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बड़े दिन की पहली सुबह छाया रहा कोहरा
Updated Mon, 25 Dec 2017 10:30 PM IST
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देवरिया। बड़ा दिन यानी क्रिसमस की पहली सुबह कोहरे की चादर से ढकी रही। सूर्य देव के दर्शन दिन में एक बजे के बाद हुए। इससे खुले आसमान के नीचे रहने वालों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। डीएम ने अलाव जलाने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद कहीं अलाव जलते नहीं दिख रहे हैं। हां, रैनबसेरा जरूर बन गया है। बस स्टेशन परिसर के अंदर बने रैनबसेरा में चादर तो बिछा दी गई है, लेकिन गद्दा और रजाई नहीं है।
शनिवार तक मौसम खुशगवार था। रविवार से मौसम ने बेरुखी दिखानी शुरू कर दी है। रात में अचानक ठंड में इजाफा हो गया। सोमवार की सुबह जब लोगों की नींद खुली तो घना कोहरा छाया था। ठंड के कारण महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ठंड में ही घर के कामकाज निपटाने पड़े। दिन में एक बजे तक कोहरा छाया रहा। इसके बाद ही सूर्यदेव ने दर्शन दिया। धूप में तपिश नहीं होने से लोग ठिठुरते रहे। रविवार की रात उनके लिए दुखदायी रही। किसी ने टॉयर जलाकर ठंड से निजात पाने की कोशिश की तो किसी ने सड़क के किनारे कागज और रद्दी जलाकर काम चलाया। रेलवे स्टेशन परिसर में रात गुजारने वाले एक रिक्शा चालक ने बताया कि पहले ठंड की शुरुआत होते ही रैनबसेरा बना दिया जाता था। इस बार रैनबसेरा बनवाने में भी देरी की गई। नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष अलका सिंह ने कहा कि रैनबसेरा बनवा दिए हैं, अलाव जलाए जा रहे हैं। जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी अलाव की संख्या में इजाफा किया जाएगा।
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शनिवार तक मौसम खुशगवार था। रविवार से मौसम ने बेरुखी दिखानी शुरू कर दी है। रात में अचानक ठंड में इजाफा हो गया। सोमवार की सुबह जब लोगों की नींद खुली तो घना कोहरा छाया था। ठंड के कारण महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ठंड में ही घर के कामकाज निपटाने पड़े। दिन में एक बजे तक कोहरा छाया रहा। इसके बाद ही सूर्यदेव ने दर्शन दिया। धूप में तपिश नहीं होने से लोग ठिठुरते रहे। रविवार की रात उनके लिए दुखदायी रही। किसी ने टॉयर जलाकर ठंड से निजात पाने की कोशिश की तो किसी ने सड़क के किनारे कागज और रद्दी जलाकर काम चलाया। रेलवे स्टेशन परिसर में रात गुजारने वाले एक रिक्शा चालक ने बताया कि पहले ठंड की शुरुआत होते ही रैनबसेरा बना दिया जाता था। इस बार रैनबसेरा बनवाने में भी देरी की गई। नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष अलका सिंह ने कहा कि रैनबसेरा बनवा दिए हैं, अलाव जलाए जा रहे हैं। जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी अलाव की संख्या में इजाफा किया जाएगा।
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