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नहीं चेते तो बंजर हो जाएंगे हमारे खेत

Fri, 01 Feb 2019 10:30 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 01 Feb 2019 10:30 PM IST
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नहीं चेते तो बंजर हो जाएंगे हमारे खेत
रसायनों के अंधाधुंध इस्तेमाल से खेत बीमार
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मिट्टी के नमूनों की जांच के बाद सामने आई चिंताजनक तस्वीर
नीलांबुज मिश्र
देवरिया। खेतों में रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी बीमार हो रही है। जरूरी पोषकतत्वों की मात्रा तेजी से घट रही है तो मित्र कीट भी नष्ट हो रहे हैं। मृदा परीक्षण के लिए नमूनों की जांच में यह तथ्य सामने आया है। यही हाल रहा जिले की धरती सोना नहीं उगल सकेगी। मृदा परीक्षण की जांच रिपोर्ट के बाद कृषि विभाग की चिंता बढ़ गई है।
जिले में गेहूं, धान, आलू, मक्का आदि फसलों की खेती प्रमुखता से होती है। अधिक उत्पादन की चाह में किसान रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों का बेतहाशा प्रयोग कर रहे हैं। तात्कालिक लाभ भले मिल रहा हो, लेकिन भविष्य के लिए चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। वर्ष 17-18 में मिट्टी के 30869 नमूने लिए गए थे। अधिकांश नमूनों की जांच में पोषक तत्वों की कमी पाई गई। वर्ष 2018-19 में 34205 नमूनों में से 14000 की रिपोर्ट आई है, इसमें करीब 92 फीसदी नमूनों मेें जीवांश कार्बन व सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी मिली है। भूमि परीक्षण प्रयोगशाला देवरिया प्रभारी अजय तिवारी ने बताया कि मिट्टी में सूक्ष्मतत्वों की मात्रा व जीवांश कार्बन की स्थिति में सुधारा नहीं लाया गया तो फसलों का उत्पादन नहीं होगा। मिट्टी में मौजूद मित्रकीट मर रहे हैं। अगर किसान नहीं चेते तो परिणाम घातक होगा। बताया कि किसानों को जैविक खेती की ओर ध्यान देना चाहिए। कीटनाशक का इस्तेमाल कम करें। सरकार और अधिकारी किसानों को टिप्स दे सकते हैं, लेकिन इसका उपयोग किसानों को ही करना होगा।
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यह करें उपाय
कृषि विज्ञान केंद्र मलहना की कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा ने बताया कि कीटनाशक के इस्तेमाल से मित्रकीट मर जाते हैं। वहीं खेतों में फसल अवशेष जलाने से सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी कमी आती है। किसान इसमें सुधार चाहते हैं तो उन्हें गोबर की खाद व वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करना होगा। हरी खाद के लिए ढैंचा व दलहनी फसलों की बुवाई पर जोर देना होगा। किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच कराकर उसके अनुसार ही उर्वरकों व पोषक तत्वों का इस्तेमाल करें।
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तत्व मानक औसत स्थिति
जिंक 1.0 से 20 0.90 पीपीएम
फास्फोरस 10-15 09.0 पीपीएम
आयरन 4 से 6 08.0 पीपीएम
कॉपर सल्फेट 0.2 से 0.4 01.8 पीपीएम
(पीपीएम: पार्ट प्रति मिलियन)

घुलनशीलता कम होने से उर्वरक का नहीं होता असर
मिट्टी में सल्फर की घुलनशीलता 15 से अधिक है। तब इसे पर्याप्त माना जाता है। वहीं 10 तक की स्थिति में भी इसे सामान्य माना जाता है। पर जिले में इसकी हालत बहुत खराब (नौ से कम) है। यहां पर फास्फेट की घुलनशीलता कम हो जाएगी तो यह एक परत बना देगी। इससे उर्वरक जमीन के अंदर तक जाएंगे ही नहीं।



जीवांश कार्बन की स्थिति भी खराब
मिट्टी में जीवांश कार्बन 0.80 पीपीएम से अधिक होने पर इसे उच्च स्तर पर माना जाता है। वहीं 0.51 से 0.8 तक होने पर भी मध्यम स्तर होता है। यहां तक स्थिति सामान्य रहती है। जिले में यह महज 0.20 के आसपास है। यह हालत चिंताजनक है।
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