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डीएम से मुलाकात में देरी पर गांव वाले हुए उग्र,नोंकझोंक
Updated Mon, 09 Oct 2017 10:35 PM IST
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देवरिया। निलंबित कोटे की दुकान बहाल होने से नाराज रुद्रपुर के खोपा और लीलापुर भैंसहा गांव के लोग डीएम से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंचे। मुलाकात में देरी होने पर धरने पर बैठ गए। डीएम कार्यालय से निकले तो लोगों ने जबरन गाड़ी रोक ली। लोगों का तेवर देख डीएम को दूसरी गाड़ी से जाना पड़ा। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को हटाया। नाराज लोगों और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई। पुलिस खोपा गांव के प्रधान समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया है।
रुद्रपुर ब्लॉक के खोपा और लीलापुर भैंसहा गांव के कोटेदार सुदामा जायसवाल थे। छह माह पहले अनियमितता के आरोप में कोटे की दुकान निलंबित हो गई। दो दिन पहले एसडीएम ने सुदामा की दुकान को बहाल कर दिया। गांववालों का आरोप है कि मंत्री के दबाव में रुद्रपुर एसडीएम ने बिना जांच कराए दुकान बहाल किया है। इससे नाराज गांव के पुरुष और महिलाएं प्रधान अशोक यादव के नेतृत्व में सोमवार को ट्रॉली-ट्रैक्टर से रुद्रपुर तहसील पहुंचे। वहां सुनवाई नहीं हुई तो गांववाले डीएम से मिलने 11.30 बजे कलेक्ट्रेट चले आए। सदर एसडीएम राकेश सिंह ने डीएम से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया। कुछ देर इंतजार के बाद डीएम नहीं मिले तो लोग धरने पर बैठ गए। एक घंटे बाद किसी जरूरी काम से जाने के लिए डीएम बाहर निकले। यह देख गांववाले नारेबाजी करते हुए उनकी गाड़ी को घेर लिया। वहां मौजूद सिपाही मूकदर्शक बने रहे। मामला बढ़ता देख डीएम दूसरे गाड़ी से रास्ता बदलकर चले गए। इसके बाद कोतवाली पुलिस और क्यूआरटी पहुंची और लोगों को खदेड़ा। कलेक्ट्रेट में पूर्वांचल बैंक के पास महिलाएं धरने पर बैठ गईं। पुलिस ने प्रधान अशोक, गुलशन, सिकंदर, अजय निषाद और रामचंद्र को हिरासत में ले लिया। पुलिस को चकमा देकर सिकंदर और रामचंद्र भाग गए। कुछ देर बाद डीएम कार्यालय आए तो सदर एसडीएम ने ग्राम प्रधान, गुलशन और अजय निषाद को पेश किया। डीएम ने प्रधान को हिदायत देते हुए कहा कि प्रधानी तो अभी दो साल हुई है, लेकिन अब तुम्हारी प्रधानी नहीं चलने दूंगा। डीएम सुजीत कुमार ने कहा कि गाड़ी घेरने की बात अफवाह है। वार्ता के लिए प्रधान को बुलाया था। एसडीएम को उपद्रव मचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। सदर कोतवाल नीतीश श्रीवास्तव ने बताया कि तीन लोग हिरासत में लिए गए हैं। उच्चधिकारियों के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रधान की बात नहीं माने गांववाले
जिले के आला अफसर के सामने खोपा गांव के लोगों की हरकत देख कलेक्ट्रेट के कर्मचारी दंग रह गए। निर्भीक महिलाएं और पुरुष रुद्रपुर तहसील प्रशासन पर रकम लेकर कोटे की दुकान बहाल करने का आरोप लगा रहे थे। मामला बढ़ने के बाद ग्राम प्रधान ने लोगों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन उग्र लोग उनकी भी बात मानने को तैयार नहीं थे। खोपा गांव की महिलाएं पुरुषों से ज्यादा गुस्से में दिखी। एक बुजुर्ग महिला पुलिस और एसडीएम से खूब सवाल कर रही थीं। महिलाओं ने सत्ता पक्ष के एक मंत्री को भला बुरा भी कहा।
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रुद्रपुर ब्लॉक के खोपा और लीलापुर भैंसहा गांव के कोटेदार सुदामा जायसवाल थे। छह माह पहले अनियमितता के आरोप में कोटे की दुकान निलंबित हो गई। दो दिन पहले एसडीएम ने सुदामा की दुकान को बहाल कर दिया। गांववालों का आरोप है कि मंत्री के दबाव में रुद्रपुर एसडीएम ने बिना जांच कराए दुकान बहाल किया है। इससे नाराज गांव के पुरुष और महिलाएं प्रधान अशोक यादव के नेतृत्व में सोमवार को ट्रॉली-ट्रैक्टर से रुद्रपुर तहसील पहुंचे। वहां सुनवाई नहीं हुई तो गांववाले डीएम से मिलने 11.30 बजे कलेक्ट्रेट चले आए। सदर एसडीएम राकेश सिंह ने डीएम से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया। कुछ देर इंतजार के बाद डीएम नहीं मिले तो लोग धरने पर बैठ गए। एक घंटे बाद किसी जरूरी काम से जाने के लिए डीएम बाहर निकले। यह देख गांववाले नारेबाजी करते हुए उनकी गाड़ी को घेर लिया। वहां मौजूद सिपाही मूकदर्शक बने रहे। मामला बढ़ता देख डीएम दूसरे गाड़ी से रास्ता बदलकर चले गए। इसके बाद कोतवाली पुलिस और क्यूआरटी पहुंची और लोगों को खदेड़ा। कलेक्ट्रेट में पूर्वांचल बैंक के पास महिलाएं धरने पर बैठ गईं। पुलिस ने प्रधान अशोक, गुलशन, सिकंदर, अजय निषाद और रामचंद्र को हिरासत में ले लिया। पुलिस को चकमा देकर सिकंदर और रामचंद्र भाग गए। कुछ देर बाद डीएम कार्यालय आए तो सदर एसडीएम ने ग्राम प्रधान, गुलशन और अजय निषाद को पेश किया। डीएम ने प्रधान को हिदायत देते हुए कहा कि प्रधानी तो अभी दो साल हुई है, लेकिन अब तुम्हारी प्रधानी नहीं चलने दूंगा। डीएम सुजीत कुमार ने कहा कि गाड़ी घेरने की बात अफवाह है। वार्ता के लिए प्रधान को बुलाया था। एसडीएम को उपद्रव मचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। सदर कोतवाल नीतीश श्रीवास्तव ने बताया कि तीन लोग हिरासत में लिए गए हैं। उच्चधिकारियों के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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प्रधान की बात नहीं माने गांववाले
जिले के आला अफसर के सामने खोपा गांव के लोगों की हरकत देख कलेक्ट्रेट के कर्मचारी दंग रह गए। निर्भीक महिलाएं और पुरुष रुद्रपुर तहसील प्रशासन पर रकम लेकर कोटे की दुकान बहाल करने का आरोप लगा रहे थे। मामला बढ़ने के बाद ग्राम प्रधान ने लोगों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन उग्र लोग उनकी भी बात मानने को तैयार नहीं थे। खोपा गांव की महिलाएं पुरुषों से ज्यादा गुस्से में दिखी। एक बुजुर्ग महिला पुलिस और एसडीएम से खूब सवाल कर रही थीं। महिलाओं ने सत्ता पक्ष के एक मंत्री को भला बुरा भी कहा।
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