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गीता विश्व मानव के दायित्वों का पथ-प्रदर्शक
Updated Wed, 29 Nov 2017 10:57 PM IST
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श्री विद्याधर्म संजीवन संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित गीता जयंती को मुख्य अतिथि ने संबोधित किया।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। सरयूपारीण ब्राह्मण परिषद के बैनर तले श्री विद्याधर्म संजीवन संस्कृत महाविद्यालय में बुधवार को गीता जयंती समारोह मनाया गया। मुख्य अतिथि प्रो. अजय मिश्र ने कहा कि गीता विश्व मानव के दायित्वों का पथ-प्रदर्शक है। छात्र-छात्राओं के बीच पांच प्रकार की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। भाषण में अंशिका तिवारी और अंत्याक्षरी में दोनों टीमों ने जबरदस्त टक्कर ली।
समारोह की शुरूआत आचार्य रामनारायण मिश्र ने देव पूजन से की। रामनारायणाचार्य ने कहा कि श्रीकृष्ण आदि महापुरुषों ने अपने जन्म और कर्म से यह आदर्श उपस्थित किया कि भले ही किसी के पास बुद्धि, बल, धन से अधिकार से संपन्न क्यों न हो, उसे अपने आदरणीयों का सम्मान करना चाहिए। श्रीप्रकाश राम त्रिपाठी, सतीश पति त्रिपाठी, परमेश्वर जोशी, सुधाकर मणि ने भी विचार व्यक्त किए। आद्या प्रसाद शुक्ल ने गीता को आम प्राणी के जीवन की गाथा बताया है। इस दौरान कैलाश मिश्र, मुन्नीलाल मिश्र, डॉ. केशवधर मिश्र, रामनारायण मिश्र आदि मौजूद रहे।
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समारोह की शुरूआत आचार्य रामनारायण मिश्र ने देव पूजन से की। रामनारायणाचार्य ने कहा कि श्रीकृष्ण आदि महापुरुषों ने अपने जन्म और कर्म से यह आदर्श उपस्थित किया कि भले ही किसी के पास बुद्धि, बल, धन से अधिकार से संपन्न क्यों न हो, उसे अपने आदरणीयों का सम्मान करना चाहिए। श्रीप्रकाश राम त्रिपाठी, सतीश पति त्रिपाठी, परमेश्वर जोशी, सुधाकर मणि ने भी विचार व्यक्त किए। आद्या प्रसाद शुक्ल ने गीता को आम प्राणी के जीवन की गाथा बताया है। इस दौरान कैलाश मिश्र, मुन्नीलाल मिश्र, डॉ. केशवधर मिश्र, रामनारायण मिश्र आदि मौजूद रहे।
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