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सियासत के हेलीपैड पर रामाशीष का ‘हेलीकॉप्टर’ क्रैश
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- फोटो : Social media
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देवरिया। सियासत की पिच पर भाजयुमो के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रामाशीष राय का ‘हेलीकॉप्टर’ उड़ान नहीं भर सका। भाजपा से बगावत कर वह निर्दल प्रत्याशी के रूप में देवरिया लोकसभा से किस्मत आजमा रहे थे। परिणाम आया तो उनको मिले मत नोटा की गिनती से भी कम रहे।
पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र के ओलीपट्टी गांव के रहने वाले रामाशीष राय वर्ष 1998 से 2000 तक भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। मई 1997 से 2003 तक वह विधान परिषद के सदस्य भी रहे। भाजपा बचाओ मंच में शामिल होने के चलते वर्ष 2003 में उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। देवरिया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उन्होंने 105600 मत हासिल किया था। जीत सपा के मोहन सिंह के हाथ लगी थी। भाजपा प्रत्याशी श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी दूसरे और बसपा से देवी सिंह तीसरे स्थान पर रहे। कुछ वर्ष बाद वह फिर से भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के दौरान इन्हें वहां का प्रभारी बनाया था। इसके बाद यह लगने लगा था कि रामाशीष राय फिर मुख्यधारा में हैं और पार्टी कहीं न कहीं इनका समायोजन करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। देवरिया लोकसभा से उन्होंने दावेदारी पेश की। जब टिकट नहीं मिला तो बगावत कर वह देवरिया लोकसभा से मैदान में कूद पड़े। उनको हेलीकाप्टर चुनाव चिह्न मिला। गुरुवार को परिणाम आया तो उनको मात्र 7902 मत मिले। इनसे अधिक मत 13421 नोटा को मिले हैं। राजनीतिक गलियारे में अब यह चर्चा होने लगी है कि रामाशीष राय ने चुनाव लड़कर बड़ी भूल की है। हालांकि पार्टी ने अभी उन्हें न तो निष्कासित किया है और ना ही निलंबित।
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पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र के ओलीपट्टी गांव के रहने वाले रामाशीष राय वर्ष 1998 से 2000 तक भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। मई 1997 से 2003 तक वह विधान परिषद के सदस्य भी रहे। भाजपा बचाओ मंच में शामिल होने के चलते वर्ष 2003 में उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। देवरिया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उन्होंने 105600 मत हासिल किया था। जीत सपा के मोहन सिंह के हाथ लगी थी। भाजपा प्रत्याशी श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी दूसरे और बसपा से देवी सिंह तीसरे स्थान पर रहे। कुछ वर्ष बाद वह फिर से भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के दौरान इन्हें वहां का प्रभारी बनाया था। इसके बाद यह लगने लगा था कि रामाशीष राय फिर मुख्यधारा में हैं और पार्टी कहीं न कहीं इनका समायोजन करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। देवरिया लोकसभा से उन्होंने दावेदारी पेश की। जब टिकट नहीं मिला तो बगावत कर वह देवरिया लोकसभा से मैदान में कूद पड़े। उनको हेलीकाप्टर चुनाव चिह्न मिला। गुरुवार को परिणाम आया तो उनको मात्र 7902 मत मिले। इनसे अधिक मत 13421 नोटा को मिले हैं। राजनीतिक गलियारे में अब यह चर्चा होने लगी है कि रामाशीष राय ने चुनाव लड़कर बड़ी भूल की है। हालांकि पार्टी ने अभी उन्हें न तो निष्कासित किया है और ना ही निलंबित।
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