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तीन तलाक: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उलेमा असहमत
Updated Tue, 22 Aug 2017 10:32 PM IST
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देवरिया। तीन तलाक के मसले पर बहुप्रतीक्षित फैसला सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनाया। इसके चलते राजनीतिक हल्कों में हलचल मच गई है। फैसले के पक्ष और विपक्ष में राय दी गई। उलेमाओं ने सीधा कमेंट करने से इनकार कर दिया। कहा, जायज चीजों में अल्लाह को सबसे अधिक नापसंद तलाक है। संविधान ने जीवन गुजारने का अधिकार दिया है। कुरेदने पर बमुश्किल बोले, फैसले की कॉपी मिलने के बाद कुछ कहा जा सकता है।
जमीअत उलेमा-ए-हिंद के जिला सदर मौलाना अब्दुल बारी ने कहा कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसला की कॉपी मिलने के बाद कुछ कह सकता हूं। बकौल मौलाना बारी, मीडिया रिपोर्ट्स को मानें तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुस्लिम पर्सनल लॉ में सीधा दखल है। पूर्व सदर मौलाना नियाज अहमद कासमी ने बताया कि फैसले के बारे में जानकारी मिली है। कॉपी मिलने के बाद स्पष्ट तौर पर कुछ कह सकता हूं। मौलाना अब्दुल रहीम बरकाती ने कहा कि निकाह और तलाक इस्लामी कानून का हिस्सा हैं। जो कुरआन और हदीस के अनुसार अमल में आता है। आखिरी सांस तक मुसलमान उस पर जरूर अमल करेंगे। इसके खिलाफ फैसला मान्य नहीं है। मौलाना अब्दुल रहमान ने कहा कि तलाक अल्लाह को जायज कामों में नापसंदीदा अमल है। शरीयत के अनुसार तलाक दें। हालांकि इससे लोगों को बचने की जरूरत है।
वकीलों ने फैसले की सराहना की
देवरिया। अधिवक्ताओं की बैठक मंगलवार को दीवानी न्यायालय परिसर में हुई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना की गई। कहा कि महिलाओं को राहत मिलेगी। इस दौरान सुभाष चंद्र राव, लल्लन मिश्र, श्याम नारायण तिवारी, प्रमोद यादव, सत्यनारायण यादव, जन्मेजय मणि आदि रहे।
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जमीअत उलेमा-ए-हिंद के जिला सदर मौलाना अब्दुल बारी ने कहा कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसला की कॉपी मिलने के बाद कुछ कह सकता हूं। बकौल मौलाना बारी, मीडिया रिपोर्ट्स को मानें तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुस्लिम पर्सनल लॉ में सीधा दखल है। पूर्व सदर मौलाना नियाज अहमद कासमी ने बताया कि फैसले के बारे में जानकारी मिली है। कॉपी मिलने के बाद स्पष्ट तौर पर कुछ कह सकता हूं। मौलाना अब्दुल रहीम बरकाती ने कहा कि निकाह और तलाक इस्लामी कानून का हिस्सा हैं। जो कुरआन और हदीस के अनुसार अमल में आता है। आखिरी सांस तक मुसलमान उस पर जरूर अमल करेंगे। इसके खिलाफ फैसला मान्य नहीं है। मौलाना अब्दुल रहमान ने कहा कि तलाक अल्लाह को जायज कामों में नापसंदीदा अमल है। शरीयत के अनुसार तलाक दें। हालांकि इससे लोगों को बचने की जरूरत है।
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वकीलों ने फैसले की सराहना की
देवरिया। अधिवक्ताओं की बैठक मंगलवार को दीवानी न्यायालय परिसर में हुई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना की गई। कहा कि महिलाओं को राहत मिलेगी। इस दौरान सुभाष चंद्र राव, लल्लन मिश्र, श्याम नारायण तिवारी, प्रमोद यादव, सत्यनारायण यादव, जन्मेजय मणि आदि रहे।
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