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Deoria News: प्रसव कराने के उपलब्ध बेहतर संसाधनों से भी कम होती है मातृ मृत्यु दर
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देवरिया। सीएमओ कार्यालय के धन्वंतरि सभागार में शनिवार को चिकित्सकों, स्टॉफ नर्स और एएनएम को गर्भावस्था में उच्च जोखिम (हाई रिस्क) से मरीज को बचाने के लिए किए जाने वाले उपायों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में बताया गया कि गर्भवती को घर के नजदीक जितनी बेहतर सुविधा मिलेगी, प्रसव उतना आसान व कम जोखिम वाला होगा। प्रसव के लिए उपलब्ध बेहतर संसाधनों से भी मातृ मृत्यु दर में कमी आती है।
प्रशिक्षण सत्र की अध्यक्षता कर रहे सीएमओ डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर रोकना और सुरक्षित प्रसव कराना है। कुशल प्रसव सहायक की मौजूदगी में होने वाले प्रसव से मातृ मृत्यु दर में कमी आती है। दिक्कत के समय महिला के घर के नजदीक जरूरी प्रसव सेवाओं का पैकेज उपलब्ध होने से भी मातृ मृत्यु दर में कमी आती है। कुशल प्रसव सहायक वह होता है जो प्रसव संबंधी दिक्कतों को संभाल सके। दिल्ली आईसीएमआर से आए प्रशिक्षक डॉ. संदीप ने कहा कि हर गर्भवती महिला जोखिम में है। गर्भवती की सभी जांचें सुनिश्चित होनी चाहिए।
महिला चिकित्सालय की डॉ. सुमन ने कहा कि प्रत्येक जन्म के समय कुशल सहायक की उपस्थिति सुनिश्चित करें। पीड़ा के दौरान महिला को उस स्थिति में रखें, जो उसके लिए आरामदायक हो। प्रसव पीड़ा के तीसरे चरण का प्रबंधन सुनिश्चित करें ताकि प्रसव के उपरांत अत्यधिक रक्तस्राव को रोका जा सके। प्रशिक्षण में डॉ. अश्वनी पाण्डेय, डॉ. वाईपी यादव, मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता विश्वनाथ मल्ल सहित चिकित्सक, स्टॉफ नर्स, एएनएम मौजूद रहीं।
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प्रशिक्षण सत्र की अध्यक्षता कर रहे सीएमओ डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर रोकना और सुरक्षित प्रसव कराना है। कुशल प्रसव सहायक की मौजूदगी में होने वाले प्रसव से मातृ मृत्यु दर में कमी आती है। दिक्कत के समय महिला के घर के नजदीक जरूरी प्रसव सेवाओं का पैकेज उपलब्ध होने से भी मातृ मृत्यु दर में कमी आती है। कुशल प्रसव सहायक वह होता है जो प्रसव संबंधी दिक्कतों को संभाल सके। दिल्ली आईसीएमआर से आए प्रशिक्षक डॉ. संदीप ने कहा कि हर गर्भवती महिला जोखिम में है। गर्भवती की सभी जांचें सुनिश्चित होनी चाहिए।
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महिला चिकित्सालय की डॉ. सुमन ने कहा कि प्रत्येक जन्म के समय कुशल सहायक की उपस्थिति सुनिश्चित करें। पीड़ा के दौरान महिला को उस स्थिति में रखें, जो उसके लिए आरामदायक हो। प्रसव पीड़ा के तीसरे चरण का प्रबंधन सुनिश्चित करें ताकि प्रसव के उपरांत अत्यधिक रक्तस्राव को रोका जा सके। प्रशिक्षण में डॉ. अश्वनी पाण्डेय, डॉ. वाईपी यादव, मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता विश्वनाथ मल्ल सहित चिकित्सक, स्टॉफ नर्स, एएनएम मौजूद रहीं।
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