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सरकारी इमदाद के इंतजार में पशुपति
Updated Mon, 13 Nov 2017 11:16 PM IST
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लार नगर में कुपोषण से बच्चो की मौत के बाद वुमेन पावर लाइन की टीम ने पल्लेदार से जानकारी ली।
- फोटो : अमर उजाला
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लार। कुपोषण से बच्चों की जिंदगी गंवाने वाले पल्लेदार पशुपति राजभर की आंखें सरकारी मदद के इंतजार में पथरा रही है। गेहूं और चावल के अलावा पल्लेदार को कोई सहायता नहीं मिली है। सोमवार को वूमन हेल्पलाइन की टीम पहुंचकर मामले की जानकारी जुटाई।
नगर के गयागिर वार्ड निवासी पशुपति राजभर के कुपोषण के शिकार हुए बेटे अजय पांच और खुशबू सात की मौत गुरुवार की रात ढाई घंटे के अंतराल पर हो गई। रविवार को पल्लेदार के घर पहुंचे अफसरों ने ढाढ़स बढ़ाया और सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता राशि दिलाने का आश्वासन दिया। जिला ग्राम विकास अधिकारी एसके पांडेय ने लार के एडीओ रामबचन ने पल्लेदार का बैंक में अकाउंट खुलवाने की बात कही है। लेकिन सोमवार को इसके लिए एडीओ पंचायत ने कोई पहल नहीं की। जिला प्रोवेशन अधिकारी के निर्देश पर पहुंची वूमेन हेल्पलाइन की टीम ने पल्लेदार के घर की हकीकत को जाना। कुपोषण से हुई बच्चों की मौत को झुठलाते हुए अपने बचाव में सभी विभाग के अधिकारी एक ही राग अलाप रहे है। लेकिन सवाल उठता है कि अफसर पलिया से मौत का दावा कर रहे है तो शवों का पोस्टमार्टम कराने से परहेज क्यों, अगर पल्लेदार भोजन के लिए सक्षम है तो एसडीएम ने कोटेदार से क्यों दिलाया राशन ऐसे कई सवाल प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
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नगर के गयागिर वार्ड निवासी पशुपति राजभर के कुपोषण के शिकार हुए बेटे अजय पांच और खुशबू सात की मौत गुरुवार की रात ढाई घंटे के अंतराल पर हो गई। रविवार को पल्लेदार के घर पहुंचे अफसरों ने ढाढ़स बढ़ाया और सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता राशि दिलाने का आश्वासन दिया। जिला ग्राम विकास अधिकारी एसके पांडेय ने लार के एडीओ रामबचन ने पल्लेदार का बैंक में अकाउंट खुलवाने की बात कही है। लेकिन सोमवार को इसके लिए एडीओ पंचायत ने कोई पहल नहीं की। जिला प्रोवेशन अधिकारी के निर्देश पर पहुंची वूमेन हेल्पलाइन की टीम ने पल्लेदार के घर की हकीकत को जाना। कुपोषण से हुई बच्चों की मौत को झुठलाते हुए अपने बचाव में सभी विभाग के अधिकारी एक ही राग अलाप रहे है। लेकिन सवाल उठता है कि अफसर पलिया से मौत का दावा कर रहे है तो शवों का पोस्टमार्टम कराने से परहेज क्यों, अगर पल्लेदार भोजन के लिए सक्षम है तो एसडीएम ने कोटेदार से क्यों दिलाया राशन ऐसे कई सवाल प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
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