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सरकार के फैसले पर भड़के कर्मचारी
Updated Thu, 13 Jul 2017 10:31 PM IST
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देवरिया। 50 साल से ऊपर के राज्य कर्मचारियों की स्क्रीनिंग कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के सरकार के फैसले ने कर्मचारियों को आगबबूला कर दिया है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने फैसले को कर्मचारी विरोधी बताया। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करने की बात कही। सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी।
संगठन के पदाधिकारियों की बैठक गुरुवार को कैंप कार्यालय पर हुई। जिलाध्यक्ष रामायण राय ने कहा कि वर्तमान में सरकार के पास कार्य कुशलता मापने के लिए कोई यंत्र तक नहीं है। सभी जानते हैं कि अधिकांश वार्षिक प्रविष्ठियां और मानदेय अधिकारियों के आदेशों को आंख बंदकर मानने वालों को दी जाती है। नियमों के अनुसार काम करने वाले कर्मचारियों की कैरेक्टर रोल खराब कर प्रताड़ित किया जाता है। ऐसे में नियमों के तहत काम करने वाले कर्मचारियों पर गाज गिरना तय है। मंत्री केशव सिंह ने कहा कि यह दो दशक से अधिक समय का पुराना शासनादेश है, जिसे सरकार ने 100 दिनों में दो बार जारी किया है। उन्होंने कहा कि 40 बरस में नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को 10 साल की सेवा के बाद ही सेवानिवृत्त करने का प्राविधान कहां तक जायज है। इस फैसले से प्रदेश के अनुसूचित और जनजाति के कर्मचारियों को सबसे अधिक नुकसान होगा। अजय कुमार सिंह, शांति स्वरूप तिवारी ने कहा कि कर्मचारियों का उत्पीड़न करने वाली सरकारें अधिक दिन चल नहीं पाती हैं। सुनील सिंह उमेश पांडेय ने कहा कि अब समय आ गया है सरकार के खिलाफ आरपार का आंदोलन शुरू करने का। इस दौरान लीलावती सिंह, विंदा देवी, रामअशीष चौरसिया, मनोज श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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संगठन के पदाधिकारियों की बैठक गुरुवार को कैंप कार्यालय पर हुई। जिलाध्यक्ष रामायण राय ने कहा कि वर्तमान में सरकार के पास कार्य कुशलता मापने के लिए कोई यंत्र तक नहीं है। सभी जानते हैं कि अधिकांश वार्षिक प्रविष्ठियां और मानदेय अधिकारियों के आदेशों को आंख बंदकर मानने वालों को दी जाती है। नियमों के अनुसार काम करने वाले कर्मचारियों की कैरेक्टर रोल खराब कर प्रताड़ित किया जाता है। ऐसे में नियमों के तहत काम करने वाले कर्मचारियों पर गाज गिरना तय है। मंत्री केशव सिंह ने कहा कि यह दो दशक से अधिक समय का पुराना शासनादेश है, जिसे सरकार ने 100 दिनों में दो बार जारी किया है। उन्होंने कहा कि 40 बरस में नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को 10 साल की सेवा के बाद ही सेवानिवृत्त करने का प्राविधान कहां तक जायज है। इस फैसले से प्रदेश के अनुसूचित और जनजाति के कर्मचारियों को सबसे अधिक नुकसान होगा। अजय कुमार सिंह, शांति स्वरूप तिवारी ने कहा कि कर्मचारियों का उत्पीड़न करने वाली सरकारें अधिक दिन चल नहीं पाती हैं। सुनील सिंह उमेश पांडेय ने कहा कि अब समय आ गया है सरकार के खिलाफ आरपार का आंदोलन शुरू करने का। इस दौरान लीलावती सिंह, विंदा देवी, रामअशीष चौरसिया, मनोज श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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