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पुलिस की संवेदनहीनता से हिमांशु की गई जान

Thu, 11 Dec 2014 05:30 AM IST
Deoria
Deoria Updated Thu, 11 Dec 2014 05:30 AM IST
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देवरिया। प्रीति दुबे की आंखों का एक तारा ओझल हो गया। तीन भाइयोें में छोटा हिमांशु का साथ हमेशा के लिए छूट गया। नेहरूनगर मोहल्ले में हर कोई गमजदा था। सवाल उठ रहे थे कि घटना का जिम्मेदार कौन है? पूरे मामले में रिश्तों की रंजिश में हिमांशु भेंट चढ़ गया। कोई अपनी बेटी को वापस लाना चाहता था तो किसी के रुपये बकाए थे। संपत्ति का विवाद इतना बढ़ जाएगा इस बात का यकीन किसी को नहीं था। नामजद तहरीर के 24 घंटे बाद भी आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर थे। कलंकित रिश्तों के बीच कोतवाली पुलिस भी मरहम नहीं लगा पाई। दोनों परिवारों के बीच हुआ विवाद कई बार कोतवाली पहुंचा लेकिन पुलिस ने उसे हल्के में लिया। आखिर प्रीति की आंखों से निकल रहे आंसुओं का जिम्मेदार कौन है।
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हर आरोपी की अलग-अलग कहानी
पुलिस की पूछताछ में हिमांशु के फूफा राजेश मिश्र ने बताया कि पत्नी साधना की मौत के बाद उनकी बड़ी बेटी शालू अपनी मामी प्रीति दुबे के साथ रहती थी। कुछ संपत्ति उनके नाम से है। पांच सालाें तक लोगों ने उनकी बेटी को दूर रखा। मामा राजेश दुबे ने अपने घर के बगल में जमीन खरीद रखी थी जिसे लोगों ने बेच दिया। इसी बात को लेकर दोनों रिश्तेदारों के बीच काफी तनाव था। दूसरा आरोपी पंकज मिश्र ट्रवेल्स एजेंसी चलवाता था। उसकी मानें तो कुछ दिन पहले प्रीति दुबे और उनके घरवाले किराए पर वाहन ले गए लेकिन भाड़े की रकम नहीं दी। जो 15 से 20 हजार रुपये के बीच बताई जा रही है।
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‘हत्या नहीं परेशान करने का था इरादा’
दोनों परिवार के बीच तकरार की भेंट चालक मिथिलेश चढ़ गया। पूछताछ में उसने बताया कि मासूम को अगवा कर परिवारवालों को परेशान करने की योजना थी। दो बाइक पर पहुंचे राजेश, पंकज और मिथिलेश ने बच्चे को अगवा किया। चालक ने बच्चे को कई नींद की गोली दे दी। इससे उसकी मौत हो गई।
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अन्य संलिप्तों की तलाश जारी
कोतवाली प्रभारी सब इंस्पेक्टर हरेन्द्र मिश्र ने बताया कि अपहरण के बाद युवक की हत्या कर राजेश मिश्र, पंकज और चालक मिथिलेश पटेल शहर छोड़कर भाग रहे थे। तीनों आरोपियों को सदर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया। उनकी निशानदेही पर भटनी मिश्रौली दीक्षित स्थित गेहूं के खेत से बच्चे की लाश बरामद की गई। जिस गांव में बच्चे की लाश मिली है उसी गांव में पंकज की ससुराल है। घटना में कई अन्य लोगों के चेहरे को बेनकाब होंगे।
नेहरू नगर में रिश्तेदारों की भीड़
बेटे की मौत के बाद प्रीति दुबे और उनके घरवाले सदमे में है। घटना की जानकारी होने के बाद मोहल्ले और रिश्तेदारों की भीड़ बुधवार की सुबह से ही जुटे लगी थी। मां के आंखों से निकल रहे आंसू कोई रोक नहीं पा रहा था। लोग समझा रहे थे लेकिन बेटे की ममता मां को नहीं छोड़ रही थी। सैकड़ों लोगों की आंख नम हो गईं। गमजदा लोगों के गले भर गए।
हत्या की वजह नहीं हुई साफ, बिसरा प्रिजर्ब
हिमांशु की मौत के बाद पोस्टमार्टम कर रहे डॉक्टरों को मौत की वजह साफ पता नहीं चल पाई। पोस्टमार्टम के दौरान मौजूद डॉ. पीएन कन्नौजिया और उमाकांत पांडेय ने बिसरा प्रिजर्ब कर लिया। बच्चे के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले। लेकिन सूत्रों का कहना है कि दमघुटने से बच्चे की मौत हो गई है।
कोतवाली की फौज भी नहीं आई काम
शहर कोतवाल श्रीधराचार्य पांडेय के अलावा थानाध्यक्ष की कुर्सी संभाल चुके उप निरीक्षक हरेन्द्र मिश्र, अवधेश प्रसाद, रमाशंकर सरोज, देवेन्द्र विक्रम के अलावा कई वर्ष से कोतवाली में तैनात उप निरीक्षक मोहनलाल यादव, राजेश यादव, विकास यादव, सुंदर प्रसाद, बाबूलाल यादव, भरत राय, ओपी राय, रमेश जैसे दरोगा कोतवाली में मौजूद हैं। इसके अलावा 12 से अधिक लोगों को एएसआई बनाया गया है। दरोगाओं की फौज होने के बाद भी पुलिस का पूरा मुखबिर तंत्र फेल हो गया।
क्राइम नंबर पर दर्ज होगा केस
नाबालिग बच्चों के अगवा होने के मामले को लेकर कोर्ट ने गंभीरता से लिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बीते वर्ष से क्राइम नंबर पर बच्चों के गुमशुदगी का केस दर्ज की जा रही है। बावजूद इसके पुलिस ने अन्य घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया।
अपहरण के बाद मासूमों की रखवाली नहीं कर पाई पुलिस
कार्तिकेय, निखिल की हत्याओं से नहीं लिया कोई सबक
देवरिया। अपहृत हिमांशु की हत्या से लोगों की रूह कांप गईं। रिश्तों को कलंकित करने वालों के हाथ तक नहीं कांपे। मासूम की मौत के बाद सुरक्षा पर सवाल उठने लगा है। हर बार की तरह इस बार भी पुलिस अपहृत मामूम की जिंदगी नहीं बचा पाई। सुरक्षा को लेकर पुलिस सवालों केे घेरे में है।
वर्ष 2012 में शहर के भुजौली कालोनी का रहने वाला नाबालिग कार्तिकेय स्कूल से घर लौट रहा था। उसे कुछ लोगों ने अगवा कर लिया। पिता विदेश में थे मां ने कोतवाली में तहरीर दी लेकिन तत्कालीन इंस्पेक्टर विजय शंकर तिवारी ने घटना को हल्के में लिया। कार्तिकेय की लाश महराजगंज जिले में मिली। जांच में पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि कार्तिकेय के सगे रिश्तेदार ने घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने रिश्तेदार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
शहर के रामगुलाम मोहल्ले के रहने वाले काशी तिवारी के पुत्र निखिल तिवारी 16 को फरवरी 2013 में कुछ लोगों ने अगवा कर लिया। जांच में पता चला कि उनके मकान में रहने वाला एक युवक नौकरी का झांसा देकर बिहार ले गया और बंधक बनाकर फिरौती की मांग करने लगा। आठ दिनों तक पुलिस राख में सुई खोजती रही। बिहार के सिवान जिले में कुंए से निखिल तिवारी की लाश मिली।

फरवरी 2014 में बनकटा नोनार पांडेय निवासी अवधेश गुप्ता के छह वर्षीय पुत्र आदित्य को कुछ लोगों ने अगवा कर लिया। कई दिनों तक पुलिस हवा में तीर चलाती रही। जांच में मौके पर पहुंचे तत्कालीन एसपी रविशंकर छबि के वाहन पर लोगों ने पथराव किया। घटना के तीन दिन बाद उसकी लाश मिली। पुलिस ने घटना का खुलासा किया लेकिन घरवालों ने उस पर सवाल उठा दिया।
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