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सूर्य को अर्घ्य दे पूरा हुआ छठ व्रत
Deoria
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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देवरिया। मंगलवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ व्रत का समापन हो गया। अर्घ्य देकर घर पहुंची व्रती महिलाओं ने जल और अन्न ग्रहण किया।
सोमवार को पूरे दिन निर्जल व्रत रहकर महिलाएं छठ घाटों पर पहुंची थीं। अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य देने के बाद वह छठ मइया के गीत गाते हुए घरों को गई थीं। मंगलवार को तड़के महिलाएं गीत गाते हुए उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए छठ घाटों पर पहुंचीं। विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद महिलाएं जलाशय और सरोवरों में खड़ी होकर सूर्य के उदय का इंतजार करने लगीं। सुबह 06.39 बजे जैसे ही भगवान सूर्य का उदय हुआ, ब्राह्मणों ने व्रती महिलाओं को गाय के दूध का अर्घ्य दिलाया। छठ मइया की पूजा कर महिलाओं ने सुहाग और पुत्र के रक्षा की कामना की। शहर के हनुमान मंदिर पोखरा, अमेठी माई पोखरा, लच्छीराम पोखरा, परमार्थी पोखरा, हथियाकुंड, देवरही मंदिर पोखरा और कुर्ना नाला आदि छठ घाटों पर व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। खुखुंदू, रामपुर कारखाना, देसही देवरिया, कंचनपुर, बघौचघाट, गौरीबाजार आदि क्षेत्र में भी छठ पर्व की धूम रही। सभी पोखरों और तालाबों पर अर्घ्य देने के लिए मेला सा लगा हुआ था।
प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। हालांकि लोग खुद ही श्ाांति से पूजा में लीन थे। कहीं से भी किसी तरह की गड़बड़ी नही हुई।
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सोमवार को पूरे दिन निर्जल व्रत रहकर महिलाएं छठ घाटों पर पहुंची थीं। अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य देने के बाद वह छठ मइया के गीत गाते हुए घरों को गई थीं। मंगलवार को तड़के महिलाएं गीत गाते हुए उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए छठ घाटों पर पहुंचीं। विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद महिलाएं जलाशय और सरोवरों में खड़ी होकर सूर्य के उदय का इंतजार करने लगीं। सुबह 06.39 बजे जैसे ही भगवान सूर्य का उदय हुआ, ब्राह्मणों ने व्रती महिलाओं को गाय के दूध का अर्घ्य दिलाया। छठ मइया की पूजा कर महिलाओं ने सुहाग और पुत्र के रक्षा की कामना की। शहर के हनुमान मंदिर पोखरा, अमेठी माई पोखरा, लच्छीराम पोखरा, परमार्थी पोखरा, हथियाकुंड, देवरही मंदिर पोखरा और कुर्ना नाला आदि छठ घाटों पर व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। खुखुंदू, रामपुर कारखाना, देसही देवरिया, कंचनपुर, बघौचघाट, गौरीबाजार आदि क्षेत्र में भी छठ पर्व की धूम रही। सभी पोखरों और तालाबों पर अर्घ्य देने के लिए मेला सा लगा हुआ था।
प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। हालांकि लोग खुद ही श्ाांति से पूजा में लीन थे। कहीं से भी किसी तरह की गड़बड़ी नही हुई।