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घाघरा का जलस्तर बढ़ा, गांव वाले भयभीत
Updated Tue, 04 Jul 2017 10:35 PM IST
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बरहज। लगातार दो दिनों से हो रही बारिश से घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ गया है। तटवर्ती गांव के लोग बाढ़ की आशंका से भयभीत हैं। करीब छह माह से संगम तट पर हो रहे कटान की सुधि अधिकारियों ने नहीं ली है। इससे लोगों में नाराजगी है।
कपरवार के संगम तट से सरयू और राप्ती एक रास्ते से बहती है। घाघरा बारिश के समय घाघरा प्रचंड रूप धर लेती है। नदी के किनारे 2007 से हो रहे कटान के कारण 20014-15 में कुरह परसियां और गोरखपुर के कोलखास गांव का अस्तित्व खत्म हो गया। यहां रहने वाले लोगों को दूसरे जगह विस्थापित होना पड़ा था। कुवाइच टोला के रामाज्ञा, रंगीला, लाल छबीला आदि का कहना है कि गांव के कटने के बाद भी प्रशासन नहीं चेत रहा है। दो दिनों से घाघरा के जलस्तर में बेतहाशा वृद्धि हुई है। घाट से दो किलोमीटर दक्षिण बह रही नदी जहाज घाट के सीढ़ी पर बने मीटर गेज के अनुसार 64.25 मीटर पर बह रही है। 48 घंटे में घाघरा नदी के जलस्तर में हुए बेतहाशा वृद्धि से लोग सहमें हैं। उपजिलाधिकारी अरुण सिंह ने बताया कि कटान को रोकने के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है।
घाघरा से प्रभावित होंगे 35 गांव
घाघरा के विकराल रूप धारण करने से पुराना बरहज, गौरा, कटइलवा, रगड़गंज, पैना, चक्की मूसाडोही, परसियां और विशुनपुर देवार के 22 टोलों सहित करीब 35 गांवों के लोग बाढ़ की जद में आ जाते हैं। बाढ़ आने पर लोग जान जोखिम में डाल नाव के जरिए आवागमन कर किसी तरह जीवन-यापन करते हैं।
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कपरवार के संगम तट से सरयू और राप्ती एक रास्ते से बहती है। घाघरा बारिश के समय घाघरा प्रचंड रूप धर लेती है। नदी के किनारे 2007 से हो रहे कटान के कारण 20014-15 में कुरह परसियां और गोरखपुर के कोलखास गांव का अस्तित्व खत्म हो गया। यहां रहने वाले लोगों को दूसरे जगह विस्थापित होना पड़ा था। कुवाइच टोला के रामाज्ञा, रंगीला, लाल छबीला आदि का कहना है कि गांव के कटने के बाद भी प्रशासन नहीं चेत रहा है। दो दिनों से घाघरा के जलस्तर में बेतहाशा वृद्धि हुई है। घाट से दो किलोमीटर दक्षिण बह रही नदी जहाज घाट के सीढ़ी पर बने मीटर गेज के अनुसार 64.25 मीटर पर बह रही है। 48 घंटे में घाघरा नदी के जलस्तर में हुए बेतहाशा वृद्धि से लोग सहमें हैं। उपजिलाधिकारी अरुण सिंह ने बताया कि कटान को रोकने के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है।
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घाघरा से प्रभावित होंगे 35 गांव
घाघरा के विकराल रूप धारण करने से पुराना बरहज, गौरा, कटइलवा, रगड़गंज, पैना, चक्की मूसाडोही, परसियां और विशुनपुर देवार के 22 टोलों सहित करीब 35 गांवों के लोग बाढ़ की जद में आ जाते हैं। बाढ़ आने पर लोग जान जोखिम में डाल नाव के जरिए आवागमन कर किसी तरह जीवन-यापन करते हैं।
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