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एंबुलेंस में भी सुरक्षित नहीं है जान
Updated Sat, 07 Jul 2018 11:18 PM IST
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आक्सीजन विहीन एम्बुलेंस में नवजात बच्चो के साथ प्रसुताए।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। जीवनरक्षक उपकरणों के सहारे दौड़ने वाले एंबुलेंस में भी मरीजों की जान सुरक्षित नहीं है। जिले में संचालित 108 व 102 नंबर एंबुलेंस में अव्यवस्थाओं की भरमार है। एंबुलेंस में ऑक्सीजन की कमी और जीवनरक्षक दवाओं का टोटा है। उपकरणों की हालत भी खस्ता है। इसमें रखे गए अग्निशमन यंत्र भी एक्पायर हो चुके हैं। लगने के बाद से इन्हें रीफिल नहीं कराया गया। शनिवार को ‘अमर उजाला’ की पड़ताल में जिला अस्पताल पर मरीजों को लेकर आए कई एंबुलेंस में खामियां मिलीं। एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक लाने-ले जाने में एंबुलेंस की सेवा भरोसेमंद मानी जाती है। लोगों को उम्मीद होती है कि एंबुलेंस में मौजूद जीवनरक्षक उपकरणों की मदद से मरीज को रास्ते में आने वाली दुश्वारियां से बचाया जा सकता है। इसमें ऑक्सीजन सिलेंडर के अलावा प्राथमिक उपचार की दवाएं मौजूद रहती हैं। मगर यहां एंबुलेंस के अंदर भी जान खतरे में ही है। एंबुलेंस के अंदर मिलने वाली इलाज की सुविधा नदारद है।
पड़ताल एक -
खराब थी एंबुलेंस की ऑक्सीजन किट
शनिवार की दोपहर महिला अस्पताल के बाहर यूपी 52 एजी 1052 नंबर की 102 एंबुलेंस लगी थी। ईएमटी रामवृक्ष दो प्रसूताओं को उनके घर छोड़ने के लिए तैयारी में थे। शिशु को लेकर रवाना होने जा रही एंबुलेंस में ऑक्सीजन किट खराब हो गया था, इसे बनने के लिए लखनऊ भेजा गया है। प्रसूताओं को घर ले जाते वक्त अगर शिशु को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी तो उसे इसकी सुविधा नहीं मिल पाएगी। ईएमटी अमित ने बताया कि ऑक्सीजन किट अलग रखा गया है। जरूरत के हिसाब से लगाया जाता है, जबकि अन्य एंबुलेंस में ऑक्सीजन किट लगा हुआ था।
पड़ताल दो -
ऑक्सीजन टंकी खाली, फर्स्ट एड बॉक्स में रुई और पट्टी
रुद्रपुर से 2961 नंबर की 108 एंबुलेंस आरती देवी को लेकर इमरजेंसी पर पहुंचा। स्ट्रेचर खराब होने के कारण मरीज को ईएमटी प्रमोद कुमार पैदल ले गए और अस्पताल में इंट्री कराए। इस एंबुलेंस में लगी बड़ी टंकी में ऑक्सीजन नहीं था। इसके लिए छोटा सिलिंडर रखा गया था। फर्स्ट एड बाक्स में सिर्फ रूई और पट्टी रखा गया था। कुछ दवाएं भी थी, लेकिन इसमें कई जरूरी जीवनरक्षक इंजेक्शन नहीं था। एंबुलेंस में लगा अग्निशमन यंत्र एक्सपायर हो चुका था। ईएमटी ने बताया कि गाड़ी के साथ यह मिला था। तबसे बदला नहीं गया है।
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तीन दिनों से खराब है अत्याधुनिक एंबुलेंस
दो एंबुलेंस एएलएस (एडवांस लाइफ स्पोर्ट) अत्याधुनिक एंबुलेंस जिलेे को मिली है। गंभीर हालत में मरीजों को एसपीजीआई, बीएचयू या मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया जाता है। इस एंबुलेंस में ओटी जैसी सभी सुविधाएं हैं। इसमें एक एंबुलेंस तकनीकी खराबी के कारण तीन दिनों से खराब है जो महिला अस्पताल के पास खड़ी है।
मरम्मत में ही लग जाते हैं कई दिन
एंबुलेंस में लगे उपकरण खराब होने के बाद इसका रिप्लेसमेंट लखनऊ होने के लिए जाता है। लोकल स्तर पर इसका रिप्लेसमेंट करने की कोई सुविधा नहीं है। इस चक्कर में कई दिनों तक एंबुलेंस को खड़ा होना पड़ता है।
एंबुलेंस की जांच बीच-बीच में होती रहती है। अगर ऐसी बात है तो अभियान चलाकर जांच की जाएगी। कमियों को दूर कराया जाएगा।
-डॉ. धीरेंद्र कुमार, सीएमओ।
ऑक्सीजन समाप्त होने या किट न होने की जानकारी नहीं है। हो सकता है अस्पताल लाते वक्त ऑक्सीजन खत्म हो गया हो। ऑक्सीजन किट बनने के लिए लखनऊ भेजा गया है।
- संजय कुमार, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर, एंबुलेंस सेवा।
* 26 एंबुलेंस 108 सेवा की।
* 38 एंबुलेंस 102 सेवा की।
* 2 एंबुलेंस एएलएस श्रेणी की।
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पड़ताल एक -
खराब थी एंबुलेंस की ऑक्सीजन किट
शनिवार की दोपहर महिला अस्पताल के बाहर यूपी 52 एजी 1052 नंबर की 102 एंबुलेंस लगी थी। ईएमटी रामवृक्ष दो प्रसूताओं को उनके घर छोड़ने के लिए तैयारी में थे। शिशु को लेकर रवाना होने जा रही एंबुलेंस में ऑक्सीजन किट खराब हो गया था, इसे बनने के लिए लखनऊ भेजा गया है। प्रसूताओं को घर ले जाते वक्त अगर शिशु को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी तो उसे इसकी सुविधा नहीं मिल पाएगी। ईएमटी अमित ने बताया कि ऑक्सीजन किट अलग रखा गया है। जरूरत के हिसाब से लगाया जाता है, जबकि अन्य एंबुलेंस में ऑक्सीजन किट लगा हुआ था।
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पड़ताल दो -
ऑक्सीजन टंकी खाली, फर्स्ट एड बॉक्स में रुई और पट्टी
रुद्रपुर से 2961 नंबर की 108 एंबुलेंस आरती देवी को लेकर इमरजेंसी पर पहुंचा। स्ट्रेचर खराब होने के कारण मरीज को ईएमटी प्रमोद कुमार पैदल ले गए और अस्पताल में इंट्री कराए। इस एंबुलेंस में लगी बड़ी टंकी में ऑक्सीजन नहीं था। इसके लिए छोटा सिलिंडर रखा गया था। फर्स्ट एड बाक्स में सिर्फ रूई और पट्टी रखा गया था। कुछ दवाएं भी थी, लेकिन इसमें कई जरूरी जीवनरक्षक इंजेक्शन नहीं था। एंबुलेंस में लगा अग्निशमन यंत्र एक्सपायर हो चुका था। ईएमटी ने बताया कि गाड़ी के साथ यह मिला था। तबसे बदला नहीं गया है।
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तीन दिनों से खराब है अत्याधुनिक एंबुलेंस
दो एंबुलेंस एएलएस (एडवांस लाइफ स्पोर्ट) अत्याधुनिक एंबुलेंस जिलेे को मिली है। गंभीर हालत में मरीजों को एसपीजीआई, बीएचयू या मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया जाता है। इस एंबुलेंस में ओटी जैसी सभी सुविधाएं हैं। इसमें एक एंबुलेंस तकनीकी खराबी के कारण तीन दिनों से खराब है जो महिला अस्पताल के पास खड़ी है।
मरम्मत में ही लग जाते हैं कई दिन
एंबुलेंस में लगे उपकरण खराब होने के बाद इसका रिप्लेसमेंट लखनऊ होने के लिए जाता है। लोकल स्तर पर इसका रिप्लेसमेंट करने की कोई सुविधा नहीं है। इस चक्कर में कई दिनों तक एंबुलेंस को खड़ा होना पड़ता है।
एंबुलेंस की जांच बीच-बीच में होती रहती है। अगर ऐसी बात है तो अभियान चलाकर जांच की जाएगी। कमियों को दूर कराया जाएगा।
-डॉ. धीरेंद्र कुमार, सीएमओ।
ऑक्सीजन समाप्त होने या किट न होने की जानकारी नहीं है। हो सकता है अस्पताल लाते वक्त ऑक्सीजन खत्म हो गया हो। ऑक्सीजन किट बनने के लिए लखनऊ भेजा गया है।
- संजय कुमार, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर, एंबुलेंस सेवा।
* 26 एंबुलेंस 108 सेवा की।
* 38 एंबुलेंस 102 सेवा की।
* 2 एंबुलेंस एएलएस श्रेणी की।