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शहर में भी उपेक्षित हैं महापुरुषों की प्रतिमाएं
Updated Fri, 09 Mar 2018 10:56 PM IST
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कसया रोड स्थित रागनी मोड पर लगा सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा की छतरी टूट गइऱ्ई है।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। बदले की राजनीति के चलते देशभर में महापुरुषों की प्रतिमाओं को निशाना बनाया जा रहा है। त्रिपुरा में लेनिन की प्रतिमा से शुरू हुआ यह सिलसिला केरल तक पहुंच गया। कहीं पेरियार की मूर्ति तोड़ी जा रही है तो कहीं श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ति पर कालिख पोती जा रही है। हालांकि जिले के लोगों की सहिष्णुता और आपसी सद्भाव के चलते यहां तो ऐसे हालात नहीं लेकिन शहर में सालों पहले स्थापित धूल फांकती महापुरुषों की प्रतिमाएं शहरवासियों की सजगता और संवेदनशीलता पर सवाल उठाती हैं।
शहर के विभिन्न तिराहों-चौराहों या सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाएं उपेक्षा का दंश झेल रही हैं। इन दिनों राजनीतिक विद्वेष जाहिर करने के लिए महापुरुषों की प्रतिमाओं के साथ अभद्रता की जा रही है। जिले के रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र में होली के दिन ही शरारती तत्वों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तोड़ दी थी। इसके बावजूद प्रशासन की नजर इन प्रतिमाओं पर नहीं पड़ रही है। शहर के भीतर लगीं महापुरुषों की प्रतिमाएं धूल फांक रहीं हैं।
सुभाष चौक पर तीन दशक पहले सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित की गई थी। फोरलेन निर्माण के कारण सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा इन दिनों धूल से पटी है। यह हाल तब है जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लोग आए दिन इस स्थान पर धरना-प्रदर्शन-बैठकें आदि आयोजित करते हैं। उनकी नजर भी धूल खा रही सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की बदहाली पर नहीं जा रही है।
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रागिनी मोड़ पर भी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगी है। यहां प्रतिमा पर लगी छतरी आधी टूट चुकी है। पोस्टमार्टम चौराहे पर देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा दो दशक पहले स्थापित की गई थी। रखरखाव के अभाव में आज इस पर भी बेपरवाही की धूल जमी है। ऐसे ही न्यू कॉलोनी चौराहे पर भगत सिंह की प्रतिमा लगी है। यह भी उपेक्षा का दंश झेल रही है। ट्यूबवेल कॉलोनी चौराहे पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा स्थापित की गई है। खुले आसमान के नीचे शास्त्री जी की प्रतिमा को नीम का पेड़ छांव देता है। इस बाबत नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अमित सिंह ने बताया कि महापुरुषों की प्रतिमाओं की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। जल्द ही बदलाव दिखेगा।
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शहर के विभिन्न तिराहों-चौराहों या सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाएं उपेक्षा का दंश झेल रही हैं। इन दिनों राजनीतिक विद्वेष जाहिर करने के लिए महापुरुषों की प्रतिमाओं के साथ अभद्रता की जा रही है। जिले के रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र में होली के दिन ही शरारती तत्वों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तोड़ दी थी। इसके बावजूद प्रशासन की नजर इन प्रतिमाओं पर नहीं पड़ रही है। शहर के भीतर लगीं महापुरुषों की प्रतिमाएं धूल फांक रहीं हैं।
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सुभाष चौक पर तीन दशक पहले सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित की गई थी। फोरलेन निर्माण के कारण सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा इन दिनों धूल से पटी है। यह हाल तब है जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लोग आए दिन इस स्थान पर धरना-प्रदर्शन-बैठकें आदि आयोजित करते हैं। उनकी नजर भी धूल खा रही सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की बदहाली पर नहीं जा रही है।
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रागिनी मोड़ पर भी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगी है। यहां प्रतिमा पर लगी छतरी आधी टूट चुकी है। पोस्टमार्टम चौराहे पर देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा दो दशक पहले स्थापित की गई थी। रखरखाव के अभाव में आज इस पर भी बेपरवाही की धूल जमी है। ऐसे ही न्यू कॉलोनी चौराहे पर भगत सिंह की प्रतिमा लगी है। यह भी उपेक्षा का दंश झेल रही है। ट्यूबवेल कॉलोनी चौराहे पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा स्थापित की गई है। खुले आसमान के नीचे शास्त्री जी की प्रतिमा को नीम का पेड़ छांव देता है। इस बाबत नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अमित सिंह ने बताया कि महापुरुषों की प्रतिमाओं की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। जल्द ही बदलाव दिखेगा।