फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   सफाई में भाटपाररानी से फिसड्डी रहा देवरिया शहर

सफाई में भाटपाररानी से फिसड्डी रहा देवरिया शहर

Tue, 25 Dec 2018 10:31 PM IST
Harishankar Tiwari हरिशंकर तिवारी
Updated Tue, 25 Dec 2018 10:31 PM IST
विज्ञापन
सफाई में भाटपाररानी से फिसड्डी रहा देवरिया शहर
Dustbin
देवरिया। शहरी क्षेत्र में संसाधन जिले की अन्य निकायों की अपेक्षा अधिक है। प्रबुद्ध और जागरूक लोगों की संख्या भी अधिक है। सभी अफसरों की निगाह यहीं है। यहां तक कि खुद एडीएम के हाथों में नगर पालिका परिषद की कमान है। बावजूद स्वच्छता के लिए हुई वार्ड प्रतिस्पर्धा में देवरिया नगर पालिका अन्य निकायों से पिछड़ गया। हालत इतनी बुरी है कि टॉप-3 में भी उसे जगह नहीं मिल पाई। इससे इतर सुदूर बिहार सीमा पर स्थित भाटपाररानी नगर पंचायत ने पहला स्थान हासिल कर लिया। स्वच्छता सर्वेक्षण की यह रिपोर्ट जिम्मेदारों के कार्यप्रणाली की कलई खोल रही है। साफ है कि स्वच्छता के लिए जितनी बातें और दावे हो रहे हैं, धरातल पर उसका कहीं भी पालन नहीं हो रहा।
विज्ञापन

केंद्र और राज्य सरकार अपने-अपने स्तर से गांव नगर को स्वच्छ बनाने के लिए अभियान चला रही हैं। नगरीय निकायों को स्वच्छ बनाने के लिए सरकार तमाम योजनाओं में बजट नगरपालिका व नगर पंचायतों को दे रही है। लोग कूड़ा सड़कों पर ना फेंकें इसके लिए विभिन्न जगहों पर डस्टबिन लगाने की योजना है। घरों का सूखा व गीला कचरा निस्तारण के लिए डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था अपनाने की प्रक्रिया है। नालियां पॉलीथिन से जाम न हों इसके लिए प्रदेश सरकार ने पॉलीथिन पर बैन लगा दिया। सरकार के बनाए सभी कायदे कानून कागजों तक सिमट कर रह गए हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में हर बार पटखनी मिलने के बावजूद बद इंतजामी में कोई सुधार नहीं आ रहा है। आम लोगों में भी जागरूकता की कमी है। यही कारण है कि जिला मुख्यालय होने के बावजूद नगरपालिका नगर पंचायतों से भी फिसड्डी साबित हुई है।
विज्ञापन


स्वच्छता सर्वेक्षण में भी मिली थी मात
केंद्र सरकार की ओर से हर साल कराए जाने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण में नगरपालिका का प्रदर्शन साल दर साल बदहाल रहा है। वर्ष 2017 में नगरपालिका को 339वां रैंक मिला था, जबकि वर्ष 2018 में नगरपालिका 379वें पायदान पर पहुंच गई। स्वच्छ वार्ड प्रतिस्पर्धा में भी नगरपालिका परिषद देवरिया को अपने जिले में चौथा स्थान मिला है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां हुई चूक

कारण नंबर एक
जिला मुख्यालय होने के बावजूद शहर में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था नहीं है। छह माह पूर्व जिस प्राइवेट कंपनी को ट्रायल पर रखा गया था, उसने काम बंद कर दिया। बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पास होने के बावजूद अभी तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। यह व्यवस्था लागू नहीं होने के चलते घरों का कूड़ा लोग सड़क पर फेंकते हैं।

कारण नंबर दो
डस्टबिन की कमी
नगर के चौक-चौराहों से लगायत सार्वजनिक स्थलों पर डस्टबिन की व्यवस्था नहीं है। झाडू लगने के बाद भी लोग फालतू कागज या पैकेट जहां-तहां फेंकते रहते हैं। यही कारण है कि सफाई होने के बावजूद भी नगर की सड़कें साफ नहीं रह पातीं। आम आदमी में सफाई के प्रति जागरूकता की कमी है।

कारण नंबर तीन
पॉलीथिन पर रोक बेअसर
पॉलीथिन पर बैन होने के बावजूद इस पर अमल नहीं होना भी शहर में गंदगी का प्रमुख कारण है। पॉलीथिन का उपयोग करने के बाद लोग उसे नालियों में फेंक देते हैं। इस कारण नालियां जाम होती हैं। नाले का पानी सड़कों पर बहने लगता है। पॉलीथिन पर प्रभावी रोक नहीं होना भी एक कारण रहा।

कारण नंबर चार
सजग नहीं हैं लोग
कहने के लिए शहर के लोग जागरूक और प्रबुद्ध हैं, मगर अपने दायित्वों के प्रति सजगता कम है। यही कारण है कि बार-बार याद दिलाने और अभियान चलाने के बावजूद स्वच्छता की आदत नहीं बन पा रही। नगरवासी स्वच्छता में नगरपालिका का सहयोग नहीं करते। घरों का कचरा झाडू लगने के बाद भी सड़कों पर फेंक देते हैं। कूड़ा संग्रह के लिए घरों में कूड़ेदान नहीं रखते। कई ऐसे भवन स्वामी हैं जिन्होंने किराएदार तो रखे हैं, लेकिन उन्हें शौचालय की सुविधा नहीं देते।
ऐसे हुई वार्ड प्रतिस्पर्धा
स्वच्छ वार्ड प्रतिस्पर्धा के लिए प्रत्येक नगरपालिका व नगर पंचायत में स्थानीय ईओ की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई। 11 बिंदुओं को ध्यान में रखकर प्रत्येक वार्डों के लिए दो हजार अंक निर्धारित किए गए थे। नगरपालिका के वार्डों के मूल्यांकन का जिम्मा कर अधीक्षक हरिश्चंद्र और आलोक कुमार को दिया गया था। प्रतिस्पर्धा में अव्वल निकायों को 23 दिसंबर को पं. दीनदयाल सभागार में प्रमाण पत्र दिया गया। प्रदेश स्तर पर अव्वल आने वाली निकायों को 25 दिसंबर को राज्य सरकार की ओर से पुरस्कृत किया जाएगा।


शासन की मंशा के अनुरूप स्वच्छता को लेकर सक्रियता बरती जा रही है। नगर पालिकाओं के बीच हुई वार्ड प्रतिस्पर्धा में देवरिया को प्रथम है। नगर पंचायतों को जोड़ने बाद चौथा स्थान प्राप्त होता है। सभी नगरीय निकायों को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- सीताराम गुप्ता, एडीएम, प्रभारी ईओ नगरपालिका परिषद देवरिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed