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सपा समर्थित दलित ब्लॉक प्रमुख क्यो, उठ रहे सवाल
Updated Mon, 10 Jul 2017 10:39 PM IST
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आसिफ इकबाल
देवरिया। सपा समर्थित दलित ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर चर्चाओं का माहौल है। राजनीतिक हलकों में इसके निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बसपा के दलित ब्लॉक प्रमुख पर अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाना रणनीति का हिस्सा है। ताकि दलितों के बीच पैठ बनी रही। चर्चा है कि बैकडोर से सपा की एकजुटता को भी मापा जा रहा है।
देवरिया, गौरीबाजार और भलुअनी अनुसूचित जाति, जबकि बनकटा अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित है। देवरिया में पूनम देवी और भलुअनी में ज्ञानमती सपा समर्थित हैं। गौरीबाजार में बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर सुधीर भारती की पत्नी नीलम चंदेल ब्लॉक प्रमुख हैं। दो-दो जगहों पर ब्राह्मण और क्षत्रिय के अलावा एक जगह भूमिहार ब्लॉक प्रमुख है। शेष आठ जगहों पर जाति विशेष के लोगों का कब्जा है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद अविश्वास प्रस्ताव का डर सताने लगा। हालांकि ब्लॉक प्रमुखों ने भाजपा के नेताओं से करीबी रिश्ते बना लिए। इसके चलते हरी झंडी नहीं मिल सकी। फिलहाल कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों के मुद्दे पर सपा, प्रदेश सरकार पर हमलावर है। बसपा भी दलितों के मामले को लेकर सवाल खड़ा कर रही है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने एक रणनीति अपनाई हैै। सपा समर्थित अनुसूचित जाति के ब्लॉक प्रमुख को पहले चरण में निशाना बनाया जाए। देवरिया की सपा समर्थित पूनम देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव इसी एक हिस्सा है। सपाइयों की एकजुटता और दलित प्रेम को परखा जा सके, क्योंकि अस्तित्व के लिए जूझ रही बसपा को संजीवनी न मिल सके।
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देवरिया। सपा समर्थित दलित ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर चर्चाओं का माहौल है। राजनीतिक हलकों में इसके निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बसपा के दलित ब्लॉक प्रमुख पर अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाना रणनीति का हिस्सा है। ताकि दलितों के बीच पैठ बनी रही। चर्चा है कि बैकडोर से सपा की एकजुटता को भी मापा जा रहा है।
देवरिया, गौरीबाजार और भलुअनी अनुसूचित जाति, जबकि बनकटा अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित है। देवरिया में पूनम देवी और भलुअनी में ज्ञानमती सपा समर्थित हैं। गौरीबाजार में बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर सुधीर भारती की पत्नी नीलम चंदेल ब्लॉक प्रमुख हैं। दो-दो जगहों पर ब्राह्मण और क्षत्रिय के अलावा एक जगह भूमिहार ब्लॉक प्रमुख है। शेष आठ जगहों पर जाति विशेष के लोगों का कब्जा है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद अविश्वास प्रस्ताव का डर सताने लगा। हालांकि ब्लॉक प्रमुखों ने भाजपा के नेताओं से करीबी रिश्ते बना लिए। इसके चलते हरी झंडी नहीं मिल सकी। फिलहाल कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों के मुद्दे पर सपा, प्रदेश सरकार पर हमलावर है। बसपा भी दलितों के मामले को लेकर सवाल खड़ा कर रही है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने एक रणनीति अपनाई हैै। सपा समर्थित अनुसूचित जाति के ब्लॉक प्रमुख को पहले चरण में निशाना बनाया जाए। देवरिया की सपा समर्थित पूनम देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव इसी एक हिस्सा है। सपाइयों की एकजुटता और दलित प्रेम को परखा जा सके, क्योंकि अस्तित्व के लिए जूझ रही बसपा को संजीवनी न मिल सके।
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