{"_id":"5967a7764f1c1b9e188b462f","slug":"61499965302-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश ने लाई किसानों के चेहरे पर चमक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश ने लाई किसानों के चेहरे पर चमक
Updated Thu, 13 Jul 2017 10:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवरिया। बारिश ने धान की खेती करने वाले किसानों के चेहरे पर चमक ला दी है। खासकर कम पूंजी वाले किसान इंद्रदेव की मेहरबानी से खुश हैं। यह बारिश धान की रोपाई के लिए बेहतर है तो अरहर, मक्का और तिल के के लिए नुकसानदायक। बारिश ने किसानों को तो खुशियां दी है, साथ ही नदियों के किनारे बस किसानों को दर्द भी। नदियों की गरजना से उन्हें बाढ़ का खतरा भी सता रहा है।
करीब एक सप्ताह से जिले में झमाझम बारिश हो रही है। इसके पहले आसमान ताक रहे किसान बारिश शुरू होते ही खेतों की हालत लेने निकल पड़े। खेतों में पानी लगते ही धान की रोपाई भी शुरू हो गई। आलम यह है कि धान की रोपाई के लिए मजदूरों का टोटा पड़ गया। ऐसे में मजदूरों की चांदी है। डीजल खरीदकर खेतों में पानी भरने में अक्षम किसान इंद्रदेव की मेहरबानी पर फूले नहीं समा रहे हैं। रुद्रपुर के पिरानी गांव के दीपचंद्र यादव ने कहा कि समतल खेतों के लिए बारिश फायदेमंद है। जबकि गड्ढा युक्त खेतों में यदि पानी अधिक दिनों तक जमा रहा तो फसल को नुकसान पहुंचेगा। बरहज के कपरवार निवासी सुदामा सिंह ने कहा कि धान की रोपाई के लिए बारिश अच्छी है। पैना के अशोक सिंह और भलुअनी के अयोध्या मिश्र ने कहा कि अरहर, मक्का और तिल के लिए बारिश नुकसानदेय है। किसानों की मानें तो इस बार उन्हें बीज-खाद के लिए भटकना नहीं पड़ा। साधन सहकारी समितियाें पर पर्याप्त मात्रा में बीज-खाद उपलब्ध था, लेकिन दिक्कत सिर्फ एक थी की धान की सिर्फ दो प्रजातियों के धान के बीज थे। ऐसे में अच्छे किस्म की धान पैदा करने वाले किसानों को खुले बाजार से बीच खरीदना पड़ा।
विज्ञापन
करीब एक सप्ताह से जिले में झमाझम बारिश हो रही है। इसके पहले आसमान ताक रहे किसान बारिश शुरू होते ही खेतों की हालत लेने निकल पड़े। खेतों में पानी लगते ही धान की रोपाई भी शुरू हो गई। आलम यह है कि धान की रोपाई के लिए मजदूरों का टोटा पड़ गया। ऐसे में मजदूरों की चांदी है। डीजल खरीदकर खेतों में पानी भरने में अक्षम किसान इंद्रदेव की मेहरबानी पर फूले नहीं समा रहे हैं। रुद्रपुर के पिरानी गांव के दीपचंद्र यादव ने कहा कि समतल खेतों के लिए बारिश फायदेमंद है। जबकि गड्ढा युक्त खेतों में यदि पानी अधिक दिनों तक जमा रहा तो फसल को नुकसान पहुंचेगा। बरहज के कपरवार निवासी सुदामा सिंह ने कहा कि धान की रोपाई के लिए बारिश अच्छी है। पैना के अशोक सिंह और भलुअनी के अयोध्या मिश्र ने कहा कि अरहर, मक्का और तिल के लिए बारिश नुकसानदेय है। किसानों की मानें तो इस बार उन्हें बीज-खाद के लिए भटकना नहीं पड़ा। साधन सहकारी समितियाें पर पर्याप्त मात्रा में बीज-खाद उपलब्ध था, लेकिन दिक्कत सिर्फ एक थी की धान की सिर्फ दो प्रजातियों के धान के बीज थे। ऐसे में अच्छे किस्म की धान पैदा करने वाले किसानों को खुले बाजार से बीच खरीदना पड़ा।
विज्ञापन