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ग्राउंड रिपोर्ट
Updated Tue, 22 Aug 2017 10:32 PM IST
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विश्वविजय/केएन मल्ल
रुद्रपुर/एकौना। दोआबा के 52 गांवों में सैलाब से चारों ओर खौफ का मंजर नजर आ रहा है। खेत और गांव को डूबता देख चित्कार मची है। लोग जीवन बचाने को बंधों पर ठौर तलाश रहे हैं। यह हृदयविदारक मंजर लोगों के जान पर बन आई है। चारों तरफ पानी भर जाने से बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी नर्क बन गई है। रुद्रपुर में 16 साल बाद आई प्रलयंकारी बाढ़ एक बार फिर पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा कर दी है। दोआबा की करीब 15 हजार हेक्टेयर भूभाग पानी में डूब जाने से लोग पशुओं को लेकर पलायन कर रहे हैं।
‘अमर उजाला की टीम’ ने मंगलवार को बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों का हाल जाना। वहां हालात चिंताजनक है। भगवान मांझा और बेलवा गांव में बाढ़ का पानी रफ्तार से बह रहा है। करीब एक दर्जन गांवों में मकान चारों तरफ से पानी से घिरे हैं। बेलवा में देवी का मंदिर और स्कूल डूबा है। पक्के मकानों के अंदर बाढ़ का पानी घुस जाने से लोग छत पर रात काट रहे हैं। यहां मकानों के धराशायी होने की आशंका बनी है। झोपड़ी और खपरैल के मकान में रहने वाले लोग बंधों पर शरण ले रहे हैं। सुबह बांध कटने के बाद लोग परिवार के महिलाओं और बच्चों को रिश्तेदारों के यहां पहुंचाने लगे हैं। अभी कुछ ही लोग गांव से निकल पाए होंगे कि करीब दो घंटे में गांव का संपर्क कट गया। सारे रास्ते जलमग्न हो गए। गांव के झबलू पांडेय, धर्मपाल सिंह, मोहन सिंह, सत्येंद्र तिवारी आदि ने कहा कि हजारों लोग पानी से चारों ओर से घिर गए हैं। दोआबा के 52 गांवों में नाव की जरूरत है। पानी से घिरे बच्चे और महिलाएं बिलख रही हैं। प्रशासन नावों का इंतजाम नहीं कर पाया है।
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रुद्रपुर/एकौना। दोआबा के 52 गांवों में सैलाब से चारों ओर खौफ का मंजर नजर आ रहा है। खेत और गांव को डूबता देख चित्कार मची है। लोग जीवन बचाने को बंधों पर ठौर तलाश रहे हैं। यह हृदयविदारक मंजर लोगों के जान पर बन आई है। चारों तरफ पानी भर जाने से बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी नर्क बन गई है। रुद्रपुर में 16 साल बाद आई प्रलयंकारी बाढ़ एक बार फिर पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा कर दी है। दोआबा की करीब 15 हजार हेक्टेयर भूभाग पानी में डूब जाने से लोग पशुओं को लेकर पलायन कर रहे हैं।
‘अमर उजाला की टीम’ ने मंगलवार को बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों का हाल जाना। वहां हालात चिंताजनक है। भगवान मांझा और बेलवा गांव में बाढ़ का पानी रफ्तार से बह रहा है। करीब एक दर्जन गांवों में मकान चारों तरफ से पानी से घिरे हैं। बेलवा में देवी का मंदिर और स्कूल डूबा है। पक्के मकानों के अंदर बाढ़ का पानी घुस जाने से लोग छत पर रात काट रहे हैं। यहां मकानों के धराशायी होने की आशंका बनी है। झोपड़ी और खपरैल के मकान में रहने वाले लोग बंधों पर शरण ले रहे हैं। सुबह बांध कटने के बाद लोग परिवार के महिलाओं और बच्चों को रिश्तेदारों के यहां पहुंचाने लगे हैं। अभी कुछ ही लोग गांव से निकल पाए होंगे कि करीब दो घंटे में गांव का संपर्क कट गया। सारे रास्ते जलमग्न हो गए। गांव के झबलू पांडेय, धर्मपाल सिंह, मोहन सिंह, सत्येंद्र तिवारी आदि ने कहा कि हजारों लोग पानी से चारों ओर से घिर गए हैं। दोआबा के 52 गांवों में नाव की जरूरत है। पानी से घिरे बच्चे और महिलाएं बिलख रही हैं। प्रशासन नावों का इंतजाम नहीं कर पाया है।
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