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चित्रकूट में दीवार ढही, तीन बच्चों व महिला की मौत
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
Updated Thu, 09 Mar 2017 11:00 PM IST
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हन्ना विनैका गांव में गिरे घर के पास ग्रामीणों से जानकारी लेेते एसडीएम व सीओ
- फोटो : अमर उजाला
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थाना क्षेत्र के हन्ना विनैका गांव में गुरुवार सुबह खंडहर पड़े कच्चे घर की दीवार ढह गई। इसके मलबे में दबकर तीन बच्चों व एक महिला की मौत हो गई। एक बच्चा घायल हो गया। मरने वालों में दो सगे भाई-बहन हैं। ग्रामीणों ने मुआवजे के आश्वासन पर ही शव उठने दिए।
गांव में कृष्ण गोपाल शुक्ला के खंडहर पड़े मकान की दीवार भरभराकर गली की ओर ढह गई। गली में मौजदू गांव की गुड्डी शुक्ला (32) पत्नी गंगा प्रसाद, सौम्या द्विवेदी (5) पुत्री साधूशरण, आनंद पांडेय के दो बच्चे पूनम उर्फ सोनम पांडेय (7) व अंश (5) और आशीष (7) पुत्र अनिल मलबे में दब गए। लोगों ने आनन फानन मलबा हटाया और सभी को बाहर निकालकर सीएचसी मऊ लाए।
यहां डाक्टरों ने आशीष को भर्ती कर बाकी चारों को मृत घोषित कर दिया।घटना की जानकारी पाकर एसडीएम राममूर्ति त्रिपाठी, सीओ वीपी सिंह, थानाध्यक्ष आरबी सिंह आ गए। पुलिस पंचनामा भरकर शव उठाने लगी तो ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि गांव में खंडहर पडे पांच-छह घर कई साल से खाली पड़े हैं।
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जिनके घर हैं, उनसे कई बार प्रधान व अन्य लोग कह चुके हैं कि इन्हें गिरा दें तो हादसे का डर नहीं रहेगा, साथ ही गांव की गलियां भी चौड़ी हो जाएंगी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। इस घटना में जिसके घर की दीवार गिरी है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही पीड़ितों को मुआवजा मिलना चाहिए।
गांववालों ने लगभग दो घंटे तक शव नहीं उठने दिए। बाद में एसडीएम ने आश्वस्त किया कि समाजवादी बीमा योजना के तहत ऐसी घटनाओं में बालिग की मौत पर चार लाख का मुआवजा मिलता है। नाबालिग के लिए क्या प्रावधान है, इसकी जानकारी की जाएगी। इस पर ग्रामीण शांत हो गए और पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव मुख्यालय भेज दिए।
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गांव में कृष्ण गोपाल शुक्ला के खंडहर पड़े मकान की दीवार भरभराकर गली की ओर ढह गई। गली में मौजदू गांव की गुड्डी शुक्ला (32) पत्नी गंगा प्रसाद, सौम्या द्विवेदी (5) पुत्री साधूशरण, आनंद पांडेय के दो बच्चे पूनम उर्फ सोनम पांडेय (7) व अंश (5) और आशीष (7) पुत्र अनिल मलबे में दब गए। लोगों ने आनन फानन मलबा हटाया और सभी को बाहर निकालकर सीएचसी मऊ लाए।
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यहां डाक्टरों ने आशीष को भर्ती कर बाकी चारों को मृत घोषित कर दिया।घटना की जानकारी पाकर एसडीएम राममूर्ति त्रिपाठी, सीओ वीपी सिंह, थानाध्यक्ष आरबी सिंह आ गए। पुलिस पंचनामा भरकर शव उठाने लगी तो ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि गांव में खंडहर पडे पांच-छह घर कई साल से खाली पड़े हैं।
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जिनके घर हैं, उनसे कई बार प्रधान व अन्य लोग कह चुके हैं कि इन्हें गिरा दें तो हादसे का डर नहीं रहेगा, साथ ही गांव की गलियां भी चौड़ी हो जाएंगी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। इस घटना में जिसके घर की दीवार गिरी है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही पीड़ितों को मुआवजा मिलना चाहिए।
गांववालों ने लगभग दो घंटे तक शव नहीं उठने दिए। बाद में एसडीएम ने आश्वस्त किया कि समाजवादी बीमा योजना के तहत ऐसी घटनाओं में बालिग की मौत पर चार लाख का मुआवजा मिलता है। नाबालिग के लिए क्या प्रावधान है, इसकी जानकारी की जाएगी। इस पर ग्रामीण शांत हो गए और पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव मुख्यालय भेज दिए।