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भाषा और क्षेत्र पर होती है सर्वाधिक राजनीति
Updated Wed, 10 Jan 2018 10:38 PM IST
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नागरी प्रचारिणी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। एमएलसी डॉ. अशोक बाजपेयी ने कहा कि पूरा देश एक भाषा की जरूरत तो महसूस करता है, लेकिन सर्वाधिक राजनीति भाषा और क्षेत्र को लेकर होती है। यह समाप्त होनी चाहिए। डॉ. बाजपेयी बुधवार को नागरी प्रचारिणी सभा में विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर डॉ. तेजेंद्र शर्मा को विश्व नागरी रत्न से सम्मानित किया गया।
डॉ तेजेंद्र शर्मा ने कहा कि हिंदी भाषा और नागरी लिपि का स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सच में भाषा एक सशक्त हथियार है। हमें गर्व हैं कि हमारे पास एक ऐसी भाषा हैं जो प्रेम और समरसता के गुणों से ओत-प्रोत है। उन्होंने कहा कि जिस देश की कोई भाषा नहीं होती, उस देश की पहचान नहीं होती। लखनऊ विवि के विधिवेता नरेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि जब मुगल साम्राज्य अपने उफान पर था, तब तुलसी ने मानस महाकाव्य के जरिए हिंदी को जन-जन तक पहुंचाया था। दुर्भाग्य यह है कि आजाद भारत में हिंदी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। आचार्य परमेश्वर जोशी ने कहा कि कठिन परिश्रम और लगन से हम हिंदी को आगे की ओर ले जा रहे हैं। नागरी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष सुधाकर मणि त्रिपाठी ने कहा कि हम सतत संघर्षशील हैं कि नागरी लिपि और हिंदी मुकाम हासिल करें। कार्यक्रम का संचालन इंद्रकुमार दीक्षित ने किया। इस दौरान बृजेश पांडेय, दुर्गाधर द्विवेदी, जयनाथ मणि त्रिपाठी, संजय राव, अंतर्यामी सिंह, पवन कुमार मिश्र, अनिल कुमार त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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डॉ तेजेंद्र शर्मा ने कहा कि हिंदी भाषा और नागरी लिपि का स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सच में भाषा एक सशक्त हथियार है। हमें गर्व हैं कि हमारे पास एक ऐसी भाषा हैं जो प्रेम और समरसता के गुणों से ओत-प्रोत है। उन्होंने कहा कि जिस देश की कोई भाषा नहीं होती, उस देश की पहचान नहीं होती। लखनऊ विवि के विधिवेता नरेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि जब मुगल साम्राज्य अपने उफान पर था, तब तुलसी ने मानस महाकाव्य के जरिए हिंदी को जन-जन तक पहुंचाया था। दुर्भाग्य यह है कि आजाद भारत में हिंदी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। आचार्य परमेश्वर जोशी ने कहा कि कठिन परिश्रम और लगन से हम हिंदी को आगे की ओर ले जा रहे हैं। नागरी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष सुधाकर मणि त्रिपाठी ने कहा कि हम सतत संघर्षशील हैं कि नागरी लिपि और हिंदी मुकाम हासिल करें। कार्यक्रम का संचालन इंद्रकुमार दीक्षित ने किया। इस दौरान बृजेश पांडेय, दुर्गाधर द्विवेदी, जयनाथ मणि त्रिपाठी, संजय राव, अंतर्यामी सिंह, पवन कुमार मिश्र, अनिल कुमार त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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