से इन्कार कर दिया। अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। इसी बीच वहां एक भाजपा नेता ने बोल दिया यह शहीद थोड़ी हुए हैं। इनकी समान्य मौत हुई है। इस पर बीएसएफ जवान के बेटे पवन उपाध्याय ने डीएम को बुलाने की जिद पर अड़ गए। मौजूद लोग भी उसकी बात का समर्थन करने लगे। यह देख वहां मौजूद अफसरों ने उन्हें काफी समझाया। आखिरकार करीब तीन घंटे के गतिरोध के बाद प्रभारी डीएम और एएसपी के पहुंचने पर मामला सुलझा और अंतिम संस्कार हो सका।
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 इससे पूर्व अड़िला गांव निवासी बीएसएफ जवान अनिल कुमार उपाध्याय का पार्थिव शरीर रविवार को अल सुबह उनके घर लाया गया। करीब एक घंटे तक घर के दरवाजे पर अंतिम दर्शन के लिए रखे जाने के बाद अंतिम संस्कार के लिए लोग शव को भागलपुर काली चरण घाट ले जाया गया। वहां चिता पर शव को रखा गया। गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए सैनिक तैयार हुए तभी एक भाजपा नेता ने बोल दिया कि ‘ये कोई शहीद थोड़े नहीं हुए है। समान्य मौत हुई है। दाह संस्कार के बाद आप लोगों को मुख्यमंत्री से मिलवा दूंगा।’ इसी पर लोग भड़क गए। वे शहीद का दर्जा दिलाने की मांग करते हुए शव को चिता पर रख कर धरने पर बैठ गए। करीब तीन घंटे बाद 10.30 बजे प्रभारी डीएम राजेश त्यागी और एएसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा पहुंचे। उन्होंने घर वालों को मांगे पूरी करने तथा हर संभव मदद करने का आश्वान दिया। इसके बाद गार्ड ऑफ ऑनर के बाद बड़े बेटे ने पिता के शव को मुखाग्नि दी।    
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बताते चलें कि अनिल कुुमार उपाध्याय जम्मू कश्मीर के राजौरी सेक्टर के बीएसएफ 163 बटालियन में तैनात थे। पदोन्नति के लिए चल रहे प्रशिक्षण में दौड़ के दौरान शुक्रवार की सुबह आठ बजे अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। बाद में इलाज के दौरान अस्पताल में उनकी मौत हो गई। 
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