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तारों के मकड़जाल में उलझा मोहन रोड
ब्यूरो/अमर उजाला देवरिया
Updated Sun, 09 Sep 2018 10:51 PM IST
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मोहन रोड स्थित बिद्युत पोल पर केबल का लगा मकड़जाल।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। कभी फैंसी वस्त्रों के लिए मशहूर रहा मोहन रोड आज अपना अस्तित्व बचाने की गुहार लगा रहा है। सड़क पर सब्जी मार्केट का विस्तार होने के चलते ग्राहकों के वाहन नहीं खड़े हो पाते हैं। बड़े वाहनों के आवागमन में तारों के मकड़जाल बाधक बने हुए हैं। पूरे दिन सड़क पर छुट्टा पशुओं का जमावड़ा रहता है। इससे दुकानदारों को परेशानी होती ही है ग्राहक भी दुश्वारियों के चलते मोहन रोड व बजाजी गली में घुसने से कतराने लगे हैं।
मोहन रोड व बजाजी गली का नाम आते फैंसी वस्त्रों की चकाचौंध आंखों के सामने घूमने लगती है। छोटे व्यापारी हों या आम आदमी यहां से कपड़े की खरीदारी करने में सभी रुचि दिखाते हैं। मार्केट जितना ही पुराना है उतना ही विश्वसनीय। इतना सबकुछ होने के बावजूद यहां गलियों में दुश्वारियों का डेरा है। तारों के गट्ठर ऐसे झूल रहे हैं जैसे किसी मकड़ी ने सड़क के इस पार से उस पार तक जाले लगा दिए हों। मोहन रोड, पेड़ा गली व बजाजी गली में छह से सात फीट की ऊंचाई पर केबिल लटके हुए हैं। कई बार यह केबिल सड़क से गुजरने वाले वाहनों में फंस जाते हैं। इससे आए दिन दुकानदारों को सार्ट सार्किट की समस्या से जूझना पड़ता है। इसी सड़क पर सब्जी मंडी का विस्तार हो जाने के चलते कपडे़ के खरीदारों को वाहन खड़ा करने में काफी दिक्कत होती है। सब्जियों के अवशेष खाने आए आवारा पशु अक्सर लोगों को घायल कर देते हैं।
वाहनों में फंस जाते हैं केबिल
व्यवसायी सुरेश कमानी का कहना है कि तारों के मकड़जाल के चलते तमाम थोक ग्राहकों ने मोहन रोड व बजाजी गली से खरीदारी करना बंद कर दिया। माल ले जाने के लिए पीकअप की जरूरत पड़ती है, जो तार लटकने के चलते दुकान तक नहीं पहुंच पाते। केबल फंसकर टूटने का खतरा बना रहता है।
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छोटे वाहनों का लेते हैं सहारा
कपड़ा व्यवसायी आनंद झुनझुनवाला का कहना है कि बिजली निगम की लापरवाही के चलते दुकानदारों की लागत बढ़ जा रही है। सड़क खाली रहने के बावजूद भी हम अपना माल शो रूम तक नहीं पहुंचा पाते इससे छोटे वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
नहीं बचा मार्केट का अस्तित्व
संजय केजरीवाल का कहना है कि मोहन रोड कपड़ा मार्केट के नाम से विख्यात है। अब इसमें सब्जी मार्केट का भी विस्तार हो रहा है। यह मोहन रोड के अस्तित्व के लिए ठीक नहीं है।
मन माफिक नहीं होती सफाई
आरपी सिंह का कहना है कि सब्जी व्यवसायी रोजना कई कुंटल सब्जियों के अवशेष सड़क पर फेंकते हैं। इसकी सड़ांध से पूरा इलाका प्रभावित होता है। सफाईकर्मी कोरम पूरा करके चले जाते हैं। यहां सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
बेतरतीब पार्किंग से मिले निजात
व्यवसायी कन्हैया का कहना है कि शाम दो बजे के बाद सड़क से पैदल गुजरना भी कठिन हो जाता है। सड़क की पटरी सब्जी व्यवसायी कब्जाए रहते हैं। बाकी बची जगहों पर लोग बेतरतीब गाड़ी खड़ी कर देते हैं। इससे राहगीरों के साथ-साथ दुकानदारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
आवारा पशुओं से मिले निजात
सब्जी मार्केट लगने के चलते यहां आवारा पशुओं का जमावड़ा होता है। इनमें कुछ खतरनाक भी होते हैं। जो अक्सर ग्राहकों पर अचानक हमला कर देते हैं। कई बार इनकी आपसी लड़ाई में वाहन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इस समस्या से निजात मिलना जरूरी है।
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मोहन रोड व बजाजी गली का नाम आते फैंसी वस्त्रों की चकाचौंध आंखों के सामने घूमने लगती है। छोटे व्यापारी हों या आम आदमी यहां से कपड़े की खरीदारी करने में सभी रुचि दिखाते हैं। मार्केट जितना ही पुराना है उतना ही विश्वसनीय। इतना सबकुछ होने के बावजूद यहां गलियों में दुश्वारियों का डेरा है। तारों के गट्ठर ऐसे झूल रहे हैं जैसे किसी मकड़ी ने सड़क के इस पार से उस पार तक जाले लगा दिए हों। मोहन रोड, पेड़ा गली व बजाजी गली में छह से सात फीट की ऊंचाई पर केबिल लटके हुए हैं। कई बार यह केबिल सड़क से गुजरने वाले वाहनों में फंस जाते हैं। इससे आए दिन दुकानदारों को सार्ट सार्किट की समस्या से जूझना पड़ता है। इसी सड़क पर सब्जी मंडी का विस्तार हो जाने के चलते कपडे़ के खरीदारों को वाहन खड़ा करने में काफी दिक्कत होती है। सब्जियों के अवशेष खाने आए आवारा पशु अक्सर लोगों को घायल कर देते हैं।
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वाहनों में फंस जाते हैं केबिल
व्यवसायी सुरेश कमानी का कहना है कि तारों के मकड़जाल के चलते तमाम थोक ग्राहकों ने मोहन रोड व बजाजी गली से खरीदारी करना बंद कर दिया। माल ले जाने के लिए पीकअप की जरूरत पड़ती है, जो तार लटकने के चलते दुकान तक नहीं पहुंच पाते। केबल फंसकर टूटने का खतरा बना रहता है।
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छोटे वाहनों का लेते हैं सहारा
कपड़ा व्यवसायी आनंद झुनझुनवाला का कहना है कि बिजली निगम की लापरवाही के चलते दुकानदारों की लागत बढ़ जा रही है। सड़क खाली रहने के बावजूद भी हम अपना माल शो रूम तक नहीं पहुंचा पाते इससे छोटे वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
नहीं बचा मार्केट का अस्तित्व
संजय केजरीवाल का कहना है कि मोहन रोड कपड़ा मार्केट के नाम से विख्यात है। अब इसमें सब्जी मार्केट का भी विस्तार हो रहा है। यह मोहन रोड के अस्तित्व के लिए ठीक नहीं है।
मन माफिक नहीं होती सफाई
आरपी सिंह का कहना है कि सब्जी व्यवसायी रोजना कई कुंटल सब्जियों के अवशेष सड़क पर फेंकते हैं। इसकी सड़ांध से पूरा इलाका प्रभावित होता है। सफाईकर्मी कोरम पूरा करके चले जाते हैं। यहां सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
बेतरतीब पार्किंग से मिले निजात
व्यवसायी कन्हैया का कहना है कि शाम दो बजे के बाद सड़क से पैदल गुजरना भी कठिन हो जाता है। सड़क की पटरी सब्जी व्यवसायी कब्जाए रहते हैं। बाकी बची जगहों पर लोग बेतरतीब गाड़ी खड़ी कर देते हैं। इससे राहगीरों के साथ-साथ दुकानदारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
आवारा पशुओं से मिले निजात
सब्जी मार्केट लगने के चलते यहां आवारा पशुओं का जमावड़ा होता है। इनमें कुछ खतरनाक भी होते हैं। जो अक्सर ग्राहकों पर अचानक हमला कर देते हैं। कई बार इनकी आपसी लड़ाई में वाहन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इस समस्या से निजात मिलना जरूरी है।