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बैतालपुर चीनी मिल चालू कराने की भरी हुंकार
Updated Wed, 14 Mar 2018 10:42 PM IST
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बैतालपुर चीनी मिल गेट पर धरना देते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने बुधवार को बैतालपुर चीनी मिल गेट पर धरना-प्रदर्शन किया। नेतृत्व जिलाध्यक्ष ब्रजेंद्र मणि त्रिपाठी और संयोजक अवधेश मणि त्रिपाठी ने किया। वक्ताओं ने कहा कि बैतालपुर चीनी मिल चालू कराना प्रतिष्ठा से जुड़ा है।
अध्यक्ष ब्रजेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि क्षेत्र के किसानों की खुशहाली का साधन बैतालपुर चीनी मिल हुआ करती थी। पूर्ववर्ती सरकारों ने कुटिल राजनीति की भेंट चढ़ गई। इसी मिल को चालू कराने के मुद्दे पर यहां के सांसद, विधायक जनता का आशीर्वाद पाकर सदन तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री ने 2018 में देवरिया में चीनी मिल चालू कराने की घोषणा की थी लेकिन इस साल के बजट में यहां के लिए एक भी पैसे का भी प्रावधान नहीं किया गया है। यदि सरकार चाहे तो पल भर में चीनी मिल की घोषणा पर अमल शुरू हो जाएगा। चीनी मिल चलने तक संघर्ष समिति जिले के किसानों के साथ आंदोलन करती रहेगी। संयोजक अवधेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि बैतालपुर चीनी मिल के चलने में कोई विशेष बाधा नहीं है। केवल सरकार और मिल मालिक की नीयत साफ होनी चाहिए। चीनी मिल चलाने और गन्ने की पेराई के उद्देश्य से ही चीनी मिल बेची गई थी। उसके संचालन के लिए क्रेता बाध्य हैं। इस दौरान रामप्रकाश सिंह, चंद्रप्रकाश सिंह, अनिल पति त्रिपाठी, सुनील भारती, सुरेश सिंह, जगदीश कुशवाहा, डॉ. चतुरानन ओझा और मंजू चौहान आदि मौजूद रहे।
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अध्यक्ष ब्रजेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि क्षेत्र के किसानों की खुशहाली का साधन बैतालपुर चीनी मिल हुआ करती थी। पूर्ववर्ती सरकारों ने कुटिल राजनीति की भेंट चढ़ गई। इसी मिल को चालू कराने के मुद्दे पर यहां के सांसद, विधायक जनता का आशीर्वाद पाकर सदन तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री ने 2018 में देवरिया में चीनी मिल चालू कराने की घोषणा की थी लेकिन इस साल के बजट में यहां के लिए एक भी पैसे का भी प्रावधान नहीं किया गया है। यदि सरकार चाहे तो पल भर में चीनी मिल की घोषणा पर अमल शुरू हो जाएगा। चीनी मिल चलने तक संघर्ष समिति जिले के किसानों के साथ आंदोलन करती रहेगी। संयोजक अवधेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि बैतालपुर चीनी मिल के चलने में कोई विशेष बाधा नहीं है। केवल सरकार और मिल मालिक की नीयत साफ होनी चाहिए। चीनी मिल चलाने और गन्ने की पेराई के उद्देश्य से ही चीनी मिल बेची गई थी। उसके संचालन के लिए क्रेता बाध्य हैं। इस दौरान रामप्रकाश सिंह, चंद्रप्रकाश सिंह, अनिल पति त्रिपाठी, सुनील भारती, सुरेश सिंह, जगदीश कुशवाहा, डॉ. चतुरानन ओझा और मंजू चौहान आदि मौजूद रहे।
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