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इस बार ‘ठंडा’ है गर्म कपड़ों का बाजार
Updated Fri, 15 Dec 2017 11:13 PM IST
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देवरिया। दिसंबर का दूसरा सप्ताह चल रहा है, लेकिन अब भी दिन में चटक धूप से लोग परेशान हो जाते हैं। ऐसे में करीब एक महीने से सजा गरम कपड़ों का बाजार ठंडा पड़ा है। वस्त्र विक्रेता दीपावली के बाद से ही ऊनी कपड़ों का स्टॉक मंगवा लेते हैं। मध्य नवंबर से दुकानों में गर्म कपड़े सज जाते हैं। इस साल ज्यादा मांग नहीं होने की वजह से दुकानदारों के चेहरे मुरझाए हुए हैं।
दुकानदारों को कड़ाके की ठंड का इंतजार है। हो भी क्यों न, क्योंकि उन्होंने लाखों रुपये के गर्म कपड़ों का स्टॉक मंगा रखा है। उम्मीद थी कि दिसंबर के पहले सप्ताह तक आधे स्टॉक की बिक्री हो जाएगी। मगर सूर्यदेव इस साल कुछ ज्यादा ही मेहरबान हैं। रोज चटक धूप खिल रही है। ऐसे में हॉफ स्वेटर से ही लोगों का काम चल जा रहा है। रामलीला मैदान के सामने गर्म कपड़ों की बाजार सजी है। दुकानदारों की मानें तो वैसी खरीदारी नहीं हो रही है, जैसी पिछले सीजन में थी। शादी-विवाह में लोग कुछ खरीदारी कर रहे थे। अब तो खरवास लग गया है। इसका असर पहले ही दिन मार्केट पर दिखा। कम खरीदारों के आने से किसी-किसी दुकानदार की ‘बोहनी’ के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।
तिब्बत बाजार की रौनक गायब
रामलीला मैदान के सामने तिब्बत मार्केट लगा है। यहां गर्म कपड़ों की 13 दुकानें हैं। बाजार की रौनक गायब है। इक्का-दुक्का खरीदार ही आ रहे हैं। दुकान नंबर 13 के कर्मा ने बताया कि ठंड नहीं पड़ने का असर बिक्री पर दिख रही है। आने वाले दिनों में भी मौसम के साथ ग्राहकों का रुख नहीं बदला तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। इस बस के बावजूद दुकानदारों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। उनका कहना है कि मौसम करवट बदलेगा। कड़ाके की ठंड पड़ेगी, बिक्री भी बढ़ जाएगी।
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हीटर और गीजर की बिक्री नहीं चढ़ पाई परवान
इस साल अभी तक ठंड नहीं पड़ने से हीटर और गीजर की बिक्री भी परवान नहीं चढ़ पाई है। सिविल लाइंस स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स के राजेश मिश्र ने कहा कि ठंड के जोर नहीं पकड़ने से हीटर और गीजर की बिक्री न के बराबर है। शादी-विवाह का यदि सीजन न होता तो इलेक्ट्रॉनिक्स का कारोबार और मंदा हो जाता। सिविल लाइंस में हैंडलूम की दुकान है। यहां पर ऊनों की बिक्री होती है। अमित त्रिपाठी का कहना है कि इस साल धंधा मंदा है। जो ऊन पिछले साल 80 रुपये किलो बिकते थे, इस साल जीएसटी के कारण 100 रुपये किलो हो गए हैं और बिक्री प्रभावित है।
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दुकानदारों को कड़ाके की ठंड का इंतजार है। हो भी क्यों न, क्योंकि उन्होंने लाखों रुपये के गर्म कपड़ों का स्टॉक मंगा रखा है। उम्मीद थी कि दिसंबर के पहले सप्ताह तक आधे स्टॉक की बिक्री हो जाएगी। मगर सूर्यदेव इस साल कुछ ज्यादा ही मेहरबान हैं। रोज चटक धूप खिल रही है। ऐसे में हॉफ स्वेटर से ही लोगों का काम चल जा रहा है। रामलीला मैदान के सामने गर्म कपड़ों की बाजार सजी है। दुकानदारों की मानें तो वैसी खरीदारी नहीं हो रही है, जैसी पिछले सीजन में थी। शादी-विवाह में लोग कुछ खरीदारी कर रहे थे। अब तो खरवास लग गया है। इसका असर पहले ही दिन मार्केट पर दिखा। कम खरीदारों के आने से किसी-किसी दुकानदार की ‘बोहनी’ के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।
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तिब्बत बाजार की रौनक गायब
रामलीला मैदान के सामने तिब्बत मार्केट लगा है। यहां गर्म कपड़ों की 13 दुकानें हैं। बाजार की रौनक गायब है। इक्का-दुक्का खरीदार ही आ रहे हैं। दुकान नंबर 13 के कर्मा ने बताया कि ठंड नहीं पड़ने का असर बिक्री पर दिख रही है। आने वाले दिनों में भी मौसम के साथ ग्राहकों का रुख नहीं बदला तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। इस बस के बावजूद दुकानदारों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। उनका कहना है कि मौसम करवट बदलेगा। कड़ाके की ठंड पड़ेगी, बिक्री भी बढ़ जाएगी।
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हीटर और गीजर की बिक्री नहीं चढ़ पाई परवान
इस साल अभी तक ठंड नहीं पड़ने से हीटर और गीजर की बिक्री भी परवान नहीं चढ़ पाई है। सिविल लाइंस स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स के राजेश मिश्र ने कहा कि ठंड के जोर नहीं पकड़ने से हीटर और गीजर की बिक्री न के बराबर है। शादी-विवाह का यदि सीजन न होता तो इलेक्ट्रॉनिक्स का कारोबार और मंदा हो जाता। सिविल लाइंस में हैंडलूम की दुकान है। यहां पर ऊनों की बिक्री होती है। अमित त्रिपाठी का कहना है कि इस साल धंधा मंदा है। जो ऊन पिछले साल 80 रुपये किलो बिकते थे, इस साल जीएसटी के कारण 100 रुपये किलो हो गए हैं और बिक्री प्रभावित है।