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भागवत कथा : सच्चे मन से करें ईश्वर की आराधना
Sat, 11 Oct 2025 12:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 11 Oct 2025 12:44 AM IST
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- देसही देवरिया के सहवा गांव में श्रीमद्भागवत कथा का हुआ समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
देसही देवरिया। सहवा गांव में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को महाभंडारा के साथ समापन हुआ। इसमें सच्चे सच्चे मन से की गई आराधना को ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बताया गया।
श्रीमद् भागवत अमृत कथा का रसपान कराते हुए पंडित हरेंद्र उपाध्याय ने कहाकि अहंकार और अभिमान मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जिस व्यक्ति के अंदर लोभ, माया और लालच समा जाती है, वह स्वाभिमान भूल जाता है। जीवन में गुरु माता पिता की तरह होता है जो कभी अहित नहीं चाहता। बिना गुरु के सही राह पर चलना मुश्किल होता है। भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से मनुष्य जीवन सांसारिक बाधाओं और कष्टों से मुक्त हो जाता है। जीवन में सुख - और दुख आते - जाते हैं। लेकिन धैर्य का त्याग नहीं करना चाहिए। जो क्षमाशील होगा, वही धर्मयोगी होगा। भगवान कृष्ण ने कहा कि संसार में धर्म श्रेष्ठ है। इसका पालन करने वाला हर शख्स ईश्वर का प्रिय होता है। उसे कभी दुख नहीं होता। उन्होंने आगे कहाकि भागवत कथा जीवन का शाश्वत सत्य है। किसी को स्वयं या अपने संबंधी को लाभ पहुंचाने के लिए अपने नैतिकता का त्याग नहीं करना चाहिए। धरती पर जो कुछ भी हो रहा है, सब विधि का विधान है। मनुष्य तो मात्र एक किरदार है। इसलिए अपनी भूमिका का निर्वहन ठीक ढंग से करनी चाहिए। आयोजक जयगोविंद, जय प्रकाश सिंह ने सभी का आभार जताया। इस दौरान आनंद प्रकाश, राजेंद्र तिवारी, परशुराम तिवारी, जंगबहादुर सिंह, सर्वदानंद आदि मौजूद रहे।
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देसही देवरिया। सहवा गांव में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को महाभंडारा के साथ समापन हुआ। इसमें सच्चे सच्चे मन से की गई आराधना को ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बताया गया।
श्रीमद् भागवत अमृत कथा का रसपान कराते हुए पंडित हरेंद्र उपाध्याय ने कहाकि अहंकार और अभिमान मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जिस व्यक्ति के अंदर लोभ, माया और लालच समा जाती है, वह स्वाभिमान भूल जाता है। जीवन में गुरु माता पिता की तरह होता है जो कभी अहित नहीं चाहता। बिना गुरु के सही राह पर चलना मुश्किल होता है। भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से मनुष्य जीवन सांसारिक बाधाओं और कष्टों से मुक्त हो जाता है। जीवन में सुख - और दुख आते - जाते हैं। लेकिन धैर्य का त्याग नहीं करना चाहिए। जो क्षमाशील होगा, वही धर्मयोगी होगा। भगवान कृष्ण ने कहा कि संसार में धर्म श्रेष्ठ है। इसका पालन करने वाला हर शख्स ईश्वर का प्रिय होता है। उसे कभी दुख नहीं होता। उन्होंने आगे कहाकि भागवत कथा जीवन का शाश्वत सत्य है। किसी को स्वयं या अपने संबंधी को लाभ पहुंचाने के लिए अपने नैतिकता का त्याग नहीं करना चाहिए। धरती पर जो कुछ भी हो रहा है, सब विधि का विधान है। मनुष्य तो मात्र एक किरदार है। इसलिए अपनी भूमिका का निर्वहन ठीक ढंग से करनी चाहिए। आयोजक जयगोविंद, जय प्रकाश सिंह ने सभी का आभार जताया। इस दौरान आनंद प्रकाश, राजेंद्र तिवारी, परशुराम तिवारी, जंगबहादुर सिंह, सर्वदानंद आदि मौजूद रहे।
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