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गलती करने वालों को दी गई जांच की जिम्मेदारी
Updated Fri, 22 Sep 2017 11:31 PM IST
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देवरिया। अफसर अपनी कमियों को छिपाते हुए जांच रिपोर्ट तैयार करने की कोशिश में लगे हैं। जांच में विलंब होने की यही वजह बताई जा रही है। डीआईओएस ने विभाग के उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दिया है। अभी तक की जांच रिपोर्ट जो आई है उसमें जानकारी हुआ है कि सिर्फ माध्यमिक विद्यालय की मान्यता अवैध है, जबकि प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय की जमीन पर स्कूल के बजाए हॉस्टल का निर्माण हुआ है। इसलिए इनकी मान्यता निरस्त की कार्रवाई होगी।
नेहरू नगर के मॉडर्न सिटी इंटरमीडिएट कॉलेज में चकियवा मोहल्ले की नीतू चौहान कक्षा नौंवीं में पढ़ती थी। 18 सितंबर को किसी ने कॉलेज के तीन मंजिल छत से धक्का दे दिया। रहस्यमय तरीके से मौत के मुंह में समाई छात्रा की हत्या की वजहों से अभी पर्दा नहीं उठ सका है, लेकिन डीएम के निर्देश पर कॉलेज की मान्यता और मानकों की जांच में लगी तीन सदस्यीय टीम को कदम-कदम पर कमी मिली है। एक ही कैैंपस में संचालित हो रहे प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और माध्यमिक विद्यालय एक ही अराजी संख्या वाली जमीन पर चल रहा था। प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय की मान्यता में जिस अराजी संख्या की खतौनी लगी है, वहां पर छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल का निर्माण हुआ है। इसके अलावा जांच में बेसिक स्तर पर कई और खामियां उजागर हुई है। जांच टीम में शामिल एसडीएम राकेश सिंह, डीआईओएस शिवचंद्र और बीएसए उपेंद्र कुमार शामिल हैं। जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपने में देरी की वजह खुद के बचाव को देखते हुए रिपोर्ट तैयार करने की बात कही जा रही है। अगर साक्ष्यों व हकीकत को छिपाकर कॉलेज की मान्यता जारी किया गया और बीच-बीच में होने वाली जांच में मानकों की अनदेखी की गई। इसके जिम्मेदार बीएसए और डीआईओएस है। कॉलेज प्रशासन के साथ-साथ जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
वर्ष 1999 में हाईस्कूल और 2002 में इंटर की मान्यता मॉडर्न सिटी इंटरमीडिएट कॉलेज को मिली थी। एसडीएम राकेश सिंह ने बताया कि जहां विद्यालय संचालित होता है। उस जमीन वाली अराजी नंबर पर सिर्फ माध्यमिक विद्यालय की मान्यता है। अन्य दो विद्यालयों की मान्यता जिस जमीन पर ली गई है। वहां छात्रावास बना है। इसकी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी गई है। कार्रवाई उनके स्तर से होना है।
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नेहरू नगर के मॉडर्न सिटी इंटरमीडिएट कॉलेज में चकियवा मोहल्ले की नीतू चौहान कक्षा नौंवीं में पढ़ती थी। 18 सितंबर को किसी ने कॉलेज के तीन मंजिल छत से धक्का दे दिया। रहस्यमय तरीके से मौत के मुंह में समाई छात्रा की हत्या की वजहों से अभी पर्दा नहीं उठ सका है, लेकिन डीएम के निर्देश पर कॉलेज की मान्यता और मानकों की जांच में लगी तीन सदस्यीय टीम को कदम-कदम पर कमी मिली है। एक ही कैैंपस में संचालित हो रहे प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और माध्यमिक विद्यालय एक ही अराजी संख्या वाली जमीन पर चल रहा था। प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय की मान्यता में जिस अराजी संख्या की खतौनी लगी है, वहां पर छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल का निर्माण हुआ है। इसके अलावा जांच में बेसिक स्तर पर कई और खामियां उजागर हुई है। जांच टीम में शामिल एसडीएम राकेश सिंह, डीआईओएस शिवचंद्र और बीएसए उपेंद्र कुमार शामिल हैं। जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपने में देरी की वजह खुद के बचाव को देखते हुए रिपोर्ट तैयार करने की बात कही जा रही है। अगर साक्ष्यों व हकीकत को छिपाकर कॉलेज की मान्यता जारी किया गया और बीच-बीच में होने वाली जांच में मानकों की अनदेखी की गई। इसके जिम्मेदार बीएसए और डीआईओएस है। कॉलेज प्रशासन के साथ-साथ जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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वर्ष 1999 में हाईस्कूल और 2002 में इंटर की मान्यता मॉडर्न सिटी इंटरमीडिएट कॉलेज को मिली थी। एसडीएम राकेश सिंह ने बताया कि जहां विद्यालय संचालित होता है। उस जमीन वाली अराजी नंबर पर सिर्फ माध्यमिक विद्यालय की मान्यता है। अन्य दो विद्यालयों की मान्यता जिस जमीन पर ली गई है। वहां छात्रावास बना है। इसकी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी गई है। कार्रवाई उनके स्तर से होना है।
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