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छह घंटे तक कोर्ट में जमी रही एसआईटी
Updated Mon, 13 Aug 2018 11:49 PM IST
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देवरिया बालिकागृह कांड - लड़कियों के बयान का अवलोकन करने के बाद कोर्ट से बाहर पैदल आते एसआईटी की टीम के सदस्य। अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। बालिका गृह कांड की जांच को पहुंची एसआईटी ने सोमवार को कोर्ट में 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज लड़कियों के बयान देखने के लिए अर्जी दी। कोर्ट की अनुमति के बाद करीब पांच घंटे तक विवेचक ने कोर्ट में दर्ज सभी लड़कियों के बयान पढ़े। उनके प्रमुख बिंदु नोट किए। इसके बाद वापस रेस्ट हाउस की ओर रवाना हो गए। देवरिया कांड की पूरी सच्चाई कोर्ट में दर्ज इसी बयान पर टिकी है। लिहाजा कोर्ट परिसर में गहमागहमी रही। विवेचक के साथ पुलिस भी मौजूद रही।
बालिका गृह से मुक्त कराई गई 23 लड़कियों-बच्चों के बयान बुधवार-गुरुवार को कोर्ट में दर्ज किए गए थे। इससे पहले पुलिस ने भी राजकीय बाल सदन पहुंचकर अलग-अलग बयान नोट किए थे। मुकदमे की कार्रवाई के दौरान कोर्ट में हुए बयान ही मुख्य आधार होंगे। विवेचना को सही दिशा देने के लिए बयान का अवलोकन जरूरी था। लिहाजा सोमवार को कोर्ट खुलते ही एसआईटी की ओर से बृजेश कुमार ने एडीजे सत्येंद्र नाथ त्रिपाठी की कोर्ट संख्या-8 में अर्जी दाखिल की। कोर्ट की अनुमति के बाद बयान से संबंधित पत्र प्रस्तुत किए गए। एक-एक कर सभी लड़कियों के बयान को पढ़ा और उसके मुख्य बिंदुओं को नोट किया। शाम पांच बजे तक अवलोकन का कार्य चलता रहा। इसके बाद टीम के सदस्य लौट गए। गोपनीयता कायम रखने के लिए कक्ष के बाहर पुलिसकर्मी मुस्तैद रहे। किसी को भी अंदर प्रवेश की इजाजत नहीं मिली। सूत्रों के मुताबिक बयान में ज्यादातर लड़कियों ने छेड़खानी व प्रताड़ना की बात ही दर्ज कराई है।
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दस्तावेज लेकर अलसुबह हाईकोर्ट गए अफसर
प्वाइंटर
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दाखिल करना था पक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। हाईकोर्ट की इलाहाबाद पीठ ने बालगृह बालिका कांड का स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब मांगा था। जवाब दाखिल करने के लिए सरकार ने रविवार तक का समय लिया था। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रखने के लिए एसआईटी के प्रमुख एडीजी क्राइम संजय सिंघल शनिवार को लखनऊ रवाना हो गए थे। अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। घटना से जुड़े कई अन्य तथ्य नहीं पहुंच सके थे। उनकी मूल पत्रावलियों को लेकर सोमवार की सुबह ही एसपी रोहन पी कनय, डीपीओ प्रभात कुमार इलाहाबाद के लिए रवाना हुए। सूत्रों के मुताबिक टीम से पुलिस और कोर्ट में दर्ज बयान के अलावा, संस्था की वैधता, सीडब्ल्यूसी के रजिस्टर, पुलिस की ओर से रखी गई लड़कियों का ब्योरा आदि से जुड़े दस्तावेज सोमवार को अफसर लेकर हाईकोर्ट पहुंचे। सुनवाई पर दिन भर सबकी निगाहें जमी रहीं।
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लिखित बयान के लिए एसआईटी ने दिया नोटिस
देवरिया। दो दिन तक अलग-अलग पूछताछ के बाद एसआईटी ने लिखित बयान दर्ज कराने के लिए कई लोगों को नोटिस दिया है। इसमें कार्रवाई के दिन पुलिस टीम में शामिल रहीं महिला इंस्पेक्टर शोभा सिंह सोलंकी, सरोज शर्मा, महिला हेल्पलाइन-181 की टीम, बाल कल्याण समिति, पांच अगस्त व 30 जुलाई को दर्ज मुकदमों के विवेचक शामिल हैं। इन्हें मंगलवार तक अपना बयान लिखित रूप से दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। एसआईटी ने आसपास के मकानों के सीसीटीवी फुटेज भी मांगे हैं।
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बालिका गृह से मुक्त कराई गई 23 लड़कियों-बच्चों के बयान बुधवार-गुरुवार को कोर्ट में दर्ज किए गए थे। इससे पहले पुलिस ने भी राजकीय बाल सदन पहुंचकर अलग-अलग बयान नोट किए थे। मुकदमे की कार्रवाई के दौरान कोर्ट में हुए बयान ही मुख्य आधार होंगे। विवेचना को सही दिशा देने के लिए बयान का अवलोकन जरूरी था। लिहाजा सोमवार को कोर्ट खुलते ही एसआईटी की ओर से बृजेश कुमार ने एडीजे सत्येंद्र नाथ त्रिपाठी की कोर्ट संख्या-8 में अर्जी दाखिल की। कोर्ट की अनुमति के बाद बयान से संबंधित पत्र प्रस्तुत किए गए। एक-एक कर सभी लड़कियों के बयान को पढ़ा और उसके मुख्य बिंदुओं को नोट किया। शाम पांच बजे तक अवलोकन का कार्य चलता रहा। इसके बाद टीम के सदस्य लौट गए। गोपनीयता कायम रखने के लिए कक्ष के बाहर पुलिसकर्मी मुस्तैद रहे। किसी को भी अंदर प्रवेश की इजाजत नहीं मिली। सूत्रों के मुताबिक बयान में ज्यादातर लड़कियों ने छेड़खानी व प्रताड़ना की बात ही दर्ज कराई है।
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दस्तावेज लेकर अलसुबह हाईकोर्ट गए अफसर
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सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दाखिल करना था पक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। हाईकोर्ट की इलाहाबाद पीठ ने बालगृह बालिका कांड का स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब मांगा था। जवाब दाखिल करने के लिए सरकार ने रविवार तक का समय लिया था। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रखने के लिए एसआईटी के प्रमुख एडीजी क्राइम संजय सिंघल शनिवार को लखनऊ रवाना हो गए थे। अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। घटना से जुड़े कई अन्य तथ्य नहीं पहुंच सके थे। उनकी मूल पत्रावलियों को लेकर सोमवार की सुबह ही एसपी रोहन पी कनय, डीपीओ प्रभात कुमार इलाहाबाद के लिए रवाना हुए। सूत्रों के मुताबिक टीम से पुलिस और कोर्ट में दर्ज बयान के अलावा, संस्था की वैधता, सीडब्ल्यूसी के रजिस्टर, पुलिस की ओर से रखी गई लड़कियों का ब्योरा आदि से जुड़े दस्तावेज सोमवार को अफसर लेकर हाईकोर्ट पहुंचे। सुनवाई पर दिन भर सबकी निगाहें जमी रहीं।
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लिखित बयान के लिए एसआईटी ने दिया नोटिस
देवरिया। दो दिन तक अलग-अलग पूछताछ के बाद एसआईटी ने लिखित बयान दर्ज कराने के लिए कई लोगों को नोटिस दिया है। इसमें कार्रवाई के दिन पुलिस टीम में शामिल रहीं महिला इंस्पेक्टर शोभा सिंह सोलंकी, सरोज शर्मा, महिला हेल्पलाइन-181 की टीम, बाल कल्याण समिति, पांच अगस्त व 30 जुलाई को दर्ज मुकदमों के विवेचक शामिल हैं। इन्हें मंगलवार तक अपना बयान लिखित रूप से दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। एसआईटी ने आसपास के मकानों के सीसीटीवी फुटेज भी मांगे हैं।