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औषधीय पौधों की प्रदर्शनी ने बढ़ाई जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो/देवरिया
Updated Sun, 31 Jan 2016 10:34 PM IST
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विज्ञान भारती और बीआरडीपीजी कॉलेज की ओर से कॉलेज परिसर में आयोजित दो दिवसीय ग्रामीण भारत के विज्ञान विषयक संगोष्ठी का रविवार को समापन हुआ।
दूसरे दिन तकनीकी सत्र में वैज्ञानिकों ने 70 शोधपत्र पढ़ा। औषधीय पौधों की प्रदर्शनी लगाकर इसके बारे में जानकारी दी गई।
संगोष्ठी के समापन कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिलाधिकारी अनिता श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि हमारा साहित्य और संस्कृति विज्ञान से जुड़ा है।
विज्ञान के क्षेत्र में भारत विश्व गुरू है। उन्होंने कहा कि संस्कृत सबसे वैज्ञानिक भाषा है। इसका प्रयोग विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों में हो रहा है।
उन्होंने नए-नए अनुसंधान को वक्त की जरूरत बताया। विशिष्ट अतिथि नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष अलका सिंह ने कहा कि इस तरह के कार्यशाला का आयोजन समय-समय पर होते रहना चाहिए।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की शोध छात्रा स्वाति शाही ने मूंग बीन और शिल्पी श्रीवास्तवा ने शुगर फ्री प्लांट स्टीविया रिबुडियाना पर शोध पत्र पढ़ा।
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शिल्पी श्रीवास्तव ने कहा कि भविष्य में यह चीनी का विकल्प बनेगा। कृषि, आयुर्वेद, स्मार्ट विलेज, जैव विविधता, साइबर अपराध, नारी सशक्तीकरण, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, जैव विविधता आदि पर कुल 70 शोधपत्र पढ़े गए।
कृषि एवं पशुपालन, स्वावलंबन, ग्रामीण तकनीक का व्यवसायीकरण, शिल्पकला और हस्तकला से संबंधित 55 पोस्टर लगाए गए थे।
संगोष्ठी को डॉ. आर अचल ने कहा कि कृषि में नई सोच विकसित हो रही है। 1960 के दशक में कृषि जैविक खादों से होती थी।
उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम करें, तभी धरती का स्वास्थ्य सुधरेगा।
डॉ. सोमदेव, डॉ. हरिशंकर गोविंद राव, डॉ. वाईपी कोहली, डॉ. जसमीर सिंह आदि ने भी अपना विचार रखा। प्राचार्य डॉ. महेश्वर सिंह ने सभी का आभार प्रकट किया।
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दूसरे दिन तकनीकी सत्र में वैज्ञानिकों ने 70 शोधपत्र पढ़ा। औषधीय पौधों की प्रदर्शनी लगाकर इसके बारे में जानकारी दी गई।
संगोष्ठी के समापन कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिलाधिकारी अनिता श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि हमारा साहित्य और संस्कृति विज्ञान से जुड़ा है।
विज्ञान के क्षेत्र में भारत विश्व गुरू है। उन्होंने कहा कि संस्कृत सबसे वैज्ञानिक भाषा है। इसका प्रयोग विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों में हो रहा है।
उन्होंने नए-नए अनुसंधान को वक्त की जरूरत बताया। विशिष्ट अतिथि नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष अलका सिंह ने कहा कि इस तरह के कार्यशाला का आयोजन समय-समय पर होते रहना चाहिए।
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की शोध छात्रा स्वाति शाही ने मूंग बीन और शिल्पी श्रीवास्तवा ने शुगर फ्री प्लांट स्टीविया रिबुडियाना पर शोध पत्र पढ़ा।
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शिल्पी श्रीवास्तव ने कहा कि भविष्य में यह चीनी का विकल्प बनेगा। कृषि, आयुर्वेद, स्मार्ट विलेज, जैव विविधता, साइबर अपराध, नारी सशक्तीकरण, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, जैव विविधता आदि पर कुल 70 शोधपत्र पढ़े गए।
कृषि एवं पशुपालन, स्वावलंबन, ग्रामीण तकनीक का व्यवसायीकरण, शिल्पकला और हस्तकला से संबंधित 55 पोस्टर लगाए गए थे।
संगोष्ठी को डॉ. आर अचल ने कहा कि कृषि में नई सोच विकसित हो रही है। 1960 के दशक में कृषि जैविक खादों से होती थी।
उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम करें, तभी धरती का स्वास्थ्य सुधरेगा।
डॉ. सोमदेव, डॉ. हरिशंकर गोविंद राव, डॉ. वाईपी कोहली, डॉ. जसमीर सिंह आदि ने भी अपना विचार रखा। प्राचार्य डॉ. महेश्वर सिंह ने सभी का आभार प्रकट किया।