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Deoria News: दगा दे गया बदरवा..., धान की फसल सूखने से किसान परेशान
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- मौसम विज्ञानियों की भविष्यवाणी फेल, पंपिंग सेट चलाकर फसल बचाने की हो रही जद्दोजहद
संवाद न्यूज एजेंसी
देसही देवरिया। जिले में इस साल औसत से काफी कम हुई बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। देसही देवरिया विकास खंड क्षेत्र में सूखे जैसे हालात हो गए हैं। किसान अपनी सूख रही फसलों को लेकर चिंतित है। अगेती प्रजाति के धानों की बालियां निकल रही हैं। तेज धूप व पानी की वजह से वह भी सूख रही है। फसल रोगग्रस्त हो गई है। इससे पैदावार प्रभावित हो रही है।
जिले में इस साल सामान्य से कम हुई बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। मौसम विज्ञानियों की अच्छी बारिश होने की भविष्यवाणी भी फेल हो गई। देसही देवरिया क्षेत्र में भी बारिश नहीं होने से सूखे जैसे हालात बन गए हैं। किसानों ने अपनी गाढ़ी कमाई खेतों में लगाकर फसल तैयार की। अब मौसम की बेरुखी और दगाबाजी ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है। वह जैसे- तैसे पैंपिंग सेट चलाकर फसल बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं। बिजली कटौती और लो वोल्टेज की वजह से ट्यूबवेल भी नहीं चल पा रहे हैं।
छोटी नहरों में पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। या इतना कम है कि खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। अगेती प्रजाति के धानों की बालियां निकल रही हैं। नमी नहीं होने से उसमें लगा फूल सूख जा रहा है। इससे ठीक ढंग से दाना नहीं पकड़ रहा है।
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पूर्व कृषि वैज्ञानिक/ विषय वस्तु विशेषज्ञ ओमकार नाथ दुबे ने बताया कि बारिश नहीं होने से फसल में कई रोग लग रहे हैं। फुट रहे धान की पैदावार प्रभावित होने की पूरी संभावना है। पिपरा मदन गोपाल गांव के संजय विश्वकर्मा, बसंतपुर के नागेंद्र सिंह, हेतिमपुर से मारकंडेय, गोठा रसूलपुर से अजय आदि किसानों ने बताया कि मौसम की मार से फसल चौपट हो रही है।
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पीली होने लगी धान की पत्तियां
खेतों में पड़े दरार और नमी कम होने के कारण धान की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। सड़न रोग लग गया है। दवा का छिड़काव भी काम नहीं कर रहा।
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कोट
धान की फसल के अच्छे उत्पादन के लिए 997 मिली मीटर के करीब बारिश होनी चाहिए, जबकि इस साल अभी तक 585 मिली मीटर के लगभग ही बारिश हुई है। जो औसत से काफी कम है। इससे अगेती प्रजाति के फुट रहे धान की पैदावार करीब 20% कम हो सकती है। उसमें पत्तियां पीली सहित कई रोग लग रहे हैं। बारिश आगे नहीं हुई तो विलंब से होने वाले धान और ज्यादा प्रभावित होंगे। किसान खेतों में पानी चलाकर फसल को सूखने से बचाएं।
-धीरेंद्र प्रताप सिंह, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि विभाग, देवरिया
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संवाद न्यूज एजेंसी
देसही देवरिया। जिले में इस साल औसत से काफी कम हुई बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। देसही देवरिया विकास खंड क्षेत्र में सूखे जैसे हालात हो गए हैं। किसान अपनी सूख रही फसलों को लेकर चिंतित है। अगेती प्रजाति के धानों की बालियां निकल रही हैं। तेज धूप व पानी की वजह से वह भी सूख रही है। फसल रोगग्रस्त हो गई है। इससे पैदावार प्रभावित हो रही है।
जिले में इस साल सामान्य से कम हुई बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। मौसम विज्ञानियों की अच्छी बारिश होने की भविष्यवाणी भी फेल हो गई। देसही देवरिया क्षेत्र में भी बारिश नहीं होने से सूखे जैसे हालात बन गए हैं। किसानों ने अपनी गाढ़ी कमाई खेतों में लगाकर फसल तैयार की। अब मौसम की बेरुखी और दगाबाजी ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है। वह जैसे- तैसे पैंपिंग सेट चलाकर फसल बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं। बिजली कटौती और लो वोल्टेज की वजह से ट्यूबवेल भी नहीं चल पा रहे हैं।
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छोटी नहरों में पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। या इतना कम है कि खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। अगेती प्रजाति के धानों की बालियां निकल रही हैं। नमी नहीं होने से उसमें लगा फूल सूख जा रहा है। इससे ठीक ढंग से दाना नहीं पकड़ रहा है।
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पूर्व कृषि वैज्ञानिक/ विषय वस्तु विशेषज्ञ ओमकार नाथ दुबे ने बताया कि बारिश नहीं होने से फसल में कई रोग लग रहे हैं। फुट रहे धान की पैदावार प्रभावित होने की पूरी संभावना है। पिपरा मदन गोपाल गांव के संजय विश्वकर्मा, बसंतपुर के नागेंद्र सिंह, हेतिमपुर से मारकंडेय, गोठा रसूलपुर से अजय आदि किसानों ने बताया कि मौसम की मार से फसल चौपट हो रही है।
पीली होने लगी धान की पत्तियां
खेतों में पड़े दरार और नमी कम होने के कारण धान की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। सड़न रोग लग गया है। दवा का छिड़काव भी काम नहीं कर रहा।
कोट
धान की फसल के अच्छे उत्पादन के लिए 997 मिली मीटर के करीब बारिश होनी चाहिए, जबकि इस साल अभी तक 585 मिली मीटर के लगभग ही बारिश हुई है। जो औसत से काफी कम है। इससे अगेती प्रजाति के फुट रहे धान की पैदावार करीब 20% कम हो सकती है। उसमें पत्तियां पीली सहित कई रोग लग रहे हैं। बारिश आगे नहीं हुई तो विलंब से होने वाले धान और ज्यादा प्रभावित होंगे। किसान खेतों में पानी चलाकर फसल को सूखने से बचाएं।
-धीरेंद्र प्रताप सिंह, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि विभाग, देवरिया