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सब रजिस्ट्रार समेत पांच की जमानत खारिज
Updated Thu, 07 Jun 2018 10:48 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : amar ujala
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देवरिया। दीपक मणि अपहरण और जमीन बैनामा में साजिश रचने के आरोप में सलाखों में बंद सब रजिस्ट्रार समेत पांच कर्मचारियों की गुरुवार को जमानत खारिज हो गई। इस प्रकरण में गैर जनपद से आए वकीलों ने न्यायालय में साक्ष्य और सबूत के आधार पर जिरह की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद एडीजे-छह ने फैसला सुनाया।
देवरिया खास निवासी दीपक मणि का अपहरण कर जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव ने करोड़ों की प्रापर्टी बैनामा करा लिया। इसमें सब रजिस्ट्रार फूलचंद्र यादव समेत कार्यालय के अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता रही। पुलिस तक मामला पहुंचा तो कानूनी शिकंजा कसना शुरू हुआ। शुरुआती दौर में पुलिस ने जिला पंचायत अध्यक्ष के भाई समेत पांच लोगों को जेल भेजा। साक्ष्य के आधार पर तीन दिन बाद तत्कालीन सब रजिस्ट्रार फूलचंद्र यादव, वरिष्ठ सहायक सोमनाथ राव, सहायक रामसरन सिंह, स्टांप लेखक कौशल किशोर गुप्ता और कंप्यूटर ऑपरेटर शोएब चिश्ती को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। इस मामले में अपर जिला जज गजेंद्र कुमार के कोर्ट संख्या (छह) में जमानत के लिए फाइल लगी थी। सब रजिस्ट्रार की ओर से कई नामी वकील भी आए थे और दो घंटे बहस भी हुई। बावजूद अपर जिला जज ने पांचों की जमानत को खारिज कर दी।
दीपक के वकील को दी धमकी
न्यायालय के बाहर सब रजिस्ट्रार रहे फूलचंद्र के करीबी और जमीन कारोबारियों की टीम जमी रही। जमानत खारिज होने की जानकारी शाम पांच बजे हुई तो सभी के चेहरों पर मायूसी छा गई। वहीं गोरखपुर से आए दीपक मणि के वकील त्रियुगी नारायण शाही का आरोप है कि पांच जून को फूलचंद्र के एक रिश्तेदार ने मुकदमे में पैरवी नहीं करने के लिए दबाव डाला। मना करने पर धमकी भी दी। हालांकि पुलिस को मामले की जानकारी नहीं दी गई है। त्रियुगी नारायण ने बताया कि उप निबंधन कार्यालय बलिया से जनवरी माह में सेवानिवृत्त हुआ हूं। देवरिया में भी मैं काफी दिनों तक तैनात रहा। सिर्फ दीपक मणि नहीं, इनके जैसे निरीह लोगों का मुकदमा बिना फीस लिए लड़ूंगा।
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नौ मिनट में हुआ पांच बैनामा
दीपक के वकील त्रियुगी नारायण शाही का दावा है कि नौ मिनट में पांच बैनामा किया गया है। एक बैनामे में बहुत जल्दी हो तो कम से कम पांच मिनट समय लगता है। इसलिए सुनियोजित तरीके से रजिस्ट्री कार्यालय कर्मचारियों की मिलीभगत से यह बैनामा किया गया है।
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देवरिया खास निवासी दीपक मणि का अपहरण कर जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव ने करोड़ों की प्रापर्टी बैनामा करा लिया। इसमें सब रजिस्ट्रार फूलचंद्र यादव समेत कार्यालय के अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता रही। पुलिस तक मामला पहुंचा तो कानूनी शिकंजा कसना शुरू हुआ। शुरुआती दौर में पुलिस ने जिला पंचायत अध्यक्ष के भाई समेत पांच लोगों को जेल भेजा। साक्ष्य के आधार पर तीन दिन बाद तत्कालीन सब रजिस्ट्रार फूलचंद्र यादव, वरिष्ठ सहायक सोमनाथ राव, सहायक रामसरन सिंह, स्टांप लेखक कौशल किशोर गुप्ता और कंप्यूटर ऑपरेटर शोएब चिश्ती को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। इस मामले में अपर जिला जज गजेंद्र कुमार के कोर्ट संख्या (छह) में जमानत के लिए फाइल लगी थी। सब रजिस्ट्रार की ओर से कई नामी वकील भी आए थे और दो घंटे बहस भी हुई। बावजूद अपर जिला जज ने पांचों की जमानत को खारिज कर दी।
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दीपक के वकील को दी धमकी
न्यायालय के बाहर सब रजिस्ट्रार रहे फूलचंद्र के करीबी और जमीन कारोबारियों की टीम जमी रही। जमानत खारिज होने की जानकारी शाम पांच बजे हुई तो सभी के चेहरों पर मायूसी छा गई। वहीं गोरखपुर से आए दीपक मणि के वकील त्रियुगी नारायण शाही का आरोप है कि पांच जून को फूलचंद्र के एक रिश्तेदार ने मुकदमे में पैरवी नहीं करने के लिए दबाव डाला। मना करने पर धमकी भी दी। हालांकि पुलिस को मामले की जानकारी नहीं दी गई है। त्रियुगी नारायण ने बताया कि उप निबंधन कार्यालय बलिया से जनवरी माह में सेवानिवृत्त हुआ हूं। देवरिया में भी मैं काफी दिनों तक तैनात रहा। सिर्फ दीपक मणि नहीं, इनके जैसे निरीह लोगों का मुकदमा बिना फीस लिए लड़ूंगा।
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नौ मिनट में हुआ पांच बैनामा
दीपक के वकील त्रियुगी नारायण शाही का दावा है कि नौ मिनट में पांच बैनामा किया गया है। एक बैनामे में बहुत जल्दी हो तो कम से कम पांच मिनट समय लगता है। इसलिए सुनियोजित तरीके से रजिस्ट्री कार्यालय कर्मचारियों की मिलीभगत से यह बैनामा किया गया है।