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बड़ी जीत के बड़े मायने और बड़ी चुनौतियां भी
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नव निर्वाचित सांसद रमापति राम त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। लोकसभा चुनाव में देवरिया सीट पर 2.46 लाख के अंतर से भाजपा को मिली जीत कई मायनों में खास है। जाति-धर्म के बंधनों को तोड़कर जनता ने एकतरफा जनादेश से न सिर्फ भाजपा सरकार की नीतियों और योजनाओं पर मुहर लगाई है, बल्कि नए सांसद पर उम्मीदों का बोझ भी लाद लिया है। वर्षों से विकास का सूखा झेलते आ रहे देवरिया के अरमानों को पिछले पांच वर्षों में जो पंख लगे हैं, उससे बुलंदियों का आसमान छूने को लोग लालायित हैं। अधूरे कार्यों को समय पूरा कराने का जिम्मा तो है ही, चीनी मिलों को चलवाने, कृषि विश्वविद्यालय सहित कई अन्य परियोजनाओं की मंजूरी के लिए भी लोगों की आशाएं बढ़ी हैं। 57 प्रतिशत वोटरों का स्नेह पाने वाले रमापति को ब्याज समेत मूल चुकाने के लिए कड़ी चुनौतियों से जूझना होगा।
वर्ष 2014 में देवरिया के मतदाताओं ने 51 फीसदी वोट देकर कलराज मिश्र को प्रतिनिधि चुना था। बदले में उन्हें मेडिकल कॉलेज, रिंग रोड, बाईपास, फोरलेन, केंद्रीय विद्यालय जैसी परियोजनाएं मिली तो उत्साह चरम पर पहुंचा। नतीजा इस बार उनके उत्तराधिकारी के रुप में आए रमापति राम त्रिपाठी को 57 फीसदी से अधिक वोट देकर संसद भेजा है। मतदाताओं ने भारी जनादेश से स्पष्ट कर दिया है कि वह विकास की राह में आगे बढ़ने के लिए कमर कस चुके हैं। देवरिया के पिछड़ेपन का बड़ा कारण स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सड़कों की बदहाली रही है। मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े बदलाव की शुरुआत है तो रिंग रोड, बाईपास, फोरलेन ने आवागमन को सुगम बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है। इन परियोजनाओं को मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। अब इन्हें तय समय में पूरा कराने की चुनौती है। इसके अलावा रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक सुधार की जरूरत है। काम की तलाश में परदेश रह रहे लाखों युवा घर लौटने को बेताब हैं, मगर स्थानीय स्तर पर अब तक इसकी कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। चीनी मिल, नई औद्योगिक इकाइयां इसका जरिया बन सकती है। इसके लिए प्रभावी और ठोस पहल की जरूरत है। बड़े राजनीतिक कद वाले नए सांसद से जनता को इस दिशा में पहल की उम्मीद बंधी है।
चीनी मिल जरूरी : गन्ना उत्पादन वाले इस क्षेत्र में चीनी मिल बेहद जरूरी है। पूर्ववर्ती सरकारों की उपेक्षा से भटनी, बैतालपुर, गौरीबाजार और देवरिया की चीनी मिलों पर ताला लग चुका है। एकमात्र मिल बिहार सीमा पर प्रतापपुर में संचालित है। चीनी मिल इस चुनाव में बड़ा मुद्दा रहा है। पीएम-सीएम ने भी अपने भाषणों में बंद मिलों का जिक्र करते हुए चालू कराने का वादा किया है। वादे को अमल में लाना नए सांसद की चुनौती है।
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कृषि विश्वविद्यालय : उच्च शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए बीआरडीपीजी कॉलेज को कृषि विश्वविद्यालय बनाने की मांग अरसे से हो रही है। छात्र, शिक्षक सहित हर वर्ग को इस आंदोलन का समर्थन है। निवर्तमान सांसद कलराज मिश्र ने भी इसके लिए पुरजोर आवाज उठाई थी। सभी मानकों को पूरा करने वाले इस कॉलेज के कृषि विश्वविद्यालय बनने से युवाओं की तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। कृषि आधारित रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
जाम से मुक्ति : शहर की तेजी से बढ़ती आबादी के बीच जाम एक बड़ी समस्या के रुप में उभरी है। शहर के विकास, विस्तार और व्यापार में जाम सबसे बड़ी बाधा है। बाईपास और रिंग रोड के प्रस्ताव तो स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन कार्य गति नहीं पकड़ पाया है। नए सांसद को इस दिशा में विशेष प्रयास कर तेजी दिखानी होगी।
विकास प्राधिकरण : देवरिया के सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास के लिए देवरिया विकास प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कलराज मिश्र के कार्यकाल में ही जिला प्रशासन की ओर से एक प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। शहर से सटे ग्रामीण इलाकों को इसमें शामिल करते हुए विकास प्राधिकरण की सिफारिश की गई है। प्राधिकरण को मंजूरी मिले तो नए आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित होंगे।
जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश रहेगी। अग्रज कलराज मिश्र ने जो कार्य शुरू कराए थे, उसे पूरा कराने के साथ ही रोजगार, शिक्षा और विकास के अन्य क्षेत्रों में योजना बनाकर नए कार्य कराएंगे। चीनी मिलों को शुरू कराना प्राथमिकता में है। जल्द ही इसका असर दिखेगा। - डॉ. रमापति राम त्रिपाठी, सांसद
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वर्ष 2014 में देवरिया के मतदाताओं ने 51 फीसदी वोट देकर कलराज मिश्र को प्रतिनिधि चुना था। बदले में उन्हें मेडिकल कॉलेज, रिंग रोड, बाईपास, फोरलेन, केंद्रीय विद्यालय जैसी परियोजनाएं मिली तो उत्साह चरम पर पहुंचा। नतीजा इस बार उनके उत्तराधिकारी के रुप में आए रमापति राम त्रिपाठी को 57 फीसदी से अधिक वोट देकर संसद भेजा है। मतदाताओं ने भारी जनादेश से स्पष्ट कर दिया है कि वह विकास की राह में आगे बढ़ने के लिए कमर कस चुके हैं। देवरिया के पिछड़ेपन का बड़ा कारण स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सड़कों की बदहाली रही है। मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े बदलाव की शुरुआत है तो रिंग रोड, बाईपास, फोरलेन ने आवागमन को सुगम बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है। इन परियोजनाओं को मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। अब इन्हें तय समय में पूरा कराने की चुनौती है। इसके अलावा रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक सुधार की जरूरत है। काम की तलाश में परदेश रह रहे लाखों युवा घर लौटने को बेताब हैं, मगर स्थानीय स्तर पर अब तक इसकी कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। चीनी मिल, नई औद्योगिक इकाइयां इसका जरिया बन सकती है। इसके लिए प्रभावी और ठोस पहल की जरूरत है। बड़े राजनीतिक कद वाले नए सांसद से जनता को इस दिशा में पहल की उम्मीद बंधी है।
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चीनी मिल जरूरी : गन्ना उत्पादन वाले इस क्षेत्र में चीनी मिल बेहद जरूरी है। पूर्ववर्ती सरकारों की उपेक्षा से भटनी, बैतालपुर, गौरीबाजार और देवरिया की चीनी मिलों पर ताला लग चुका है। एकमात्र मिल बिहार सीमा पर प्रतापपुर में संचालित है। चीनी मिल इस चुनाव में बड़ा मुद्दा रहा है। पीएम-सीएम ने भी अपने भाषणों में बंद मिलों का जिक्र करते हुए चालू कराने का वादा किया है। वादे को अमल में लाना नए सांसद की चुनौती है।
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कृषि विश्वविद्यालय : उच्च शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए बीआरडीपीजी कॉलेज को कृषि विश्वविद्यालय बनाने की मांग अरसे से हो रही है। छात्र, शिक्षक सहित हर वर्ग को इस आंदोलन का समर्थन है। निवर्तमान सांसद कलराज मिश्र ने भी इसके लिए पुरजोर आवाज उठाई थी। सभी मानकों को पूरा करने वाले इस कॉलेज के कृषि विश्वविद्यालय बनने से युवाओं की तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। कृषि आधारित रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
जाम से मुक्ति : शहर की तेजी से बढ़ती आबादी के बीच जाम एक बड़ी समस्या के रुप में उभरी है। शहर के विकास, विस्तार और व्यापार में जाम सबसे बड़ी बाधा है। बाईपास और रिंग रोड के प्रस्ताव तो स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन कार्य गति नहीं पकड़ पाया है। नए सांसद को इस दिशा में विशेष प्रयास कर तेजी दिखानी होगी।
विकास प्राधिकरण : देवरिया के सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास के लिए देवरिया विकास प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कलराज मिश्र के कार्यकाल में ही जिला प्रशासन की ओर से एक प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। शहर से सटे ग्रामीण इलाकों को इसमें शामिल करते हुए विकास प्राधिकरण की सिफारिश की गई है। प्राधिकरण को मंजूरी मिले तो नए आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित होंगे।
जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश रहेगी। अग्रज कलराज मिश्र ने जो कार्य शुरू कराए थे, उसे पूरा कराने के साथ ही रोजगार, शिक्षा और विकास के अन्य क्षेत्रों में योजना बनाकर नए कार्य कराएंगे। चीनी मिलों को शुरू कराना प्राथमिकता में है। जल्द ही इसका असर दिखेगा। - डॉ. रमापति राम त्रिपाठी, सांसद