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देवरिया सीट पर एनसीपी की भी दावेदारी
Deoria
Updated Wed, 01 Jan 2014 05:44 AM IST
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देवरिया। विधानसभा चुनावों के नतीजों से निराश कांग्रेस और उसके सहयोगी घटक दलों में बेचैनी बढ़ गई है। उसके सहयोगी घटक दल यूपी में कुछ चुनिंदा सीटों पर दावेदारी ठोंक कर और मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सीटों के समझौतों में देवरिया समेत पूर्वांचल के कुछ चुनिंदा सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। देवरिया लोकसभा सीट से खुद संगठन के प्रदेश अध्यक्ष/पूर्व विधायक फजले मसूद चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के दावेदारों की मुसीबत बढ़ सकती हैं। 16वीं लोकसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने कमर कस लिया है।
देवरिया लोकसभा से सपा ने पूर्व सांसद बालेश्वर और बसपा ने नियाज खान को उम्मीदवार घोषित किया हैं। लेकिन राष्ट्रीय दल कांग्रेस और भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वहीं पूर्व के तीन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस इस सीट पर नए चेहरों पर प्रयोग करती रही है। बता दें कि सपा के प्रत्याशी पूर्व सांसद बालेश्वर यादव को पिछले चुनाव 2009 में टिकट थमाया तो जरूर पर करारी शिकस्त खानी पड़ी थी। इसके पहले भाजपा से आए पूर्व एमएलसी रामाशीष राय को वर्ष 2004 में लोकसभा टिकट दिया लेकिन कांग्रेस चुनाव हार गई। वर्ष 1999 में उत्तराखंड के पूर्व उप महाधिवक्ता सीबी पांडेय को चुनाव मैदान में उतारा लेकिन वह भी नैया पार नहीं लगा सके। रामाशीष राय को छोड़ दें तो दोनों नेता कांग्रेेस से नाता तोड़ चुके हैं। इधर, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां हैं।
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विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेेस प्रत्याशी घोषित करने को लेकर अभी माथापच्ची कर रही है। चर्चा है कि वह नए प्रयोग करने की बजाय अपने सहयोगी दलों से गठबंधन की शर्तों पर सीट देने से परहेज नहीं करेगी। देवरिया सीट से खुद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष फजले मसूद चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। वह 1984 में देवरिया सीट से विधायक और एक बार एमएलसी रह चुके हैं।
चर्चा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार उनको मैदान में उतारने के लिए कांग्रेस आलाकमान से बात कर रहे हैं। यदि कांग्रेस ने प्रदेश में एनसीपी से समझौता की तो वह देवरिया से उम्मीदवार हो सकते हैं। फजले मसूद ने अमर उजाला को बताया कि उनकी पार्टी कुछ चुनिंदा सीटों खासकर पूर्वांचल में चुनाव लड़ेगी। वह चुनाव देवरिया सीट से ही लड़ेंगे वरना नहीं लड़ेंगे।
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सीटों के समझौतों में देवरिया समेत पूर्वांचल के कुछ चुनिंदा सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। देवरिया लोकसभा सीट से खुद संगठन के प्रदेश अध्यक्ष/पूर्व विधायक फजले मसूद चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के दावेदारों की मुसीबत बढ़ सकती हैं। 16वीं लोकसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने कमर कस लिया है।
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देवरिया लोकसभा से सपा ने पूर्व सांसद बालेश्वर और बसपा ने नियाज खान को उम्मीदवार घोषित किया हैं। लेकिन राष्ट्रीय दल कांग्रेस और भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वहीं पूर्व के तीन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस इस सीट पर नए चेहरों पर प्रयोग करती रही है। बता दें कि सपा के प्रत्याशी पूर्व सांसद बालेश्वर यादव को पिछले चुनाव 2009 में टिकट थमाया तो जरूर पर करारी शिकस्त खानी पड़ी थी। इसके पहले भाजपा से आए पूर्व एमएलसी रामाशीष राय को वर्ष 2004 में लोकसभा टिकट दिया लेकिन कांग्रेस चुनाव हार गई। वर्ष 1999 में उत्तराखंड के पूर्व उप महाधिवक्ता सीबी पांडेय को चुनाव मैदान में उतारा लेकिन वह भी नैया पार नहीं लगा सके। रामाशीष राय को छोड़ दें तो दोनों नेता कांग्रेेस से नाता तोड़ चुके हैं। इधर, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां हैं।
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विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेेस प्रत्याशी घोषित करने को लेकर अभी माथापच्ची कर रही है। चर्चा है कि वह नए प्रयोग करने की बजाय अपने सहयोगी दलों से गठबंधन की शर्तों पर सीट देने से परहेज नहीं करेगी। देवरिया सीट से खुद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष फजले मसूद चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। वह 1984 में देवरिया सीट से विधायक और एक बार एमएलसी रह चुके हैं।
चर्चा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार उनको मैदान में उतारने के लिए कांग्रेस आलाकमान से बात कर रहे हैं। यदि कांग्रेस ने प्रदेश में एनसीपी से समझौता की तो वह देवरिया से उम्मीदवार हो सकते हैं। फजले मसूद ने अमर उजाला को बताया कि उनकी पार्टी कुछ चुनिंदा सीटों खासकर पूर्वांचल में चुनाव लड़ेगी। वह चुनाव देवरिया सीट से ही लड़ेंगे वरना नहीं लड़ेंगे।