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हथुआ-भटनी परियोजना को रद्द करे सरकार
Updated Mon, 15 Oct 2018 10:37 PM IST
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भटनी हथुआ रेल मार्ग के विरोध में भटनी के किसानो ने जिलाधिकारी को मांग पत्र दिया।
- फोटो : amarujala
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देवरिया। हथुआ से भटनी जंक्शन के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन के विरोध में किसानों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। परियोजना को किसान विरोधी बताते हुए इसके विरोध की बात कही। इसे रद्द कराने की मांग की।
छह सूत्री ज्ञापन के जरिए किसानों का कहना था कि वर्ष 2005-06 में योजना आयोग ने देवरिया से हथुआ के बीच रेल लाइन को स्वीकृति दी, लेकिन पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने फर्जी अभ्यावेदनों के आधार पर निजी हित में इसे हथुआ से भटनी जंक्शन तक करा दिया। उनका मकसद किसानों का हित नहीं बल्कि अपने गांव, ससुराल और अन्य रिश्तेदारों के गांव को जोड़ना था। हथुआ से भटनी की दूरी सड़क मार्ग से 40 किमी है, जबकि रेलमार्ग से यह दूरी 80 किमी हो जाएगी। इस रेलमार्ग के लिए किसानों की करीब 112.49 एकड़ भूमि अधिग्रहित हो रही है। इससे करीब एक हजार लघु सीमांत किसान प्रभावित हो रहे हैं। यह सभी किसान भूमिहीन हो जाएंगे। भटनी से सटे प्रवाहित गंडक नदी और बिहार बॉर्डर के खनुआ नदी के बीच बसे 10 गांवों के लोग इस रेल परियोजना से प्रभावित होंगे। इन गांवों में हर वर्ष बरसात में बाढ़ की समस्या बनी रहेगी। किसानों ने कहा कि हथुआ-भटनी रेलमार्ग को निरस्त कर हथुआ-पंचदेउरी से कुशीनगर को जोड़ना जनहित में उचित होगा। इससे सरकार को भी करोड़ों रुपये की बचत होगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को लेकर लगातार विरोध जारी है और इसके निरस्त होने तक किसान चुप नहीं बैठेंगे। सरकार उच्च स्तरीय समिति बनाकर जांच कराते हुए परियोजना को निरस्त नहीं करती तो उग्र आंदोलन को मजबूर होना पड़ेगा। ज्ञापन देने वालों में त्रिवेणी यादव, छट्ठू यादव, शिवनारायण यादव, राधेश्याम तिवारी, कुसुम देवी, आरती देवी, रमावती, मीरा, वासुदेव यादव, परमजीत, उर्मिला आदि शामिल रहे।
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छह सूत्री ज्ञापन के जरिए किसानों का कहना था कि वर्ष 2005-06 में योजना आयोग ने देवरिया से हथुआ के बीच रेल लाइन को स्वीकृति दी, लेकिन पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने फर्जी अभ्यावेदनों के आधार पर निजी हित में इसे हथुआ से भटनी जंक्शन तक करा दिया। उनका मकसद किसानों का हित नहीं बल्कि अपने गांव, ससुराल और अन्य रिश्तेदारों के गांव को जोड़ना था। हथुआ से भटनी की दूरी सड़क मार्ग से 40 किमी है, जबकि रेलमार्ग से यह दूरी 80 किमी हो जाएगी। इस रेलमार्ग के लिए किसानों की करीब 112.49 एकड़ भूमि अधिग्रहित हो रही है। इससे करीब एक हजार लघु सीमांत किसान प्रभावित हो रहे हैं। यह सभी किसान भूमिहीन हो जाएंगे। भटनी से सटे प्रवाहित गंडक नदी और बिहार बॉर्डर के खनुआ नदी के बीच बसे 10 गांवों के लोग इस रेल परियोजना से प्रभावित होंगे। इन गांवों में हर वर्ष बरसात में बाढ़ की समस्या बनी रहेगी। किसानों ने कहा कि हथुआ-भटनी रेलमार्ग को निरस्त कर हथुआ-पंचदेउरी से कुशीनगर को जोड़ना जनहित में उचित होगा। इससे सरकार को भी करोड़ों रुपये की बचत होगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को लेकर लगातार विरोध जारी है और इसके निरस्त होने तक किसान चुप नहीं बैठेंगे। सरकार उच्च स्तरीय समिति बनाकर जांच कराते हुए परियोजना को निरस्त नहीं करती तो उग्र आंदोलन को मजबूर होना पड़ेगा। ज्ञापन देने वालों में त्रिवेणी यादव, छट्ठू यादव, शिवनारायण यादव, राधेश्याम तिवारी, कुसुम देवी, आरती देवी, रमावती, मीरा, वासुदेव यादव, परमजीत, उर्मिला आदि शामिल रहे।
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