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कुपोषित बच्चों के घर की महिलाएं मनरेगा में करेंगी काम
Updated Tue, 21 Nov 2017 10:38 PM IST
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नीलांबुज मिश्र
देवरिया। गांवों में दी जाने वाली बेसलाइन सुविधा में कुपोषित और अति कुपोषित परिवार को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे परिवार की महिलाओं को मनरेगा के जरिए कार्य उपलब्ध कराया जाएगा। प्रथम चरण में छह विभाग के अफसरों ने 78 ओडीएफ गांवों को कुपोषण मुक्त बनाने का बीड़ा उठाया है।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में चलाए गए वजन दिवस अभियान में चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। 3.31 लाख बच्चों के हुए वजन में 35959 अति कुपोषित और 79404 कुपोषित मिले हैं। इसके लिए प्रथम चरण में 78 ओडीएफ राजस्व गांवों का चयन किया गया है। एक नवंबर से चयनित गांवों को कुपोषण मुक्त बनाने का कार्य शुरू हो गया है। कुपोषण के जद में आए बच्चों के घरवालों को सरकार की ओर से संचालित सुविधाएं मुहैया कराना है। इन परिवार की महिलाओं का जॉब कार्ड बनाना और मनरेगा के जरिए 75 प्रतिशत काम देना है। इसके अलावा अंत्योदय कार्ड बनाना अनिवार्य है। ताकि प्रभावित परिवार के बच्चे कुपोषण मुक्त बन सके। जिला कार्यक्रम अधिकारी केएम पांडेय ने बताया कि निकाय चुनाव के लिए कुपोषण मुक्त चयनित गांवों में कुछ अधिकारी नहीं पहुंच पा रहे हैं। कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों के घर की महिलाओं को मनरेगा के तहत काम मुहैया कराना अनिवार्य है। इसमें अति कुपोषित बच्चों के घरवालों को पहले प्राथमिकता दी जा रही है।
छह विभाग मिलकर कर रहे काम
देवरिया। चयनित हुए ओडीएफ गांवों को कुपोषित मुक्त बनाने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, खाद्य विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायतीराज, खाद्य एवं रसद विभाग, ग्राम विकास विभाग के अफसर काम कर रहे है।
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अधिकांश गांवों में नहीं पहुंचे अफसर
देवरिया। कुपोषण मुक्त बनाने के लिए चयनित हुए 78 ओडीएफ गांवों में डीएम सुजीत कुमार ने बैतालपुर ब्लॉक के चतुर्भुजपुर और सदर ब्लॉक के मकुंदपुर गांव को और सीडीओ राजेश त्यागी ने बैतालपुर ब्लॉक के बनकटा, देवरिया सदर के करौंदी दो को गोद लिया है। इसके अलावा अन्य विभाग के अधिकारी चयनित गांवों को कुपोषण मुक्त बनाने का जिम्मा लिया है। लेकिन अधिकांश गांवों में अभी तक अधिकारी नहीं पहुंच सके हैं।
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देवरिया। गांवों में दी जाने वाली बेसलाइन सुविधा में कुपोषित और अति कुपोषित परिवार को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे परिवार की महिलाओं को मनरेगा के जरिए कार्य उपलब्ध कराया जाएगा। प्रथम चरण में छह विभाग के अफसरों ने 78 ओडीएफ गांवों को कुपोषण मुक्त बनाने का बीड़ा उठाया है।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में चलाए गए वजन दिवस अभियान में चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। 3.31 लाख बच्चों के हुए वजन में 35959 अति कुपोषित और 79404 कुपोषित मिले हैं। इसके लिए प्रथम चरण में 78 ओडीएफ राजस्व गांवों का चयन किया गया है। एक नवंबर से चयनित गांवों को कुपोषण मुक्त बनाने का कार्य शुरू हो गया है। कुपोषण के जद में आए बच्चों के घरवालों को सरकार की ओर से संचालित सुविधाएं मुहैया कराना है। इन परिवार की महिलाओं का जॉब कार्ड बनाना और मनरेगा के जरिए 75 प्रतिशत काम देना है। इसके अलावा अंत्योदय कार्ड बनाना अनिवार्य है। ताकि प्रभावित परिवार के बच्चे कुपोषण मुक्त बन सके। जिला कार्यक्रम अधिकारी केएम पांडेय ने बताया कि निकाय चुनाव के लिए कुपोषण मुक्त चयनित गांवों में कुछ अधिकारी नहीं पहुंच पा रहे हैं। कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों के घर की महिलाओं को मनरेगा के तहत काम मुहैया कराना अनिवार्य है। इसमें अति कुपोषित बच्चों के घरवालों को पहले प्राथमिकता दी जा रही है।
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छह विभाग मिलकर कर रहे काम
देवरिया। चयनित हुए ओडीएफ गांवों को कुपोषित मुक्त बनाने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, खाद्य विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायतीराज, खाद्य एवं रसद विभाग, ग्राम विकास विभाग के अफसर काम कर रहे है।
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अधिकांश गांवों में नहीं पहुंचे अफसर
देवरिया। कुपोषण मुक्त बनाने के लिए चयनित हुए 78 ओडीएफ गांवों में डीएम सुजीत कुमार ने बैतालपुर ब्लॉक के चतुर्भुजपुर और सदर ब्लॉक के मकुंदपुर गांव को और सीडीओ राजेश त्यागी ने बैतालपुर ब्लॉक के बनकटा, देवरिया सदर के करौंदी दो को गोद लिया है। इसके अलावा अन्य विभाग के अधिकारी चयनित गांवों को कुपोषण मुक्त बनाने का जिम्मा लिया है। लेकिन अधिकांश गांवों में अभी तक अधिकारी नहीं पहुंच सके हैं।