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रात में मरीज भगवान भरोसे
Updated Sat, 09 Dec 2017 11:18 PM IST
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जिला अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती मरीजो को कंबल नही मिलने पर घर से लाना पडता है रजाई।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीज रात में भगवान भरोसे रहते हैं। रात में नर्स और वार्ड ब्वाय से ही काम चलाना पड़ता है या फिर सुबह डॉक्टरों के आने का इंतजार करना पड़ता है। ठंड भरी रात में मरीज घर से लाए कंबल का इस्तेमाल करते हैं। जिस बेड पर मरीज लेटा होता है, तीमारदार उसी पर बैठकर खाना खाते हैं।
शुक्रवार की रात को ‘अमर उजाला’ टीम ने जिला अस्पताल के इंतजाम का जायजा लिया। नए सीएमएस डॉ. छोटेलाल के आने के बाद वार्डों की हालत कुछ सुधरी है। बेडों पर चादर बदले जाने लगे हैं। फिर भी तमाम खामियां सामने आईं। महिला मेडिकल वार्ड में काफी बेड खाली थे। बेड नंबर-एक पर भर्ती मरीज के तीमारदार उसी पर बैठकर खाना खा रहे थे। बेड नंबर-18 पर चंद्रावती देवी भर्ती हैं। पिपरा दवन के रहने वाले तीमारदार देवानंद सिंह ने बताया कि बस दिन में डॉक्टर राउंड पर आते हैं। रात को इमरजेंसी पड़ने पर नर्स और वार्ड ब्वाय ही देखते हैं। बेड-19 पर दुर्गावती देवी भर्ती हैं। पति राजेश का भी आरोप था कि रात में मरीजों को भगवान भरोसे रहना पड़ता है।
वार्ड में लेग आक्सीजन यंत्र बने शोपीस
जिला अस्पताल के जेई, एईएस वार्ड में लगे आक्सीजन यंत्र शोपीस हैं। कुछ तो टूटे-फूटे हैं। सही सलामत सिलेंडरों में भी आक्सीजन की सप्लाई नहीं है। इस वार्ड में तैनात नर्स ने बताया कि आक्सीजन की सप्लाई का कंट्रोल आईसीयू वार्ड से होता है। जरूरत पड़ने पर सप्लाई चालू कराई जाती है। हालांकि जेई, एईएस के लिए आईसीयू वार्ड भी है। गंभीर रोगियों को वहीं पर रखा जाता है।
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29 की जगह 23 डॉक्टर तैनात
देवरिया। जिला अस्पताल में डॉक्टर के 29 पद हैं, लेकिन 23 की ही तैनाती है। छह डॉक्टर की कमी है। सीएमएस डॉ. छोटेलाल चिकित्सकों के रिक्त पद को भरने के लिए शासन को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन स्थानांतरण के बाद डॉक्टरों के लंबी छुट्टी पर चले जाने से सीट भर नहीं हो पाती हैं।
तीमारदार बोले, बेहतर हो व्यवस्था
मरीजों के साथ जिला अस्पताल में मौजूद तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल में बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। रात में भी डॉक्टरों को राउंड लगाना चाहिए। पिपरा दवन के देवानंद सिंह ने कहा कि इमरजेंसी में मरीज को समस्या हो जाती है। नर्स और वार्ड ब्वाय ही मरीज को देखते हैं। राजेश शुक्ला ने कहा कि उनकी पत्नी दो दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। सुबह ही डॉक्टर देखने आते हैं। इसके बाद कोई नहीं आता। ज्ञानप्रकाश ने कहा कि चूंकि देवरिया बिहार से सटा है, इसलिए बिहार के आसपास के मरीज भी यहां आते हैं। जिला अस्पताल की क्षमता में इजाफा होना चाहिए। सुमन देवी ने कहा कि कंबल नहीं मिलने पर घर से मंगाना पड़ा।
भर्ती मरीजों को कंबल दिया जाता है। बहुत से मरीज खुद का कंबल इस्तेमाल करते हैं। रात में इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मरीजों को जरूरत पड़ने पर वार्ड में जाकर देखते हैं। यदि मरीजों और तीमारदारों की ऐसी शिकायत है तो आज रात वह खुद राउंड पर जाएंगे।
डॉ. छोटेलाल, सीएमएस
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शुक्रवार की रात को ‘अमर उजाला’ टीम ने जिला अस्पताल के इंतजाम का जायजा लिया। नए सीएमएस डॉ. छोटेलाल के आने के बाद वार्डों की हालत कुछ सुधरी है। बेडों पर चादर बदले जाने लगे हैं। फिर भी तमाम खामियां सामने आईं। महिला मेडिकल वार्ड में काफी बेड खाली थे। बेड नंबर-एक पर भर्ती मरीज के तीमारदार उसी पर बैठकर खाना खा रहे थे। बेड नंबर-18 पर चंद्रावती देवी भर्ती हैं। पिपरा दवन के रहने वाले तीमारदार देवानंद सिंह ने बताया कि बस दिन में डॉक्टर राउंड पर आते हैं। रात को इमरजेंसी पड़ने पर नर्स और वार्ड ब्वाय ही देखते हैं। बेड-19 पर दुर्गावती देवी भर्ती हैं। पति राजेश का भी आरोप था कि रात में मरीजों को भगवान भरोसे रहना पड़ता है।
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वार्ड में लेग आक्सीजन यंत्र बने शोपीस
जिला अस्पताल के जेई, एईएस वार्ड में लगे आक्सीजन यंत्र शोपीस हैं। कुछ तो टूटे-फूटे हैं। सही सलामत सिलेंडरों में भी आक्सीजन की सप्लाई नहीं है। इस वार्ड में तैनात नर्स ने बताया कि आक्सीजन की सप्लाई का कंट्रोल आईसीयू वार्ड से होता है। जरूरत पड़ने पर सप्लाई चालू कराई जाती है। हालांकि जेई, एईएस के लिए आईसीयू वार्ड भी है। गंभीर रोगियों को वहीं पर रखा जाता है।
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29 की जगह 23 डॉक्टर तैनात
देवरिया। जिला अस्पताल में डॉक्टर के 29 पद हैं, लेकिन 23 की ही तैनाती है। छह डॉक्टर की कमी है। सीएमएस डॉ. छोटेलाल चिकित्सकों के रिक्त पद को भरने के लिए शासन को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन स्थानांतरण के बाद डॉक्टरों के लंबी छुट्टी पर चले जाने से सीट भर नहीं हो पाती हैं।
तीमारदार बोले, बेहतर हो व्यवस्था
मरीजों के साथ जिला अस्पताल में मौजूद तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल में बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। रात में भी डॉक्टरों को राउंड लगाना चाहिए। पिपरा दवन के देवानंद सिंह ने कहा कि इमरजेंसी में मरीज को समस्या हो जाती है। नर्स और वार्ड ब्वाय ही मरीज को देखते हैं। राजेश शुक्ला ने कहा कि उनकी पत्नी दो दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। सुबह ही डॉक्टर देखने आते हैं। इसके बाद कोई नहीं आता। ज्ञानप्रकाश ने कहा कि चूंकि देवरिया बिहार से सटा है, इसलिए बिहार के आसपास के मरीज भी यहां आते हैं। जिला अस्पताल की क्षमता में इजाफा होना चाहिए। सुमन देवी ने कहा कि कंबल नहीं मिलने पर घर से मंगाना पड़ा।
भर्ती मरीजों को कंबल दिया जाता है। बहुत से मरीज खुद का कंबल इस्तेमाल करते हैं। रात में इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मरीजों को जरूरत पड़ने पर वार्ड में जाकर देखते हैं। यदि मरीजों और तीमारदारों की ऐसी शिकायत है तो आज रात वह खुद राउंड पर जाएंगे।
डॉ. छोटेलाल, सीएमएस