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नहरों की नालियां बन गईं चकरोड
Updated Thu, 21 Dec 2017 10:57 PM IST
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देवरिया। नहरों की नालियां कभी किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने का आधार होती थीं। अब ऐसा नहीं है। अधिकांश नालियों को लोगों ने पाट रखा है। कहीं चकरोड बन गए हैं तो कहीं खेत। नहर में पानी आने के बावजूद नालियों के अभाव में खेतों में पानी नहीं पहुंच पाता है। कहीं-कहीं नालियों की लंबाई दो से तीन किलोमीटर तक है। चौड़ाई भी कम नहीं है। पहले नहरों की तरह ही नालियों की भी सफाई हुआ करती थी, अब ऐसा नहीं है। देसही देवरिया ब्लॉक में न नहरों की कमी है और न ही उससे निकली नालियों की। मगर विभागीय उदासीनता से नहर से जुड़ी नालियों का अस्तित्व खतरे में है। किसानों के खेतों के सिंचाई का जरिया नहरों की नालियां ही हैं। नहर से पानी निकलकर इसके जरिए दो से तीन किलोमीटर दूर तक खेतों मेें पहुंचता है।
नहर से सटे किसान जैसे-तैसे खेतों की सिंचाई कर लेते हैं, लेकिन दूर वाले किसानों के समक्ष मुसीबत है। वे नहर के पानी का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में महंगा डीजल खरीदकर किसानों को खेतों की सिंचाई करनी पड़ती है। पैसे के इंतजाम में कमजोर किसान खेतों की सिंचाई समय से नहीं कर पाते हैं। नालियों पर जगह-जगह पक्के पुलिया भी बने थे, ताकि गांव के लोगों आने-जाने में दिक्कत न हो। खेत तक आसानी से ट्रैक्टर पहुंच जाए। हर नालियों में नहर से पांच मीटर तक पक्की नाली भी बनी थी। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि पानी के दबाव में नालियां टूट न जाएं। नालियों के ईंट गायब हो चुके हैं। पैमाइश के दौरान मामला सामने आने पर संबंधित लेखपाल किसानों को नालियों से कब्जा हटाने की हिदायत भी देते हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं होता।
नालियों का रखरखाव करीब पांच साल से विभाग के पास नहीं है। संबंधित ग्राम प्रधान ही नालियों का रखरखाव कराते हैं। विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ नहर के पाइप तक ही है। नहरों से जुड़ी नालियों में पानी जाता है या नहीं यह देखने का कार्य ग्राम पंचायत का है।
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पंकज सिंह, एक्सईएन सिंचाई विभाग
नालियां चालू हो जाएं तो नहीं कटेंगी नहरें
सिंचाई विभाग यदि नहरों से जुड़ी नालियों को चालू करा दे तो नहरें कटने से बच जाएंगी। नालियों में पानी न आने पर फसलों को सूखता देख किसान नहरों को जगह-जगह काट देते हैं ताकि उनकी फसल हरा-भरा रहे। खेतों में अधिक पानी पहुंच जाने से फसलें भी बर्बाद हो जाती हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। कटने के बाद नहरों के आसपास पानी भी जमा हो जाते हैं। किसानों को आने-जाने में दिक्कत होने लगती है। नहर मरम्मत में 10 से 15 दिन लग जाते हैं। ऐसे में किसानों समेत अन्य राहगीरों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
ग्रामीण बोले, आना चाहिए पानी
महुआबी के किसान बृजवासी का कहना है कि पहले नहरों से जुड़ीं नालियां भी पानी से लबालब हुआ करते थे। किसान जरूरत के हिसाब से खेतों की सिंचाई कर लेते थे। अब ऐसा नहीं है। नालियों में पानी आने का यदि इंतजार किया जाए तो खेत सूख जाएंगे। जिगनी बाजार के किसान नागेंद्र ने बताया कि नालियों के माध्यम से आखिरी छोर तक पानी पहुंच जाता था। इसका अस्तित्व खत्म होने से समस्या खड़ी हो गई है। पकड़ी बुजुर्ग के नंदलाल ने बताया कि नालियों की पटाई हो जाने से किसानों को आने-जाने के लिए चकरोड तो मिल गए, लेकिन सिंचाई का माध्यम छीन गया। सहोदरपट्टी के किसान मनोज ने बताया कि नालियों के पट जाने से सिंचाई के समय पानी खेतों तक पहुंचाने को लेकर किसानों के बीच में अक्सर मारपीट तक हो जाती है।
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नहर से सटे किसान जैसे-तैसे खेतों की सिंचाई कर लेते हैं, लेकिन दूर वाले किसानों के समक्ष मुसीबत है। वे नहर के पानी का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में महंगा डीजल खरीदकर किसानों को खेतों की सिंचाई करनी पड़ती है। पैसे के इंतजाम में कमजोर किसान खेतों की सिंचाई समय से नहीं कर पाते हैं। नालियों पर जगह-जगह पक्के पुलिया भी बने थे, ताकि गांव के लोगों आने-जाने में दिक्कत न हो। खेत तक आसानी से ट्रैक्टर पहुंच जाए। हर नालियों में नहर से पांच मीटर तक पक्की नाली भी बनी थी। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि पानी के दबाव में नालियां टूट न जाएं। नालियों के ईंट गायब हो चुके हैं। पैमाइश के दौरान मामला सामने आने पर संबंधित लेखपाल किसानों को नालियों से कब्जा हटाने की हिदायत भी देते हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं होता।
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नालियों का रखरखाव करीब पांच साल से विभाग के पास नहीं है। संबंधित ग्राम प्रधान ही नालियों का रखरखाव कराते हैं। विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ नहर के पाइप तक ही है। नहरों से जुड़ी नालियों में पानी जाता है या नहीं यह देखने का कार्य ग्राम पंचायत का है।
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पंकज सिंह, एक्सईएन सिंचाई विभाग
नालियां चालू हो जाएं तो नहीं कटेंगी नहरें
सिंचाई विभाग यदि नहरों से जुड़ी नालियों को चालू करा दे तो नहरें कटने से बच जाएंगी। नालियों में पानी न आने पर फसलों को सूखता देख किसान नहरों को जगह-जगह काट देते हैं ताकि उनकी फसल हरा-भरा रहे। खेतों में अधिक पानी पहुंच जाने से फसलें भी बर्बाद हो जाती हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। कटने के बाद नहरों के आसपास पानी भी जमा हो जाते हैं। किसानों को आने-जाने में दिक्कत होने लगती है। नहर मरम्मत में 10 से 15 दिन लग जाते हैं। ऐसे में किसानों समेत अन्य राहगीरों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
ग्रामीण बोले, आना चाहिए पानी
महुआबी के किसान बृजवासी का कहना है कि पहले नहरों से जुड़ीं नालियां भी पानी से लबालब हुआ करते थे। किसान जरूरत के हिसाब से खेतों की सिंचाई कर लेते थे। अब ऐसा नहीं है। नालियों में पानी आने का यदि इंतजार किया जाए तो खेत सूख जाएंगे। जिगनी बाजार के किसान नागेंद्र ने बताया कि नालियों के माध्यम से आखिरी छोर तक पानी पहुंच जाता था। इसका अस्तित्व खत्म होने से समस्या खड़ी हो गई है। पकड़ी बुजुर्ग के नंदलाल ने बताया कि नालियों की पटाई हो जाने से किसानों को आने-जाने के लिए चकरोड तो मिल गए, लेकिन सिंचाई का माध्यम छीन गया। सहोदरपट्टी के किसान मनोज ने बताया कि नालियों के पट जाने से सिंचाई के समय पानी खेतों तक पहुंचाने को लेकर किसानों के बीच में अक्सर मारपीट तक हो जाती है।