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न बंधी मां की पेंशन, न मिली बेटे को नौकरी
Updated Tue, 25 Jul 2017 10:22 PM IST
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देवरिया। शहीद प्रेमसागर के परिजन इन दिनों मुफलिसी के शिकार हैं। न तो शहीद की पत्नी की पेंशन मिल पाई है और न ही बेटे को नौकरी। बैंक में जमा रुपयों से घर का खर्च चल रहा है। छोटे बेटे रणविजय की फीस भी नहीं जमा हो पाई है। गनीमत इस बात की है कि स्कूलवालों ने कह दिया है कि जब पेंशन मिलेगी तो फीस जमा कर देना।
टीकमपार निवासी बीएसएफ जवान प्रेमसागर की तैनाती जम्मू-कश्मीर के पुंछ में थी। एक मई-2017 को पाक सैनिकों ने उनका सिर कलम कर दिया था। शहीद के घर श्रद्धांजलि देने 12 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आए थे। उन्होंने शहीद स्मारक का निर्माण, रतसिया-प्रतापुर मार्ग का नाम शहीद प्रेमसागर रखने और शहीद के नाम पर विद्यालय खोलने की थी। प्रेमसागर को शहीद हुए दो माह 25 दिन गुजर चुके हैं। शहीद प्रेम सागर के दो बेटे और दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी सरोज की शादी हो चुकी है। इसके बाद बेटे ईश्वर चंद हैं। फिर बेटी मोनिका और बेटे रणविजय हैं। रणविजय सलेमपुर में एक कान्वेंट स्कूल में, बेटी मोनिका गांव के इंटर कॉलेज में पढ़ती है। शहीद की पत्नी ज्ञानती का कहना है कि अब तक पेंशन नहीं बंध पाई है। न ही बेटे को नौकरी मिली है। ऐसे में घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। न ही पति का सामान ही आया है। ग्राम प्रधान लाल मोहम्मद ने कहा कि शहीद के घर से शहीद स्मारक तक सड़क बननी थी, लेकिन यह आश्वासन सिर्फ आश्वासन बनकर रह गया है। इस बाबत भाटपाररानी के एसडीएम रामकेश का कहना है कि शहीद स्मारक और विद्यालय निर्माण के लिए जमीन आरक्षित कर ली गई है। रही बात मार्ग नामकरण का तो यह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
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टीकमपार निवासी बीएसएफ जवान प्रेमसागर की तैनाती जम्मू-कश्मीर के पुंछ में थी। एक मई-2017 को पाक सैनिकों ने उनका सिर कलम कर दिया था। शहीद के घर श्रद्धांजलि देने 12 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आए थे। उन्होंने शहीद स्मारक का निर्माण, रतसिया-प्रतापुर मार्ग का नाम शहीद प्रेमसागर रखने और शहीद के नाम पर विद्यालय खोलने की थी। प्रेमसागर को शहीद हुए दो माह 25 दिन गुजर चुके हैं। शहीद प्रेम सागर के दो बेटे और दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी सरोज की शादी हो चुकी है। इसके बाद बेटे ईश्वर चंद हैं। फिर बेटी मोनिका और बेटे रणविजय हैं। रणविजय सलेमपुर में एक कान्वेंट स्कूल में, बेटी मोनिका गांव के इंटर कॉलेज में पढ़ती है। शहीद की पत्नी ज्ञानती का कहना है कि अब तक पेंशन नहीं बंध पाई है। न ही बेटे को नौकरी मिली है। ऐसे में घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। न ही पति का सामान ही आया है। ग्राम प्रधान लाल मोहम्मद ने कहा कि शहीद के घर से शहीद स्मारक तक सड़क बननी थी, लेकिन यह आश्वासन सिर्फ आश्वासन बनकर रह गया है। इस बाबत भाटपाररानी के एसडीएम रामकेश का कहना है कि शहीद स्मारक और विद्यालय निर्माण के लिए जमीन आरक्षित कर ली गई है। रही बात मार्ग नामकरण का तो यह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
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