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दो विभागों के खींचतान में लड़खड़ाई पानी की सप्लाई
Updated Fri, 08 Jun 2018 11:03 PM IST
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महिला थाना के सामने जलकल का पाईप फटने से बर्बाद होता पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। शहर की जलापूर्ति व्यवस्था दो विभागों की आपसी खींचतान में उलझ गई है। नगर पालिका और जल निगम की मनमानी से आधा दर्जन मोहल्लों में पेयजल किल्लत बनी हुई है। कहीं पानी नहीं पहुंच रहा तो कहीं प्रेशर इतना लो है कि एक बाल्टी पानी भरने में 15-20 मिनट लग रहे हैं। भीषण गर्मी के दौर में लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। इसे लेकर अफसर भी खामोश हैं। नाराज शहरवासियों का गुस्सा कभी भी फूट सकता है।
शहर में बेहतर तरीके से पेयजल मुहैया कराने में नगर पालिका प्रशासन लापरवाही बरत रहा है। आठ हजार से अधिक लोगों ने पानी का कनेक्शन ले रखा है। अबूबकर नगर, बांस देवरिया, साकेत नगर, पुलिस लाइन, खरजरवा, भटवलिया, रामनाथ देवरिया, ट्यूबवेल कॉलोनी, न्यू कॉलोनी, उमानगर समेत कई मोहल्लों में सुचारु रूप से पेयजल की आपूर्ति करीब ढाई माह से नहीं हो पा रहा है। अंडरग्राउंड पाइप क्षतिग्रस्त और समय से पानी की टंकी नहीं भरने के कारण लोगों को पानी के लिए मशक्कत करना पड़ रहा है। जल निगम और नगर पालिका कर्मचारी खुद की कमियों को छिपाते हुए एक-दूसरे को दोषी बता रहे हैं। इस चक्कर में शहरवासियों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। बांस देवरिया में तो सुबह और शाम कतार लगाकर पानी लोगों को भरना पड़ रहा है। कमोवेश यही हाल अन्य मोहल्लों का भी है। शहर में अनेक स्थानों पर अंडर ग्राउंड पाइप लाइन फटा है, कई बार शिकायत के बाद भी नगर पालिका प्रशासन इसे ठीक करने की जहमत नहीं उठा रहा है। बांस देवरिया के लोगों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी कर्मचारी नहीं सुनते हैं।
ईओ अमित सिंह ने बताया कि जल निगम की ओर से पानी की सप्लाई के लिए अंडरग्राउंड पाइप लाइन पानी का प्रेशर पड़ने के कारण लीक हो जा रहा है। इसके चलते पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। कनेक्शन देते समय निगम को पालिका कर्मचारियों को साथ रखना चाहिए था, इससे यह स्पष्ट रहता कि किस पाइप से कनेक्शन दिया जा रहा है। जलनिगम की मनमानी से फाल्ट ढूंढने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पाइप लाइन को ठीक कराने के लिए जल निगम को पत्र भी लिखा जा चुका है।
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प्रेशर पड़ते ही लीक हो जा रही पाइपें
शहर में जल निगम ने दस पानी टंकी का निर्माण कराया है। इससे शहर के सभी मोहल्लों में पानी की सप्लाई की जाती है। इसमें दो पानी की टंकी मेहड़ा अंदर और मेहड़ा बाहर बने कांशीराम आवास में बना है। नगर पालिका के पाइप फीटर कमलेश्वर सिंह का कहना है कि जल निगम के कर्मचारी पानी की टंकी भरने के लिए तैनात हैं जो समय से मोटर चालू नहीं करते हैं। इसके चलते कुछ मोहल्लों में समय से पानी नहीं पहुंच पाता है। जो पानी की टंकी नगर पालिका को हैंड ओवर की गई है। उसका संचालन ठीक ढंग से किया जा रहा है। साकेत नगर और भटवलिया में हाल ही में जल निगम की ओर से पाइप लाइन का काम कराया गया है। पाइप की क्वालिटी ठीक नहीं होने के कारण वह प्रेशर पड़ने पर लीक कर रहा है। पानी टंकी हैंडओवर के लिए जो फाइल जलनिगम ने भेजा था। उस फाइल पर अंडरग्राउंड पाइप की क्वालिटी खराब होने की बात लिखी गई है और हैंडओवर नहीं हुआ है।
जल निगम की नहीं है जिम्मेदारी : एक्सईएन
जल निगम के एक्सईएन प्रदीप चौरसिया ने बताया कि जल निगम की ओर निर्माण कराई पानी की टंकियों को हैंड ओवर कर दिया गया है। हैंडओवर से पूर्व सभी कनेक्शन में पानी पहुंचाकर दिखाया गया था। अब मरम्मत और देखरेख की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। अमृत योजना के अंतर्गत कुछ मोहल्लों को पेयजल की बेहतर व्यवस्था के लिए चिह्नित किया गया है।
घटिया क्वालिटी का लग रहा वाटर मीटर
शहर में जल निगम की ओर से वाटर मीटर लगाने का कार्य चल रहा है। कार्य की प्रगति धीमी होने के कारण अभी तक यह पूर्ण नहीं हो सका। जानकारों की माने तो वाटर मीटर के लिए जितना धन खर्च किया जा रहा है, उस क्वालिटी का वाटर मीटर नहीं लगाया जा रहा है। इसके लिए जल निगम के दो जेई की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन ठेकेदार की मिलीभगत के कारण लग रहे वाटर मीटर की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं जा रहा है।
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शहर में बेहतर तरीके से पेयजल मुहैया कराने में नगर पालिका प्रशासन लापरवाही बरत रहा है। आठ हजार से अधिक लोगों ने पानी का कनेक्शन ले रखा है। अबूबकर नगर, बांस देवरिया, साकेत नगर, पुलिस लाइन, खरजरवा, भटवलिया, रामनाथ देवरिया, ट्यूबवेल कॉलोनी, न्यू कॉलोनी, उमानगर समेत कई मोहल्लों में सुचारु रूप से पेयजल की आपूर्ति करीब ढाई माह से नहीं हो पा रहा है। अंडरग्राउंड पाइप क्षतिग्रस्त और समय से पानी की टंकी नहीं भरने के कारण लोगों को पानी के लिए मशक्कत करना पड़ रहा है। जल निगम और नगर पालिका कर्मचारी खुद की कमियों को छिपाते हुए एक-दूसरे को दोषी बता रहे हैं। इस चक्कर में शहरवासियों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। बांस देवरिया में तो सुबह और शाम कतार लगाकर पानी लोगों को भरना पड़ रहा है। कमोवेश यही हाल अन्य मोहल्लों का भी है। शहर में अनेक स्थानों पर अंडर ग्राउंड पाइप लाइन फटा है, कई बार शिकायत के बाद भी नगर पालिका प्रशासन इसे ठीक करने की जहमत नहीं उठा रहा है। बांस देवरिया के लोगों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी कर्मचारी नहीं सुनते हैं।
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ईओ अमित सिंह ने बताया कि जल निगम की ओर से पानी की सप्लाई के लिए अंडरग्राउंड पाइप लाइन पानी का प्रेशर पड़ने के कारण लीक हो जा रहा है। इसके चलते पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। कनेक्शन देते समय निगम को पालिका कर्मचारियों को साथ रखना चाहिए था, इससे यह स्पष्ट रहता कि किस पाइप से कनेक्शन दिया जा रहा है। जलनिगम की मनमानी से फाल्ट ढूंढने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पाइप लाइन को ठीक कराने के लिए जल निगम को पत्र भी लिखा जा चुका है।
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प्रेशर पड़ते ही लीक हो जा रही पाइपें
शहर में जल निगम ने दस पानी टंकी का निर्माण कराया है। इससे शहर के सभी मोहल्लों में पानी की सप्लाई की जाती है। इसमें दो पानी की टंकी मेहड़ा अंदर और मेहड़ा बाहर बने कांशीराम आवास में बना है। नगर पालिका के पाइप फीटर कमलेश्वर सिंह का कहना है कि जल निगम के कर्मचारी पानी की टंकी भरने के लिए तैनात हैं जो समय से मोटर चालू नहीं करते हैं। इसके चलते कुछ मोहल्लों में समय से पानी नहीं पहुंच पाता है। जो पानी की टंकी नगर पालिका को हैंड ओवर की गई है। उसका संचालन ठीक ढंग से किया जा रहा है। साकेत नगर और भटवलिया में हाल ही में जल निगम की ओर से पाइप लाइन का काम कराया गया है। पाइप की क्वालिटी ठीक नहीं होने के कारण वह प्रेशर पड़ने पर लीक कर रहा है। पानी टंकी हैंडओवर के लिए जो फाइल जलनिगम ने भेजा था। उस फाइल पर अंडरग्राउंड पाइप की क्वालिटी खराब होने की बात लिखी गई है और हैंडओवर नहीं हुआ है।
जल निगम की नहीं है जिम्मेदारी : एक्सईएन
जल निगम के एक्सईएन प्रदीप चौरसिया ने बताया कि जल निगम की ओर निर्माण कराई पानी की टंकियों को हैंड ओवर कर दिया गया है। हैंडओवर से पूर्व सभी कनेक्शन में पानी पहुंचाकर दिखाया गया था। अब मरम्मत और देखरेख की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। अमृत योजना के अंतर्गत कुछ मोहल्लों को पेयजल की बेहतर व्यवस्था के लिए चिह्नित किया गया है।
घटिया क्वालिटी का लग रहा वाटर मीटर
शहर में जल निगम की ओर से वाटर मीटर लगाने का कार्य चल रहा है। कार्य की प्रगति धीमी होने के कारण अभी तक यह पूर्ण नहीं हो सका। जानकारों की माने तो वाटर मीटर के लिए जितना धन खर्च किया जा रहा है, उस क्वालिटी का वाटर मीटर नहीं लगाया जा रहा है। इसके लिए जल निगम के दो जेई की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन ठेकेदार की मिलीभगत के कारण लग रहे वाटर मीटर की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं जा रहा है।